नोबेल पुरस्कार विजेता लू श्याबाओ का निधन, नाजियों की कतार में पहुंचा चीन

बीजिंग। चीन की हिरासत में बंद नोबेल शांति पुरस्कार विजेता लू श्याबाओ का गुरुवार को निधन हो गया. पिछले लंबे वक्त से लिवर कैंसर से जूझ रहे 61 साल के श्याबाओ पिछले 11 साल से चीन की जेल में बंद थे.

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने चीन से श्याबाओ का विदेश में इलाज कराने की अनुमति मांगी थी. हालांकि चीन ने इन तमाम अंतरराष्ट्रीय दबावों को दरकिनार इन आग्रहों को यह कहते हुए ठुकरा दिया था उन्हें घरेलू डॉक्टरों से बेहतरीन उपचार मिल रहा है.

श्याबाओ चीन में लोकतंत्र के समर्थन में आवाज उठाते रहे थे और इस वजह से उन्हें जेल में डाल दिया गया था. जेल में कैंसर पीड़ित श्याबाओं की सेहत बिगड़ने की वजह से उन्हें पिछले ही महीने वहां से अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

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वहीं श्याबाओ का इलाज कर रहे अस्पताल ने बुधवार को बताया था कि उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया है और उन्हें सांस लेने में दिक्कत आ रही है. डॉक्टरों ने बताया था कि श्याबाओ को जीवित रखने के लिए कृत्रिम वेंटिलेशन पर रखना होगा, लेकिन उनके परिवार वालों ने मना कर दिया था.

जर्मन शांतिवादी कार्ल वॉन ओसीएत्जकी के बाद श्याबाओ ऐसे पहले नोबेल पुरस्कार विजेता हैं, जिनकी मौत हिरासत में हुई. जर्मन नोबेल पुरस्कार विजेता की वर्ष 1938 में नाजियों के कब्जे में रहने के दौरान अस्पताल में मौत हो गई थी.

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