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₹64 हजार करोड़ की ‘आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना’ को मोदी सरकार ने दी मंजूरी: जानें क्या है पूरी योजना

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार (15 सितंबर 2021) को 64 हजार करोड़ रुपए की आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना (पीएमएएसबीवाई) योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के अंतर्गत सभी जिलों और 3,382 ब्लॉकों में एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला की स्थापना की जाएगी।

आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना का ऐलान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2021-22 के बजट भाषण के दौरान किया था। इसके तहत यह तय किया गया था कि अगले 6 सालों में यानि वित्त वर्ष 2025-26 तक में करीब 64,160 करोड़ रुपए खर्च किए जाएँगे। हालाँकि यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अतिरिक्त होगा। इस बात की जानकारी खुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दी गई है।

इस योजना के जरिए हेल्थ केयर सिस्टम की क्षमता को बढ़ाने के साथ ही नई बीमारियों का पता लगाने के लिए संस्थानों को विकसित किया जाएगा।

वेलनेस सेंटरों की होगी स्थापना

रिपोर्ट के मुताबिक, आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के अंतर्गत देश के जिन राज्यों में इसकी अधिक आवश्यकता होगी, वहाँ 17878 गाँवों में वेलनेस सेंटर बनाए जाएँगे। इसके अलावा शहरों में भी 11,024 केंद्रों की स्थापना की जाएगी। 602 जिलों और 12 केंद्रीय संस्थानों में क्रिटिकल केयर अस्पतालों को खोला जाएगा। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल को और अधिक मजबूती प्रदान की जाएगी।

इसके तहत 15 आपातकालीन ऑपरेशन सेंटर, दो मोबाइल हॉस्पिटल के अलावा 10 लक्षित राज्यों के सभी जिलों में पब्लिक हेल्थ लैब खोली जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की 5 रीजनल ब्रांच और 20 महानगरीय ब्रांच को और अधिक मजबूत किया जाएगा। सभी सरकारी रिसर्च लैबों को आपस में जोड़ने के लिए सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों में एक इंटीग्रेटेड इन्फॉर्मेशन पोर्टल भी बनाया जाएगा।

आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के अंतर्गत सरकार वर्ष 2026 तक में 17 नई सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों का संचालन और वर्तमान की 33 सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। ये सभी 32 हवाई अड्डों, 11 बंदरगाहों औऱ 7 लैंड क्रासिंग पर स्थित हैं।

मोबाइल सिम के लिए डिजिटल केवाईसी

केंद्रीय कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले के तहत अब डिजिटल तकनीक से सिम खरीदने पर ग्राहक का वेरीफिकेशन होगा। इसके अलावा केवाईसी भी डिजिटल तरीके से हो। प्रीपेड से पोस्टपेड में सिम बदलने पर दोबारा से केवाईसी नहीं करवानी पड़ेगी। 1953 के नोटिफिकेशन के तहत सरकार ने लाइसेंस राज को खत्म कर दिया है। इसके अलावा सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को चार साल तक कर्ज चुकाने में भी छूट दे दी गई है। हालाँकि, 4 साल के बाद इस मोरेटोरियम को वापस भी करना होगा। इसके अलावा इसमें 100 फीसदी एफडीआई को भी मंजूरी दे दी गई है।

ऑटो इंडस्ट्री को दी बड़ी राहत

केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को ऑटो इंडस्ट्री के लिए पीएलआई स्कीम को मंजूरी दे दी। इसके तहत इस सेक्टर को 26,058 करोड़ रुपए का राहत पैकेज दिया गया है। इससे 7.60 लाख नई नौकरियाँ पैदा होंगी। सरकार के इस फैसले से ऑटो सेक्टर में विदेशी निवेश भी बढ़ने का आशा है। ड्रोन के लिए 5000 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।

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