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‘₹#डी भी नहीं बिकती जितने में, उतने में रंजन गोगोई बिके’ – ‘माँ’ वाले मुनव्वर राना ने राम मंदिर पर उगला जहर

लखनऊ। हाल ही में भारत के मशहूर शायर राहत इंदौरी की मौत हो गई। उनके साथ सैकड़ों बार मंच साझा कर चुके मुनव्वर राना अक्सर अपने विवादित बोल की वजह से सुर्खियों में रहते हैं। अब उन्होंने एक बार फिर राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नवम्बर 2019 में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा, “भारत के पूर्व CJI रंजन गोगोई जितने कम दाम में बिके, उतने में हिंदुस्तान की एक ₹#डी भी नहीं बिकती है।

साथ ही उन्होंने रंगन गोगोई को राज्यसभा सदस्य बनाए जाने पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि राम मंदिर पर उनका फैसला अच्छा था या बुरा, उन्हें राज्यसभा की सदस्यता नहीं दी जानी चाहिए थी। इसके बाद उन्होंने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि राम मंदिर मामले में न्याय नहीं हुआ बल्कि धोखाधड़ी हुई। उन्होंने कहा कि वो ये सब कुछ आरोप नहीं लगा रहे हैं बल्कि फैक्ट कह रहे हैं, ये सच्चाई है।

‘न्यूज़ नेशन’ से बातचीत करते हुए मुनव्वर राना ने इस्लाम की अच्छाइयाँ बताते हुए कहा कि अगर आप किसी मौलवी से ताबीज लिखवाते हैं तो वो रुपए नहीं लेता है, एक कप चाय तक नहीं पीता है। इसकी तुलना उन्होंने रंजन गोगोई द्वारा राज्यसभा की सदस्यता लेने से करते हुए पूछा कि इसका क्या मतलब हुआ साहब? साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले में 2 लोगों ने मिल कर फैसला कर दिया, सब गलत हुआ और सब कुछ अपनी मर्जी से कर दिया गया।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर पर ऐतिसासिक सुनवाई के लिए 5 सदस्यीय पीठ का गठन किया था, जिसने गहन सुनवाई के बाद इस पर फैसला किया। लेकिन इन सब के बावजूद मुनव्वर राना ने इसे भारत का आंतरिक मामला मानने से भी इंकार कर दिया और कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि क्या हुआ लेकिन कहने के लिए कोई भी मुल्क कह दे कि फलाँ मेरा अंदरूनी मामला है। उन्होंने कहा कि दिलों में जो नफ़रतें होती हैं, उसका क्या?

इसके बाद उन्होंने भारत के इतिहास के बारे में बोलना शुरू कर दिया और कहा कि हिंदुस्तान एक ऐसा देश हुआ है, जहाँ हर शताब्दी में कोई न कोई महात्मा पैदा हुए हैं, कोई साधु-संत या सूफी-फ़क़ीर पैदा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा की जो सीट 1 करोड़ या 50 लाख रुपए में बिकती थी, उसके लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश ने बेईमानी कर दी। साथ ही उन्होंने रंजन गोगोई की तुलना तानाशाह हिटलर और मुसोलोनी से की।

मुनव्वर राना ने इस पूरी बहस में रामायण को भी घुसाते हुए कहा कि जहाँ भगवान राम ने वचन के पालन के लिए अपनी गद्दी तक छोड़ दी थी, वहीं रंजन गोगोई ने अपने पद की भी प्रतिष्ठा नहीं रखी। मुनव्वर राना ने अपने बयानों पर माफ़ी माँगने से इंकार करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ गलत कहा ही नहीं है। उन्होंने कहा कि माफ़ी माँगने का अर्थ है कि हम भी बिक गए और थक-हार कर बैठ गए।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने मुनव्वर राना के इस बयान की निंदा करते हुए कहा कि ताउम्र ‘माँ’ के नाम पर संवेदनाओं की भरपूर कमाई खाने वाले एक शायर की खाल में छुपा रंगा सियार देखिए, एक नारी और देश की सर्वोच्च अदालत के लिए इनकी ज़ुबान देखिए, फिर ग़द्दार कहो तो कुंठित आत्माएँ तड़प उठेंगी। बता दें कि मुनव्वर राना ‘माँ’ पर अक्सर शायरी करते रहे हैं।

इससे पहले मुनव्वर राना ने माँग की थी कि अयोध्या के धन्नीपुर गाँव में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को मस्जिद के लिए जो 5 एकड़ ज़मीन मिली है, वहाँ भगवान राम के पिता राजा दशरथ के नाम पर अस्पताल बनवाया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर उक्त माँग की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार द्वारा दी गई या जबरदस्ती हासिल की गई ज़मीन पर मस्जिद नहीं बनता। साथ ही मस्जिद के लिए रायबरेली में अपनी 5 एकड़ की ज़मीन ऑफर की।

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