Wednesday , February 28 2024

कही-अनकही सचकही

किसानों की समस्या की जड़ में कौन.. बाजार या सरकार?

डॉ राजाराम त्रिपाठी इन दिनों देश के किसान फिर आंदोलित है, दिल्ली की देहरी पर हैं। इससे पहले अभी हाल में ही देश ने एक बड़ा व्यापक किसान आंदोलन भी देखा है। लेकिन यदि गौर से देखा जाए तो आजादी के बाद से ही अलग-अलग समस्याओं को लेकर स्थानीय स्तर ...

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राजा भैया की शरण में जाकर अपनी नीयत में लगा दाग उजागर कर बैठे अखिलेश!

के पी सिंह अखिलेश यादव राज्यसभा चुनाव में अपनी पार्टी की फजीहत बचाने के लिए राजा भैया की शरण में जाने को मजबूर हो गये हैं। उन्होंने पहले खुद राजा भैया को फोन किया और इसके बाद समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम को अपने दूत के रूप मंे ...

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अखाड़े में सियासी कुश्ती! पहलवान बनाम WFI या कांग्रेस-बीजेपी की है ये लड़ाई?

शंभूनाथ शुक्ल एक बार राजकुमारी डायना ने अपने पति प्रिन्स चार्ल्स से कहा कि वे किसी सूमो पहलवान से मिलना चाहती हैं. यह बात जब जापान को पता चली तो वहां की सरकार ने इस शाही मेहमान को आमंत्रित किया और देश के टॉप सूमो पहलवान से उनकी मुलाक़ात कराई. ...

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सोनिया, पटेल, पाटिल और नरसिम्हा राव… एम्स के वो 4 घंटे और अधजले शव का सच

राज खन्ना वे गंभीर रूप से बीमार थे. उसके बाद तेरह दिन और जिए. लेकिन 10 दिसंबर 2004 को ही सोनिया के एक सहायक परिवार से यह पूछने एम्स पहुंच गए कि उनका दाह संस्कार कहां किया जाना चाहिए? उससे दो हफ्ते पहले अपनी बीमारियों से अजिज नरसिम्हा राव ने ...

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बढ़ रहा प्रधानमंत्री के चेहरे पर विश्वास, बूथ अध्यक्ष तक पकड़ बनाते अमित शाह

अमित शाह की रणनीति और प्रधानमंत्री के चेहरा, पचास प्रतिशत आबादी पर भाजपा का राज विश्व के सबसे श्रेष्ठ रणनीतिकार हैं अमित शाह विश्व स्तरीय नेताओं में सबसे श्रेष्ठ हैं नरेंद्र मोदी, जनता आंख मूंदकर करती है विश्वास प्रधानमंत्री की गारंटी और चाणक्य की भूमिका में अमित, 2024 में भी ...

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अमर-आजम को पार्टी से बाहर किया, यूपीए को संकट से उबारा…मुलायम सिंह के चौंकाने वाले 5 फैसले

दिनेश पाठक नाम मुलायम था लेकिन कड़े फैसले लेने से चूकते नहीं थे. वे आम जनता की नब्ज को पकड़ना जानते थे. उनके फैसले लोगों को चौंकाते भी थे. कई फैसलों पर अपनों ने भी सवाल उठाए लेकिन वे हर फैसला सोच-समझ कर ही लेते थे. वे किसान, जवान, मुसलमान ...

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गोली लगते ही ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष कर गिर जाते थे कारसेवक, ईश्वर की सेवा में न्यौछावर होने के लिए शरीर पर लिखवा लिया था नाम-पता

सुधीर गहलोत साल 1990 का दशक हर मायने में भारतीय जनमानस में बदलाव का दशक था। एक तरफ मंडल कमीशन को लागू किया गया था तो दूसरी तरफ राम जन्मभूमि अयोध्या पहुँचे कारसेवकों का नरसंहार किया गया था। मंडल कमीशन लागू करके देश की एक बड़ी आबादी को आरक्षण का ...

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राजा भैया की हेकड़ी-दबंगई और परिवार सब दांव पर

अजय कुमार लखनऊ। हर ‘दल’ अजीज रहे उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की कुण्डा विधान सभा क्षेत्र के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया जिनकी कभी ‘तूती’ बोला करती थी,अपनी ‘सल्तनत’ हुआ करती थी,जिसमें उनका अपना दरबार लगता था और इस दरबार में बड़ी-बड़ी हस्तियां एवं सरकारी अधिकारी ...

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कॉर्नवालिस की नीतियां चालू हैं, किसान शोषणमुक्त कब होगा ?

के. विक्रम राव Twitter ID: @Kvikramrao यूरोप और अमेरिका में अफ्रीकी अश्वेतों को गुलाम बनाने की प्रथा से भी निकृष्टतम व्यवस्था रही जमींदारी। आजादी के तुरंत बाद राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अधिनियम पर हस्ताक्षर (24 जनवरी 1951) कर इस दो सौ साल पुरानी शोषक कानून खत्म तो कर दिया। ...

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भारत को इस्लामी देशों के समूह में शामिल करने के लिए बेचैन थीं इंदिरा गाँधी: सिख राजदूत को हटा कर मुस्लिम तक को भेजा, लेकिन OIC ने पाकिस्तान को चुना

G20 शिखर सम्मेलन की सफल अध्यक्षता के बाद वैश्विक स्तर पर पर भारत की एक अलग ही छवि बनकर सामने आई है। दुनियाभर के दिग्गज नेता भारत और पीएम मोदी की तारीफ कर चुके हैं। यही नहीं, भारत को G7 में शामिल करने की चर्चा हो रही है। लेकिन, एक ...

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गठबंधन की गाँठे ढीली रहीं तो ? दिल्ली का सिंहासन दूर रहेगा

के. विक्रम राव नए बने गठबंधन की कर्णधार बनी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी अभी-अभी मुंबई, बेंगलुरु और पटना से सत्ता का सपना देखकर निकली थी। केरल और पश्चिम बंगाल के कल के उपचुनाव में उसके प्रत्याशी बेचारे हो गए। बुरी तरह हार गए। उन्हें शिकस्त देने वाले रहे सोनिया-कांग्रेस और ममता-कांग्रेस ...

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सामाजिक न्याय वाली फिल्मों के हीरो धार्मिक वैमनस्य पर क्यों उतर आए?

हिंदी बेल्ट में साउथ के सिनेमा के बाद सियासत की वजह से सनसनी मची हुई है. तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने सनातन धर्म को खत्म करने का बयान देकर बवाल मचा दिया है. उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से ...

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सम्भवामि युगे युगे…

सर्वेश तिवारी श्रीमुख अधर्म जैसे अपने चरम पर पहुँच चुका था। मथुरा में बैठा कंस स्वयं को ईश्वर बताता था, तो उधर मगध नरेश जरासंध भी ईश्वरत्व का दर्प लिए जी रहा था। कहीं नरकासुर स्वयं को ईश्वर बता कर मानव जाति की प्रतिष्ठा को अपने पैरों तले रौंद रहा ...

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भारत, भारतवर्ष, भारतभूमि… संविधान सभा में आए कई नाम, अंत में ‘India, that is Bharat’ पर लगी मुहर: नजीरुद्दीन अहमद चाहते थे ‘यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ इंडिया’

देश में India और भारत को लेकर बहस जारी है। देश जब आजाद हुआ तब हुआ, तब इसके नाम को लेकर उस समय के तमाम नेताओं ने चर्चा की थी। उस समय सबने अपनी-अपनी राय रखी थी। हालाँकि, इसे INDIA और भारत, दोनों नाम दिया गया। संविधान का अनुच्छेद 1 ...

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क्या सचमुच विज्ञान धर्म का विरोधी है?

सर्वेश तिवारी श्रीमुख यदि आप भारत के सम्बंध में यह बात कहते हैं तो यकीन मानिये, आपने धर्म का ‘ध’ भी नहीं जाना। सनातन धर्म विज्ञान का विरोध नहीं करता, कभी नहीं करता। विज्ञान धर्म का विरोधी नहीं, बल्कि धर्म का हिस्सा है। आज से लगभग दो हजार वर्ष पूर्व ...

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