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कठिन से कठिन विषय में भी छात्र को बांधे रखना उनके बाएं हाथ का खेल था

नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की विद्वता और उनका शालीन व्यक्तित्व ही था जो छात्रों को उनसे जोड़े रखता था। उनका बच्चों, छात्रों और जिज्ञासु युवाओं के प्रति खासा झुकाव है। वो कमाल के शिक्षक थे। मानों कठिन से कठिन विषय में भी छात्र को बांधे रखना उनके बाएं हाथ का खेल था। उन्होंने साल 2015 में शिक्षक दिवस के ठीक एक दिन पहले राष्ट्रपति भवन स्थित डॉ राजेंद्र प्रसाद सर्वोदय विद्यालय कक्षा 11वीं के छात्रों को पढ़ाया था।

वो इस विद्यालय में साल 2016 में भी पढ़ाने गए थे। उन्होंने छात्रों को राजनीतिक सिद्धांतों की जानकारी दी थी। उस समय विद्यालय की प्रधानाचार्य रही ओमलता सिंह ने बताया कि विद्यालय में उस दिन त्योहार जैसा माहौल था, हर कोई यही चाहता था कि एक बार उसे उनकी कक्षा में बैठने का मौका मिल जाए। उन्होेंने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति ने उस दिन एक घंटे तक लगातार खड़े रहकर छात्रों को पढ़ाया था और राजनीति में उनके अनुभवों पर भी चर्चा की थी।

इसके साथ ही उन्होंने अपने स्कूली दिनों की यादें भी ताजा की थी। छात्रों को पढ़ाने के बाद उन्होंने शिक्षकों के साथ भी संवाद किया था। उस वक्त शिक्षकों के साथ पूर्व राष्ट्रपति के कार्यक्रम का मंच संचालन यमुना विहार निवासी शिक्षक परामर्शदाता संजय प्रकाश शर्मा ने किया था।

संजय ने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की कक्षा उन्हें हमेशा याद रहेगी क्योंकि उस दिन पूर्व राष्ट्रपति ने अपने उद्बोधन में उनकी प्रशंसा की थी जिसे वह अपनी सबसे बड़ी व्यक्तिगत पूंजी मानते हैं। वो बताते हैं कि उस दिन पूर्व राष्ट्रपति ने बिना किसी लाग लपेट या बिना किसी राजनीतिक भूमिका को ध्यान में रखते हुए बच्चों को सही मायने में राजनीतिक मूल्यों के विषय में पढ़ाया था।

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