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लाउडस्पीकर से अजान नहीं, दूसरों को सुनने के लिए मजबूर करने का अधिकार किसी को नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

प्रयागराज। लाउडस्पीकर से अजान और गाजीपुर जिले में डीएम द्वारा लॉकडाउन के दौरान अजान पर लगाई गई पाबंदी को लेकर इलाहबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने माना है कि लाउडस्पीकर से अजान पर प्रतिबंध वैध है, क्योंकि यह इस्लाम का हिस्सा नहीं है।

अदालत ने कहा है कि किसी भी मस्जिद से लाउडस्पीकर से अजान करना दूसरे लोगों के अधिकारों में दखल देना है। दूसरों को सुनने के लिए मजबूर करने का अधिकार किसी को नहीं है।

Awadhesh Kumar@Awadheshkum

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि अजान इस्लाम का जरूरी हिस्सा हो सकता है लेकिन लाउडस्पीकर से अजान इस्लाम का हिस्सा नहीं। गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी ने याचिका डाली थी। कोर्ट ने जिला प्रशासन से रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देने को कहा है ।

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शुक्रवार (15 मई, 2020) को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद से अजान पर बड़ा फैसला देते हुए कहा कि अजान इस्लाम का हिस्सा है, लेकिन लाउडस्पीकर से अजान देना इस्लाम का हिस्सा नहीं हो सकता। इसके लिए कोर्ट ने तर्क दिया कि लाउडस्पीकर के आने से पहले मस्जिदों से मानव आवाज में अजान दी जाती थी। मानव आवाज में मस्जिदों से अजान दी जा सकती है।

वहीं बसपा सांसद अफजाल अंसारी की याचिका पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने गाजीपुर के डीएम के आदेश को रद्द कर दिया और मस्जिदों से लाउडस्पीकर के बिना अजान को मँजूरी दे दी। अदालत ने कहा कि मस्जिदों में अजान कोरोना की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है।

हालाँकि कोर्ट ने कहा कि अजान के समय लाउडस्पीकर के प्रयोग से वह सहमत नहीं है। इसके लिए कोर्ट ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर से अजान पर रोक को भी वैध माना है। साथ ही कोर्ट ने जिला प्रशासन से रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देने को कहा है।

न्यायमूर्ति शशिकान्त गुप्ता तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने अफजाल अंसारी व फर्रूखाबाद के सैयद मोहम्मद फैजल की याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाते हुए मुख्य सचिव को आदेश का सभी जिलाधिकारियों से अनुपालन कराने का निर्देश दिया है।

दरअसल याचिकाकर्ता ने लाउडस्पीकर से मस्जिद से रमजान माह में अजान की अनुमति न देने को धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकारों का उल्लंघन करने को लेकर मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख इस मामले में दखल देने माँग की थी। इस याचिका को मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर ने स्वीकार कर लिया था साथ ही सरकार से इस पर पक्ष रखने को कहा था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया।

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