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अब राँची की मस्जिद में छिपे मिले 11 विदेशी मौलवी, 3 चीनी: क्वारेंटाइन में भेजे गए

राँची। झारखंड की राजधानी राँची के एक जिले में स्थित मस्जिद से 11 विदेशी मौलवियों को पुलिस प्रशासन ने हिरासत में लिया है। इससे पहले बिहार के पटना में 12 विदेशियों को एक मस्जिद से हिरासत में लिया गया था। राँची में तमाड़ जिले स्थित राड़गाँव मस्जिद में छिपे मौलवियों में से 3 मौलवी चीन से हैं, जबकि 4-4 किर्गिस्तान और कजाकिस्तान से हैं।

पड़ताल के दौरान प्राप्त पहचान पत्रों से इनकी शिनाख्त चीन के मा मेंनाई, ये देहाइ, मा मेरली, किर्गिस्तान के नूर करीम, नारलीन, नूरगाजिन, अब्दुल्ला और कजाकिस्तान के मिस्नलो, साकिर, इलियास आदि के रूप में हुई है। पटना मामले की तरह इन मौलवियों ने भी खुद को अब तक पूछताछ में मजहब प्रचारक बताया है। इनका कहना है कि इन्होंने 1 महीने से भारत के विभिन्न मस्जिदों में पनाह ली और 19 मार्च को राँची से बस द्वारा जमशेदपुर जाने के दौरान तमाड़ में रड़गाँव के पास स्थित एक मस्जिद में रुके। यानी ये सभी राँची के इस मस्जिद में पिछले 5 दिन से थे।

हालाँकि, पहले इनके बारे में किसी को कोई खबर नहीं थी। लेकिन कोरोना वायरस के कारण फैलती अफवाहों के बीच इनके मस्जिद में छिपे होने की खबर मालूम पड़ी। जानकारी पाते ही ग्रामीणों में कानाफूसी शुरू हुई। लोग एक-दूसरे से इनके बारे में बात करने लगे। आखिर में इनकी सूचना प्रशासन को मिली।

दैनिक जागरण के रॉंची संस्करण में 25 मार्च 2020 को प्रकाशित खबर

मामले की जानकारी पाते ही प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी मस्जिद पहुँचे। जहाँ उन्हें ये 11 विदेशी मौलवी छिपे मिले। पुलिस ने इन्हें हिरासत में लेकर अपनी जाँच पड़ताल की। फिर इन सभी को सुरक्षा लिहाज से क्वारेंटाइन के लिए मुसाबनी स्थिति कांस्टेबल ट्रेनिंग स्कूल भेज दिया गया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, डीएसपी अजय कुमार ने बताया, “कोरोनावायरस के प्रभाव के कारण पुलिस ने काफी सावधानी बरतते हुए सभी के कागजात की जाँच की जा रही है। सभी के वीजा-पासपोर्ट भी जब्त किए गए हैं।”

गौरतलब है कि बिहार के पटना मामले में भी पड़ताल के दौरान मालूम हुआ था कि सभी विदेशी मजहब का प्रचार करने वहाँ आए थे। लेकिन यहाँ इन्हें अपने काम (मजहब प्रचार) को करने के लिए अशोक राजपथ पर नूरी मस्जिद स्थित तबलिगी जमायत मुख्यालय जाना था। इस दौरान इन लोगों ने अपनी जाँच भी नहीं करवाई थी और स्थानीयों को संदेह होने पर इनके बारे में प्रशासन को मालूम पड़ा था।

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