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ताहिर हुसैन ने कहा: 8 जनवरी को ही खालिद सैफी, उमर खालिद से मिल कर दंगे की योजना बना ली थी

नई दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों से संबंधित चार्जशीट में आम आदमी पार्टी (AAP) के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को मुख्य आरोपित बनाया गया है। चार्जशीट में 24 और 25 फरवरी को चाँदबाग के एक पार्किंग लॉट में आगजनी और करावल नगर इलाके में एक गोदाम में लूटपाट और आगजनी से संबंधित है। दोनों ही घटनाओं में ताहिर हुसैन को मास्टरमाइंड बताया गया है। पार्किंग लॉट में आगजनी के दौरान कम से कम सौ वाहनों को आग लगा दी गई थी।

चार्जशीट में बताया गया है कि 24 फरवरी को दोपहर 2:15 बजे ताहिर और अन्य आरोपित लियाकत अली, मोहम्मद आबिद, मोहम्मद शादाब, इरशाद, मोहम्मद रेहान, अरशद प्रधान आदि ने ताहिर के छत पर से प्रदीप पार्किंग लॉट के ऊपर पत्थरबाजी की, पेट्रोल बम फेंके।

चार्जशीट के अंश

इतना ही नहीं, इसके बाद इसके बाद कुछ और आरोपित शाह आलम, गुलफाम रियासत अली, अरशद कैय्यम, राशिद सैफी आदि पार्किंग लॉट के पास पहुँचे और उसका शटर तोड़ दिया। गाड़ियों में आग लगा दी, जिसने पार्किंग में खड़े सभी वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। साथ ही आरोपितों ने वहाँ पर उपस्थित लोगों को लूट लिया।

इसके बाद वे पहली मंजिल पर पहुँच गए और वहाँ मौजूद लोगों के पैसे और कीमती सामान लूट लिए। वहाँ एक शादी समारोह के लिए भोजन की तैयारी चल रही थी। हुसैन और अन्य लोगों ने तैयार किए गए भोजन को भी बर्बाद कर दिया।

चार्जशीट के अंश

चार्जशीट में कहा गया है कि 24 और 25 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे की योजना 8 जनवरी 2020 को ही तैयार कर ली गई थी। ताहिर हुसैन ने पूछताछ के दौरान खुद ये बातें कही।

ताहिर हुसैन ने बताया कि उसने 8 जनवरी को ही सीएए विरोधी प्रदर्शन स्थल शाहीनबाग में खालिद सैफी (India Against Hate Group) और उमर खालिद (JNU) के साथ मिलकर इस दंगे की योजना बना ली थी। उसने कबूला कि वो और भी कई सीएए विरोधी प्रदर्शन के आयोजकों से संपर्क में था।

ताहिर ने पूछताछ के दौरान ये भी बताया कि वो सीएए विरोधी प्रदर्शनों के लिए पैसे की भी व्यवस्था करता था और अपनी कंपनी के अकाउंट से भी उन्हें फंडिंग करता था। उसने यह भी खुलासा किया कि दिल्ली में एंटी सीएए प्रोटेस्ट की शुरुआत से ही वो लियाकत अली, इरशाद, शादाब, आबिद, मोहम्मद रेहान और अरशद प्रधान आदि के संपर्क में था।

दंगाइयों से सीधे संपर्क में था ताहिर हुसैन

इसके अलावा वो एंटी सीएए प्रोटेस्ट आयोजित करने वाले आयोजकों और कुछ वकीलों के भी संपर्क में था। ताहिर जिन एंटी सीएए आयोजकों के संपर्क में था, उसमें से कुछ नाम इस प्रकार हैं- हाजी मंगता (चाँद बाग मजार के पास स्थित प्रोटेस्ट साइट), हाजी बल्लो (खजूरी खास स्थित श्री राम कॉलोनी प्रोटेस्ट साइट), वाजिद खान (शाहीन बाग का प्रोटेस्ट साइट), डॉक्टर एमएम अनवर (फरुकिया मस्जिद के पास बृजपुरी पुलिया प्रोटेस्ट साइट)।

चार्जशीट के मुताबिक दंगे से संबंधित मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पिंजरा तोड़ की नताशा नरवाल और देवांगना कलीता को जाफराबाद दंगा के मामले में गिरफ्तार किया गया। खालिद सैफी को जगतपुरी दंगा मामले में और मोहम्मद अनीस को राजधानी स्कूल दंगा मामले में गिरफ्तार किया गया है। इ

सके अलावा चाँद बाग दंगा मामले में ताहिर के साथ ही लियाकत अली, अरशद प्रधान, मोहम्मद इरशाद, राशिद सैफी, मोहम्मद आबिद और मोहम्मद शादाब को गिरफ्तार किया गया है। इन सबका ताहिर हुसैन से सीधा संपर्क था।

बता दें कि ताहिर हुसैन फिलहाल आईबी स्टाफ अंकित शर्मा की हत्या और दिल्ली हिंसा में संलिप्तता के चलते गिरफ्तार है। आईबी में कार्यरत अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनकी लाश को नाले में फेंक दिया गया था।

मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपित सलमान ने बताया था कि दंगाइयों ने अंकित का मजहब जानने के लिए उनके कपड़े उतारे थे। धर्म पुख्ता कर उन्हें चाकुओं से गोद डाला। सलमान ने बताया कि उसने खुद अंकित पर 14 बार चाकू से वार किए। अंकित के चेहरे पर काला कपड़ा डाल उन्हें आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के घर में ले जाया गया था। अंकित का शव 26 फरवरी को चॉंदबाग के नाले से मिला था।

दंगों को भड़काने में 1.3 करोड़ रुपए से भी ज्यादा फूँके गए। ताहिर हुसैन के छत से मिले सबूतों के अलावा उसके खिलाफ कई अन्य सबूतों की बात की गई है। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने भी बताया है कि वो दंगे भड़का रहा था। पुलिस को उसके पास से एक पिस्टल भी मिली थी। इसके साथ मिले कुल 200 गोलियों में से 75 बुलेट्स गायब थे।

उल्लेखनीय है कि सीएए, एनआरसी विरोध के नाम पर 23-24 फरवरी को दिल्ली में शुरू हुई हिंदू विरोधी हिंसा में 53 लोगों ने अपनी जान गँवा दी थी। 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस दौरान दंगाइयों ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में सरकारी और निजी संपत्ति को काफी नुकसान पहुँचाया था।

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