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तालिबान के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए रूस ने उठाया ये कदम

तालिबान के संभावित खतरों से निपटने के लिए रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के सैनिकों ने अफगानी सीमा पर अपने संयुक्त युद्धाभ्यास को पूरा कर लिया है । यह युद्धाभ्यास पिछले सप्ताह शुरू हुआ था, जिसमें 2,500 रूसी, ताजिक और उज्बेक सैनिकों ने 500 सैन्य वाहनों के साथ हिस्सा लिया था । मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान से लगी ताजिकिस्तान की सीमा से तकरीबन 20 किलोमीटर उत्तर में हार्ब-मैडन फायरिंग रेंज में यह युद्धाभ्यास चला । इस में सैनिकों ने आतंकवादियों से निपटने को लेकर एक्‍शन कैसे करना है इसका अभ्यास किया । इसमें रूसी Su-25 लड़ाकू विमान भी शामिल हुए और आतंकियों से निपटने को लेकर रिहर्सल की ।

रूसी सेना का बयान
तालिबान के बढ़ते खतरे के बीच रूसी सेना की ओर से इस कदम पर कहा गया कि यह युद्धाभ्यास अफगानिस्तान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति, संभावित खतरों से निपटने, मध्य एशिया में सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्थिरता बनाए रखने के लिए आयोजित किया गया था । रूस के सेंट्रल मिलिट्री डिस्ट्रिक चीफ कर्नल-जनरल अलेक्जेंडर लापिन के मुताबिक, मध्य एशियाई देशों में कट्टरपंथी आतंकवादी गुटों के खतरे और अफगानिस्तान में बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच यह युद्धाभ्यास किया गया । लापिन ने कहा कि, “मुझे विश्वास है कि भविष्य में संयुक्त कार्रवाई सैन्य सहयोग को मजबूत करने और हमारे देशों को सैन्य आक्रमण से बचाने में मदद करेगी।”

आधुनिक हथियारों के साथ परीक्षण
रूसी सेना की ओर से कहा गया है कि तजाकिस्तान में रूसी सैनिकों ने अभ्यास के दौरान नए हथियारों के इस्तेमाल का अभ्यास किया, जिसमें नई स्नाइपर राइफल और फ्लेम थ्रोअर शामिल हैं। रूस ने फगानिस्तान की तरफ से आतंकवादियों की घुसपैठ की स्थिति में अपने सहयोगी और अन्य पूर्व-सोवियत मध्य एशियाई देशों को सैन्य सहायता करने का वादा किया है । आपको बता दें तीन मध्य एशियाई देश कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान मास्को-प्रभुत्व वाले सुरक्षा समझौते ‘द कोलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन’ के सदस्य हैं। यह सुरक्षा समझौता पूर्व सोवियत देश के बीच हुआ है।

रूस का रुख
रूसी न्यूज एजेंसी ताश ने बताया कि रूस के विदेश मंत्री ने इस युद्धाभ्‍यास को जरूरी बताया, उन्‍होंने कहा कि इस अभ्‍यास के बाद ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के सशस्त्र बल संभावित खतरों का सामना करने के लिए तैयार होंगे । भले ही तालिबान नेताओं का कहना है कि वे सीमा पार और पड़ोसियों पर हमले नहीं करेंगे । लेकिन हम तैयार होंगे । वहीं रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने मंगलवार को तालिबान के वादे का जिक्र किया लेकिन वो अफगानिस्तान में बढ़ती शत्रुता से चिंतित भी दिखे । शेइगु ने कहा कि तालिबान अब ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के साथ अफगानिस्तान की सीमाओं को नियंत्रित कर रहा है । आपको बता दें पिछले महीने तालिबान के एक प्रतिनिधिमंडल ने मॉस्को का दौरा किया था और आश्वासन दिया था कि अगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों पर हमले के लिए नहीं करने दिया जाएगा । तालिबान ने ये भी वादा किया कि उससे रूस या मध्य एशिया में उसके सहयोगियों को कोई खतरा नहीं है।

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