अंजाम का अहसास? माल्या का बहाना- भारत की जेलें खराब

भारतीय जेलों की खस्ता हालत का हवाला दे विजय माल्या ने ब्रिटिश कोर्ट से कहा- मत करें मेरा प्रत्यर्पण

मुंबई। लगता है भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को इस बात का अहसास हो रहा है कि उनके भारत प्रत्यर्पण से संबंधित चल रहे मुकदमें में फैसला उनके खिलाफ आएगा और उन्हें भारत वापस आना होगा। शायद यही वजह है कि गुरुवार को हुई मामले की ताजा सुनवाई को दौरान माल्या के वकील ने ब्रिटिश कोर्ट में भारतीय जेलों की बुरी स्थिति की बात कही। लंदन के वेस्टमिंस्टर कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान माल्या के पक्षकार ने कहा कि प्रत्यर्पण को चुनौती देने के लिहाज से भारत में जेलों की बुरी हालत भी एक महत्वपूर्ण बिंदु है।

इधर, भारत सरकार को भी लग रहा है कि माल्या जेलों की अच्छी स्थिति नहीं होने का मुद्दा आगे भी जोर-शोर से उठा सकते हैं। ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव राजीव महर्षि ने 23 जून को महाराष्ट्र के मुख्य सचिव सुमित म्युलिक को पत्र लिखकर राज्य में जेलों की स्थिति को लेकर कुछ पूछताछ की। दरअसल, संभावना यह है कि भारत वापसी पर माल्या को मुंबई के ऑर्थर रोड जेल में रखा जाएगा।

इधर, केंद्रीय गृह सचिव का पत्र मिलते ही म्युलिक ने इसे अतिरिक्त मुख्य सचिव एस. के. श्रीवास्तव के पास भेज दिया। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, श्रीवास्तव ने कहा है कि पत्र में उठाए गए सवालों के जवाब जल्द-से-जल्द दिए जाएं। पत्र फिलहाल प्रमुख सचिव श्री कांत सिंह और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बी के उपाध्याय के पास पहुंच चुका है।

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘माल्या इंग्लैंड से भारत अपना प्रत्यर्पण रुकवाने के लिए कई तर्कों का सहारा ले रहे हैं। मुंबई का प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कई घोटालों के सिलसिले में उनका बेसब्री से इंतजार कर रहा है। अगर केंद्र सरकार उसे मुंबई लाती है तो उनका पीछा कर रही एजेंसिया उन्हें अपनी हिरासत में लेगी और उन्हें आर्थर रोड जेल में रखा जाएगा क्योंकि उन्हें उच्च कोटि की सुरक्षा की जरूरत होगी। हम नहीं चाहते कि जेलों की स्थिति की वजह से उनका प्रत्यर्पण टल जाए। इसलिए, हमने केंद्र सरकार को तुरंत जवाब दे दिया।’

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अधिकारी ने बताया कि मुंबई में जेलों की हालत बिल्कुल अच्छी है और बुनियादी मानवाधिकार का उल्लंघन कभी नहीं होता। हाल ही में वरिष्ठ जेल अधीक्षक (सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ जेल) के पद से रिटायर हुए विजय बेंद्रे ने कहा, ‘मुंबई में हमारे पास पीटर मुखर्जी और छगन भुजबल जैसे बेहद हाई प्रोफाइल विचाराधीन कैदी हैं। एक और बड़े बिल्डर को भी यहीं रखा गया है।’ उन्होंने कहा, ‘2009-2010 तक महाराष्ट्र में सर्वोत्तम व्यवस्था वाले जेल थे। अब भी हमारे जेल ऐसे बड़े रुतबे वाले कैदियों को रखने के लिहाज से बिल्कुल अच्छे हैं।’

माल्या के भारत प्रत्यर्पण को लेकर दो हफ्तों की सुनवाई की तारीख तय हो चुकी है। लंदन के वेंस्टमिंस्टर मैजिस्ट्रेट्स कोर्ट को बताया जा चुका है कि भारत सरकार ने इससे जुड़े सारे साक्ष्य उपलब्ध करवा दिए हैं। इसी बिना पर कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई की तारीख 4 दिसंबर तय कर दी। तब तक माल्या को सशर्त जमानत मिली हुई है। उनकी अगली केस मैनेजमेंट हियरिंग 14 सितंबर को होगी। बचाव पक्ष को 17 नवंबर तक केस से जुड़ा 30 पन्नों का अपना पक्ष रखना होगा और भारत सरकार को 27 नवंबर तक इसका जवाब दाखिल करना होगा।

गौरतलब है कि माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस को लोने देनेवाले देश के 17 बैंकों ने जब उन्हें देश से बाहर जाने से रोकने की अपील के साथ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया तो माल्या मार्च 2016 में इंग्लैंड भाग गए। इन बैंकों का माल्या पर 9,000 करोड़ रुपये बकाया है। उन्हें प्रत्यर्पण केस में 18 अप्रैल 2017 को लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया।

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