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कानपुर बालिका गृह मामले में यूपी सरकार की बड़ी कार्रवाई, दो निलंबित

कानपुर/लखनऊ। कानपुर शेल्टर होम मामले में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने कानपुर के प्रोबेशन ऑफिसर अजीत कुमार और राजकीय बाल संरक्षण गृह की सहायक अधीक्षिका मिथिलेश पाल को निलंबित कर दिया है। दोनों अधिकारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप है।

आदेश में कहा गया है कि कानपुर के प्रोबेशन ऑफिसर अजीत कुमार ने कोविड-19 जैसी संक्रामक बीमारी की रोकथाम के संबंध में शासन स्तर से दिए गए दायित्वों का निर्वहन नहीं किया। साथ ही साथ अजीत कुमार ने सोशल मीडिया पर बाल संरक्षण गृह की लड़कियों के बारे फैलाए जा रहे भ्रामक एवं तथ्यहीन बातों का खंडन नहीं किया। विभाग की छवि धूमिल करने के आरोपों के संबंध में कुमार को प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

इसके अलावा यूपी सरकार ने राजकीय बाल संरक्षण गृह कानपुर की सहायक अधीक्षिका मिथिलेश पाल को भी निलंबित कर दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि कोविड-19 के संबंध में जारी नियमों का इन्होंने पालन नहीं कराया। गर्भवती लड़कियां जब अस्पताल में भर्ती थीं तब चुतर्थ श्रेणी के कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई थी। अस्पताल से आने के बाद भी क्वारंटाइन के नियमों की अनदेखी की गई और इन कर्मचारियों से काम कराना जारी रखा गया।

सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि बाल संरक्षण गृह की लड़कियों के बारे में सोशल मीडिया में कहा गया कि वे एचआईवी से संक्रमित हैं। हालांकि आपने (मिथिलेश पाल) उच्चाअधिकारियों को इस बारे में सही जानकारी नहीं दी और न ही इस दुष्प्रचार का खंडन करने का प्रयास किया। इन तमाम आरोपों को देखते हुए सरकार ने सहायक अधीक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

बता दें कि राजकीय बालिका गृह में रह रहीं लड़कियों में 57 कोरोना संक्रमित पाई गईं थीं। सात गर्भवती भी मिली थीं। हालांकि सभी यहां आने से पहले से गर्भवती हैं।

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