Wednesday , December 12 2018

जिओ भाई सर्वेश तिवारी ‘श्रीमुख’

“कोहबर की शर्त”

सर्वेश तिवारी श्रीमुख पता नहीं क्या आयु थी जब प्रथम बार “नदिया के पार” देखी थी। तब से न जाने कितनी बार देखी, कुछ स्मरण नहीं। हृदय में गूंजा और चंदन कुछ ऐसे बसे हैं जैसे प्रेम करने का अर्थ ही “गुंजा हो जाना” है। परदे पर जब-जब गुंजा ने ...

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“मी टू” आंदोलन ने एक बड़ा ही स्पष्ट संकेत दिया है…

सर्वेश तिवारी श्रीमुख स्त्रियों के विरुद्ध ऐसे अपराध होते रहे हैं, इसे नकारा नहीं जा सकता। कोई स्त्री यदि ऐसे अपराधों के विरुद्ध मुखर होती है, तो उसका समर्थन ही धर्म है, इसमें भी दो मत नहीं होने चाहिए। व्यक्तिगत रूप से मैं उन समस्त स्त्रियों के साथ खड़ा हूँ ...

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खण्डित विग्रह..१ “विजया मन्दिर”

सर्वेश तिवारी श्रीमुख आधुनिक मध्यप्रदेश का जिला विदिशा, किसी युग में यहाँ महान परमार शासकों की कीर्ति का ध्वज लहराता था। वे हीं परमार, जिनका सम्बन्ध ईसा पूर्व प्रथम शताब्दी के उस महान शासक विक्रमादित्य से जुड़ता है जिनके नाम से विक्रम संवत चलता है, और जिन्होंने अयोध्या में जन्मभूमि ...

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फिर एक कहानी और श्रीमुख

“अधूरा वादा” सर्वेश तिवारी श्रीमुख खेत में दस मिनट की देरी से पहुँचे टिकाधर काका को देख कर मनोजवा बो ने टिभोली मारा- कहाँ थे काका? बिरधा पिनसिम के पइसा से ताड़ी पीने नही नु गए थे? काका ने छूटते ही जवाब दिया- गए थे तोरा माई से बियाह करने! ...

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जगत के सबसे सशक्त बन्दीगृह, घेरे के अंदर भयानक गन्दगी, चारों ओर जंगल की तरह पसरा खर-पतवार… यह भगवान राम की जन्मभूमि है

सर्वेश तिवारी श्रीमुख दो फिट चौड़े और सात फुट ऊँचे लोहे के पिंजड़े में डेढ़ किलोमीटर चलने के बाद बीस फिट गुणे तीस फिट के तिरपाल में दिखे रामलला। लगभग पाँच सौ एसएलआर राइफल वाले सुरक्षाकर्मियों से घिरे…. लगभग सौ बीघे जमीन को लोहे के मोटे-मोटे खम्भों से इस तरह ...

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देश के युवक यदि ठीक से पीटना भी नहीं जानते तो यह राष्ट्र के लिए लज्जा की बात है……………..(हास्य है, अन्यथा न लें)

सर्वेश तिवारी श्रीमुख Loading... मन व्यथित है। आजकल देख रहा हूँ कि कुछ भाजपाई अभद्र लोगों को पीट रहे हैं। मेरी पीड़ा उनके पीटने के कारण नहीं, पीटने की शैली के कारण है। मैंने देखा कि दस दस लोग मिल कर पीट रहे हैं फिर भी पीड़ित स्वयं चल कर ...

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राजमाता की राखी का झूठ… 

सर्वेश तिवारी श्रीमुख सन 1535 दिल्ली का शासक है हुमायूँ, बाबर का बेटा। उसके सामने देश में दो सबसे बड़ी चुनौतियां हैं, पहला अफगान शेर खाँ, और दूसरा गुजरात का शासक बहादुरशाह। पर तीन वर्ष पूर्व सन 1532 में चुनार दुर्ग पर घेरा डालने के समय शेर खाँ ने हुमायूँ ...

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जय नोटा जय जलोटा….

सर्वेश तिवारी श्रीमुख प्राचीन काल में भारत एक धर्मप्रधान देश था, अब एक तुक प्रधान देश है। यहाँ विमर्श भी तुक मिला कर होते हैं। आपने देखा, लोटा से प्रारम्भ हुई यात्रा नोटा होते हुए जलोटा तक पहुँच चुकी है। वस्तुतः नोटा का जलोटा से बड़ा ही प्रगाढ़ सम्बन्ध है। ...

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किसी ने कहा- लोकतंत्र की हत्या हो गयी!

सर्वेश तिवारी श्रीमुख हम चिहुँक गए- फिर हो गयी? अभी कुछ ही दिन पहले तो हुई थी।मुझे समझ में नहीं आता कि किसी एक ही व्यक्ति की बार बार हत्या कैसे हो सकती है? और अगर सच में हो रही है, फिर तो यह लोकतंत्र गजब का निर्लज्ज आदमी है ...

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