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750 किलो प्याज बेचने से मिले 1064 रु किसान द्वारा पीएम को भेजे जाने सहित आज की प्रमुख सुर्खियां

नई दिल्ली। फ्रांस में तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई को लेकर लोगों का गुस्सा उग्र रूप ले चुका है. राजधानी पेरिस में लोगों ने सरकारी इमारतों और वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी की. इस खबर को आज के कई अखबारों ने तस्वीर के साथ पहले पन्ने पर जगह दी है. बताया जाता है कि सरकार के खिलाफ इन हिंसक प्रदर्शनों में 133 लोग घायल हुए हैं. वहीं, 300 से अधिक प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है. बताया जाता है कि फ्रांस में डीजल कारों में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख ईंधन है. बीते एक साल के दौरान इसकी कीमत में 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, सरकार ने डीजल पर 7.6 फीसदी हाइड्रोकार्बन टैक्स भी लगा दिया है.

महाराष्ट्र के एक किसान ने 750 किलोग्राम प्याज की बिक्री से मिले 1064 रुपये को प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में भेजा है. नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक नासिक के संजय साठे ने कहा कि प्याज की खेती पर चार महीने की कड़ी मेहनत के बाद यह हाल दुखद है. उन्होंने आगे कहा, ‘मैं किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं हूं लेकिन, मैं अपनी दिक्कतों को लेकर सरकार की उदासीनता से नाराज हूं.’ संजय साठे देश के उन प्रगतिशील किसानों में शामिल हैं, जिन्हें साल 2010 में केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा से संवाद के लिए चुना था.

शीतकालीन सत्र से पहले विपक्षी एकजुटता की कोशिश

इस साल 11 दिसंबर को शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार को घेरने के लिए विपक्ष सर्वसम्मति से एजेंडा तैयार करेगा. इसके लिए 10 दिसंबर को बैठक बुलाई गई है. अमर उजाला की खबर के मुताबिक इसमें किसान, सीबीआई में खींचतान और नोटबंदी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की जाएगी. वहीं, विपक्षी दलों की इस बैठक में बसपा शामिल होगी या नहीं, यह तय नहीं हुआ है. दूसरी ओर, भाजपा भी राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर विपक्ष को घेरने की तैयारी में है. इसके लिए पार्टी सांसदों द्वारा निजी विधेयक लाने की भी बात कही गई है.

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साल 2017-18 में 70 लाख रोजगार पैदा हुए : उपाध्यक्ष, नीति आयोग

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बिना रोजगार के विकास के आरोप पर मोदी सरकार का बचाव किया है. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा है कि साल 2017-18 में 70 लाख रोजगार के मौके पैदा हुए. उनके मुताबिक बड़ी संख्या में लोगों ने स्वरोजगार भी शुरू किया है जिसकी पुष्टि वाहनों की बिक्री, मुद्रा लोन का आवंटन और ईपीएफओ के आंकड़े भी करते हैं. राजीव कुमार का कहना था, ‘यदि देश में बेरोजगारी बढ़ रही है तो ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में वास्तविक मजदूरी में कमी होनी चाहिए. लेकिन, ऐसा नहीं हो रहा है. इस लिहाज से रोजगारविहीन विकास जैसी आलोचना के क्या मायने हैं?’ उन्होंने आरोप लगाया इस तरह की नकारात्मक बहस के पीछे राजनीतिक मंशा है, आर्थिक वास्तविकता नहीं.

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