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यूपी में अनामिका शुक्लाओं की बाढ़, एक-एक जिले में दर्जनों फर्जी शिक्षक

लखनऊ। अनामिका शुक्ला के फर्जी नाम से करोड़ों डकारे जाने के मामले के खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश के अलग अलग जिलों में फर्जी शिक्षकों की बाढ़ सी आ गई है। दूसरों के नाम और कागजातों पर सरकारी नौकरी पाने वालों ने सरकार को जमकर चूना लगाया है। ताजा मामला पूर्वी उत्तर प्रदेश के मऊ से सामने आया है। यहां 64 शिक्षक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करते आ रहे थे। पकड़ में आने के बाद इन सभी को बर्खास्त कर दिया गया है।
मऊ जिले में 64 फर्जी शिक्षकों ने वेतन के तौर पर सरकार को 6 करोड़ रुपए का चुना लगाया है। अब इन्हें बर्खास्त करने के बाद इस धनराशि की रिकवरी के आदेश दिये गए हैं। 6 करोड़ रुपए की वसूली के लिए अब कुर्की की जाएगी। जिलाधिकारी ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि इन फर्जी शिक्षकों पर गैंगस्टर के तहत कार्रवाई की जा रही है। साथ ही 6 करोड़ रुपए की रिकवरी के लिए भी नोटिस जारी किये गए हैं। नोटिसों का अभी तक जवाब नहीं मिला है। लिहाजा अब कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।
जांच के दायरे में 70 से ज्यादा क्लर्क
जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि सरकारी अभिलेखों के गायब होने के मामले की जांच के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। 70 से ज्यादा क्लर्क जांच के दायरे में हैं। अगर दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। डीएम के मुताबिक जिले में लंबे समय से कुछ शिक्षक फर्जी तरीके से नौकरी कर रहे थे। सरकारी धन का बखूबी उपयोग कर रहे थे। इतना ही नहीं, इनके दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा रहा। कई लिपिक भी इसमें शामिल रहे हैं, इसकी जांच की जा रही है।
अनामिका शुक्ला मामले के बाद हो रही जांच
बता दें कि अनामिका शुक्ला के नाम पर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में काम कर रही फर्जी शिक्षिकाओं के पकड़े जाने के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सभी शिक्षकों की जांच के आदेश दिए थे। इसी क्रम में बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के साढ़े छह लाख शिक्षकों की जांच की जा रही है। जांच में यूपी के कई जिलों से शिक्षा विभाग में फर्जी अभिलेखों के माध्यम से नौकरी कर रहे शिक्षकों का खुलासा लगातार हो रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले इन शिक्षकों से वसूली कैसे की जाएगी?
ममता राय के नाम पर रंभा पांडेय कर रही थी नौकरी
मऊ में एक और अनामिका शुक्ला सामने आई है। यहां ममता राय के नाम पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच के दौरान पता चला है कि बलिया की रहने वाली ममता राय के दस्तावेज पर बलिया की ही रहने वाली रंभा पांडेय मऊ में वर्ष 2000 से नौकरी कर रही थी। वह महाराजगंज से ट्रांसफर लेकर आई थी। मामले के खुलासे के बाद रंभा पांडेय फरार हो गई है। उसे नौकरी से बर्खास्त करके उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

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