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यूपी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री ने गुलाम नबी आजाद पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- पार्टी का किया सत्यानाश

लखनऊ। दिल्ली में पिछले दिनों कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में हुई गर्मागर्मी तब तो दबा दी गई, लेकिन अब उसकी चिंगारी जहां-तहां से निकलना शुरू हो गई है। पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष की मांग आदि को लेकर लिखे गए पत्र में जिन 23 वरिष्ठों के हस्ताक्षर थे, उनमें से पूर्व मंत्री जितिन प्रसाद के बाद पूर्व मंत्री गुलाम नबी आजाद भी निशाने पर हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री ने कई गंभीर आरोप लगाने के साथ यहां तक कह दिया कि जब-जब गुलाम नबी यूपी के प्रभारी बने, तब-तब पार्टी का सत्यानाश किया।

संगठन की ताकत जुटाने का इतने दिन से प्रयास कर रही कांग्रेस में फिर कलह मच गई है। कांग्रेस हाईकमान को लिखी गई चिट्टी पर हस्ताक्षर करने वाले वरिष्ठ कांग्रेसियों के खिलाफ कार्यकर्ताओं ने ही मोर्चा खोल दिया है। पिछले दिनों पूर्व मंत्री जितिन प्रसाद के खिलाफ लखीमपुर खीरी में प्रदर्शन हुआ। अब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व सांसद डॉ. निर्मल खत्री ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री व उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रभारी गुलाम नबी आजाद के खिलाफ सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणी की है।

2017 में सपा के साथ हुए गठबंधन पर डॉ. निर्मल खत्री बोले कि सभी कार्यकर्ता समझौते के खिलाफ थे। जहां तक मेरी (निर्मल खत्री) जानकारी है, राहुल गांधी भी समझौते के खिलाफ थे, लेकिन संभवत: आजाद जैसे वरिष्ठ नेता और प्रभारी की जिद के चलते वह चुप रह गए और गुलाम नबी की समझौता परस्त राजनीति की सोच के चलते ही सपा से गठबंधन हुआ और कांग्रेस का बुरा हाल हुआ।

गुलाम नबी को खत्री का संदेश

  • वर्ष 1977 में जम्मू कश्मीर में आजाद विधानसभा का पहला चुनाव लड़े उन्हें मात्र 320 वोट मिले और मैं 1977 में अयोध्या विधानसभा क्षेत्र (उत्तर प्रदेश) से पहले चुनाव में 428 वोट से हारा।
  • संगठन के चुनाव की दुहाई देने वाले आजाद एआइसीसी और पीसीसी सदस्य ऐसे लोगों को भी बना चुके हैं, जिनके बारे में यह ही नहीं पता था कि वह कांग्रेस सदस्य हैं या नहीं।
  • इंटरव्यू में आपने कहा कि मेरे काम, योगदान को आजकल के बच्चे क्या जानें। ‘बच्चे’ का तात्पर्य सब समझते हैं। वह ‘बच्चे’ आपकी असलियत जानने के बाद भी आपको सरमाथे पर बैठाए रहे।
  • आपने इंटरव्यू में यह कहा कि 23 साल से कांग्रेस कार्यसमिति का चुनाव नहीं हुआ। सवाल उठता है कि इन 23 वर्षों जब आप भी उस मनोनीत सीडब्ल्यूसी के सदस्य थे, तब यह सवाल क्यों नहीं उठाया। आपकी अंतरात्मा की आवाज इस समय ही क्यों उठी।

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