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‘अग्निवीरों’ का चार साल बाद क्या होगा, सेना की परंपरा से खिलवाड़ कर रही मोदी सरकार? Agneepath Scheme पर उठ रहे ये सवाल

नई दिल्ली। भारतीय सेना की तीनों शाखाओं में सैनिकों की भर्ती के लिए नई स्कीम लॉन्च की गई है. इस स्कीम का नाम अग्निपथ है, जिसके तहत सैनिकों की भर्ती 4 साल के लिए होगी और उन्हें अग्निवीर कहा जाएगा.

क्या है अग्निपथ स्कीम?

भारतीय सेना में पहली बार ऐसी कोई स्कीम लॉन्च की गई है, जिसमें शॉर्ट टर्म के लिए सैनिकों की भर्ती की जाएगी. इस योजना के तहत हर साल करीब 40-45 हजार युवाओं को सेना में शामिल किया जाएगा. ये युवा साढ़े 17 साल से 21 साल की उम्र के बीच के होंगे.

-ये भर्तियां मेरिट और मेडिकल टेस्ट के आधार पर की जाएंगी.
-इन चार वर्षों में सैनिकों को 6 महीने की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग दी जाएगी.
-30-40 हजार मासिक वेतन के साथ अन्य लाभ भी दिए जाएंगे.
-पहले साल में 30 हजार, दूसरे साल में 33 हजार, तीसरे साल में 36500 और चौथे साल में 40 हजार मासिक वेतन दिया जाएगा.
-चार साल पूरे होने के बाद इन सभी अग्निवीरों की सेवा समाप्त हो जाएगी और फिर नई भर्तियां की जाएंगी.
-सेवा समाप्त होने वाले 25 फीसदी अग्निवीरों को स्थायी काडर में भर्ती किया जाएगा.

किन बातों का हो रहा विरोध?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस योजना को मील का पत्थर बताया है. जबकि मुख्य विपक्ष दल कांग्रेस का कहना है कि इस तरह भर्तियां होने से सेना की क्षमता और कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है.

कांग्रेस का ये भी सवाल है कि इस स्कीम के तहत भर्ती पाने वाले युवा जब चार साल की सर्विस का कॉन्ट्रैक्ट पूरा कर लेंगे तो फिर उसके बाद उनके भविष्य का क्या होगा.

अग्निपथ स्कीम पर बयान जारी करते हुए कांग्रेस के चीफ प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया कि केंद्र सरकार की इस स्कीम पर मिलिस्ट्री एक्सपर्ट से लेकर तीनों सेनाओं के टॉप अधिकारी तक सवाल उठा रहे हैं और कुछ लोग तो ये भी कह रहे हैं कि ऐसा करके मोदी सरकार भारतीय सेना की परंपरा, अस्मिता से खिलवाड़ कर रही है.

कांग्रेस के सवाल

-सेना की स्थायी भर्तियों की पूर्ति क्या चार साल की कॉन्ट्रैक्ट भर्ती से पूरी हो जाएगी? भारतीय सेना का जो इतिहास, परंपरा और अनुशासन है वो क्या इस चार साल की भर्ती से आ पाएगा.

-नौसेना और वायु सेना में स्पेशलिस्ट काडर की जरूरत होती है और इनकी ट्रेनिंग में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं और कुछ वक्त एडवांस उपकरणों को समझने में भी लग जाता है, ऐसे में नई स्कीम के तहत जो भर्तियां होंगी उनमें ट्रेनिंग कैसे हो पाएगी.

-हथियार, टैंक, आर्टिलरी, गन, मिसाइल यूनिट्स के अलावा टेक्निकल चीजों को समझने की जरूरत पड़ती है, ऐसे में तीन महीने के अंदर कैसे ये सैनिक ट्रेंड हो पाएंगे.

-केंद्र सरकार के ग्रुप-डी और क्लास-4 के कर्मचारियों की सैलरी भी 31 हजार है जबकि इन कॉन्ट्रैक्चुअल सैनिकों का वेतन 30 हजार रखा गया है. मोदी सरकार क्लास-4 के कर्मचारियों से भी कम वेतन देकर ये कैसे सैनिकों की भर्ती कर रही है.

चार साल के बाद युवाओं का क्या होगा?

चार साल बाद जब अग्निवीरों की सेवा समाप्त हो जाएगी तब उनका भविष्य क्या होगा, ये सवाल कांग्रेस ने सबसे अहम बताया. रणदीप सुरजेवाला ने पूछा कि 22 से 25 साल की उम्र में ये युवा किसी अतिरिक्त डिग्री के बिना कैसे अपना भविष्य बनाएंगे. सुरजेवाला ने कहा कि क्या ये सत्य नहीं है कि 15 साल की सेवा के बाद जब रेगुलर सैनिक भी लौटते हैं तो उनमें से ज्यादातर गार्ड या बैंक के सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी पाते हैं. ऐसे में कॉन्ट्रैक्ट पर भर्ती किए जाने वाले इन युवाओं का क्या होगा.

डिफेंस एक्सपर्ट के सवाल

रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल का कहना है कि ये स्कीम सही नहीं है. जो युवा ज्वाइन करेंगे, चार साल बाद उन्हें निराशा हाथ लग सकती है. सहगल ने कहा कि जब कोई आर्मी या दूसरी फोर्स से रिटायर होता है तो सिविल में आकर उन्हें बेहतर नौकरी नहीं मिलती है. इन अग्निवीरों को बड़ी आसानी से रेडिकलाइज किया जा सकता है और आसानी से इनको दूसरे कामों में लगाया जा सकता है.

पीके सहगल ने कहा कि 55 हजार से ज्यादा हाई स्किल्ड जवान तीनों सेनाओं से रिटायर होते हैं इसमें से रिटायरमेंट के बाद 1 या 2% लोगों को ही नौकरी मिल पाती है, ऐसे में अग्निवीरों को किस तरीके से नौकरी मिलेगी यह सरकार नहीं समझा पाई है. साथ ही पीके सहगल ने यह कहा कि एक बेहतर जवान को आर्मी में तैयार होने में 7 से 8 साल लग जाते हैं, ऐसे में जो अग्निवीर होंगे उनको सिर्फ 6 महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी तो वह कैसे बेहतर सैनिक बन पाएंगे.

सड़कों पर उतरे छात्र

इस बीच युवा भी सड़कों पर उतरने शुरू हो गए हैं. बिहार के मुजफ्फरपुर और बक्सर में युवा इस स्कीम के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं. ट्रेन रोकी गई है. युवा सवाल कर रहे हैं कि 25 फीसदी अग्निवीरों को तो कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद स्थायी काडर में शामिल कर लिया जाएगा, लेकिन बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों का चार साल बाद क्या होगा. उन्हें भत्ता तो सरकार दे देगी, लेकिन नौकरी कहां से आएगी?

क्या RSS-बीजेपी के कार्यकर्ता भर्ती किए जाएंगे?

इन तमाम सवालों के अलावा कांग्रेस की तरफ से एक सवाल ये भी दागा गया कि जो युवा भर्ती किए जाएंगे, वो कौन होंगे. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूछा, जिन युवाओं को भर्ती किया जाएगा वो कौन होंगे, क्या वो आरएसएस वर्कर होगा या बीजेपी कार्यकर्ता होगा, ये भी देखने वाली बात है.

उठ रहे सवालों पर सरकार का तर्क

सरकार की तरफ से इस तरह के सवालों पर बताया गया है कि चार साल बाद जो अग्निवीर इस स्कीम से बाहर होंगे उन्हें सेवा निधि पैकेज के तहत 11 से 12 लाख रुपये एकमुश्त दिए जाएंगे. इसके अलावा सर्विस के दौरान तीनों सेनाओं के स्थायी सैनिकों की तरह अग्निवीरों को अवॉर्ड, मेडल और इंश्योरेंस कवर भी दिए जाएंगे.

इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि इस योजना में 4 साल पूरा करने वाले अग्निवीरों को CAPFs और असम राइफल्स में भर्ती में प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है. ‘अग्निपथ योजना’ से प्रशिक्षित युवा आगे भी देश की सेवा और सुरक्षा में अपना योगदान दे पाएंगे. इस निर्णय पर विस्तृत योजना बनाने का काम शुरू हो गया है.

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