Saturday , September 26 2020

कांग्रेस में घमासान, राहुल खेमा नहीं संभला तो 200 नेता मुखर रूप से सामने आने को तैयार

नई दिल्ली। कांग्रेस में नेतृत्व के संकट और पार्टी के चिंताजनक हालात में बदलाव के लिए आवाज उठाने वाले 23 वरिष्ठ नेताओं का अंदरखाने समर्थन बढ़ रहा है। राहुल गांधी को नेतृत्व सौंपने की पैरोकारी कर रहा युवा ब्रिगेड अगर वरिष्ठ नेताओं पर हमला करता रहा तो देर-सबेर देशभर में पार्टी के करीब दो सौ नेता खुलकर वरिष्ठ नेताओं के पक्ष में आने को तैयार हैं। स्पष्ट है कि सुधार चाहनेवाले नेताओं की घेराबंदी की गई, तो कांग्रेस की कलह और बढ़ेगी।

बदलाव की वकालत कर रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि भाजपा एजेंट बताकर उन पर निशाना साधने की राहुल ब्रिगेड की कोशिश कारगर नहीं होगी। राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर नेताओं का बड़ा वर्ग सुधारों के सवाल को भाजपा से जोड़ने की कोशिश को बहानेबाजी और यथास्थिति बनाए रखने की जुगत मान रहा है। पार्टी के हालात पर सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले एक नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि पार्टी के एक बड़े वर्ग को अपना राजनीतिक भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। ऐसे में बदलाव के सवालों पर बहानेबाजी से बात बिगड़ेगी और कई नेता खुलकर सामने आएंगे।

इन सवालों को राहुल गांधी को अध्यक्ष बनने से रोकने या गांधी परिवार के खिलाफ विद्रोह बताने के राजीव साटव, माणिक टैगोर और केसी वेणुगोपाल सरीखे नेताओं का प्रयास जारी रहा तो स्थिति बिगड़ेगी। पत्र लिखने वाले कुछ नेता अन्य नेताओं से गुपचुप संपर्क व संवाद भी कर रहे हैं। इनका यह भी कहना है कि सवाल उठाने वाले नेताओं की लड़ाई सोनिया या राहुल के खिलाफ नहीं, बल्कि ऐसे हालात में भी दरबारी संस्कृति को मिल रहे प्रश्रय के विरुद्ध है। अध्यक्ष से लेकर पार्टी कार्यसमिति के चुनाव और संसदीय बोर्ड के गठन जैसे सवालों पर गौर करने के बजाय इन्हें सामने लाने वाले नेताओं पर किए जा रहे हमले पर एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा, वीरप्पा मोइली या शशि थरूर सरीखे नेताओं को भाजपा से जोड़ने का हथकंडा काम नहीं आने वाला।

पत्र लिखने वाले समूह में शामिल इस नेता ने कहा कि वाकई राहुल गांधी पार्टी की कमान थामना चाहते हैं, तो उन्हें परिपक्व तरीके से सीधे बात करनी होगी। कामकाज की कार्यशैली में बदलाव के साथ पार्टी में सलाह-मशविरे का एक मैकेनिज्म तत्काल बनाना होगा। देशभर में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता इस हकीकत से रूबरू हैं कि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद भी नेतृत्व की शैली और चंद नेताओं तक सीमित संगठन का स्वरूप नहीं बदला है।

ऊपर ही हो जाते हैं सब फैसले

उन्होंने कहा कि संसदीय बोर्ड नहीं होने की वजह से सारे निर्णय हाईकमान और उसके इर्द-गिर्द के नेता करते हैं। राज्यसभा या विधान परिषद के टिकट तय होते हैं तो 90 फीसद वरिष्ठ नेताओं को इसकी जानकारी तक नहीं होती है, जिससे जमीनी नेताओं और कार्यकर्ताओं की अनदेखी होती है। कांग्रेस की सियासी जमीन खिसकने की यह एक बड़ी वजह है। आलम तो यह है कि ब्लॉक का अध्यक्ष भी दिल्ली से तय होता है, जिससे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष की ताकत कमजोर हो गई है। गुलाम नबी आजाद ने इन्हीं हालातों की ओर इशारा करते हुए कहा है कि संगठन और कार्यशैली में बदलाव नहीं हुआ, तो कांग्रेस को 50 साल तक विपक्ष में बैठने के लिए तैयार रहना चाहिए।

About I watch

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कोरोना का कहर

भारत की स्थिति