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‘फेसबुक अविश्वसनीय फैक्ट चेकर्स के भरोसे कैसे बैठ सकता है’: रविशंकर ने जुकरबर्ग को पत्र लिखकर संस्थान के पूर्वग्रहों पर लगाई फटकार

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर कहा कि फेसबुक इंडिया के अधिकारियों द्वारा दक्षिणपंथी विचारधारा के पेजों को हटाने का प्रयास किया गया। केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस पत्र में फेसबुक इंडिया की टीम पर राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भेदभाव करने के आरोप लगाए हैं। रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि फेसबुक इंडिया में कई बड़े अधिकारी प्रधानमंत्री और कई कैबिनेट मंत्रियों के प्रति अपशब्द कहते हैं।

हाल ही में विपक्ष और लिबरल गिरोह द्वारा द्वारा फेसबुक इंडिया पर चुनावों के दौरान भाजपा के हित में काम करने का आरोप लगाए गए हैं। इससे पहले कॉन्ग्रेस ने फेसबुक सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर कार्रवाई की माँग की थी।

रविशंकर प्रसाद ने अपने पत्र में लिखा, “भारत के एमडी से लेकर उनके अन्य वरिष्ठ अधिकारी, वे सभी एक विशेष राजनीतिक मत का समर्थन करते हैं।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोगों को बाँटने और सामाजिक तनाव पैदा करने में फेसबुक इनका नवीनतम हथियार है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण सामने आए, जहाँ फेसबुक का इस्तेमाल ‘अराजक और कट्टरपंथी’ तत्वों द्वारा किया गया, लेकिन उनके खिलाफ कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने इस पत्र में लिखा है कि फेसबुक के संगठन में सत्ता संघर्ष चल रहा है।

उन्होंने इस पत्र में लिखा है, “मैं यह बताना चाहूँगा कि हाल ही में ऐसे कई उदाहरण सामने आए, जहाँ फेसबुक का उपयोग अराजक और कट्टरपंथी तत्वों द्वारा किया गया है, जिनका एकमात्र उद्देश्य सामाजिक व्यवस्था को नष्ट करना, लोगों की भर्ती करना और हिंसा के लिए उन्हें इकट्ठा करना है। हालाँकि, हमने अभी तक भी ऐसे तत्वों के खिलाफ कोई सार्थक कार्रवाई नहीं देखी है।”

“मैं यह पत्र गंभीर चिंता जाहिर करने के लिए लिख रहा हूँ, जिनमें से कुछ हमने अतीत में फेसबुक के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी उठाए हैं। मैंने अक्सर आपको और आपके वरिष्ठ प्रबंधन को ‘कनेक्टिविटी’ के फायदों के बारे में और विशेष रूप से आपके बारे में यह सुना है कि फेसबुक का मिशन लोगों को समुदायों के निर्माण और दुनिया को करीब लाने का है।”

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उन्हें सूचित किया गया है कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में, फेसबुक इंडिया प्रबंधन द्वारा एक पहल की गई थी कि पेजों को न केवल हटाया जाए बल्कि उनकी पहुँच (रीच) को भी कम किया जाए। इसके साथ ही, ऐसे पेजों को कोई सपोर्ट या अपील का अधिकार भी प्रदान नहीं किया गया, जो लोग केंद्र की विचारधारा के समर्थक हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे इस बात की भी जानकारी है कि फेसबुक प्रबंधन को लिखे दर्जनों ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला। पूर्वग्रह और निष्क्रियता के उपरोक्त मामले आपकी फेसबुक टीम में लोगों के राजनीतिक दृष्टिकोण का प्रत्यक्ष परिणाम हैं।”

केन्द्रीय मंत्री ने फेसबुक को ना सिर्फ निष्पक्ष और तटस्थ रहने के लिए कहा, बल्कि एक बड़े वर्ग के मत और विचारधारा के प्रति ऐसा करते नजर आने की भी सलाह दी है। उन्होंने लिखा है कि हर व्यक्ति की अपनी राय और विचारधारा हो सकती है लेकिन इसके कारण किसी संस्थान की पॉलिसी प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा, “यह समस्या की बात है फेसबुक के कर्मचारी वरिष्ठ पदों पर होने के बाद लगातार देश के प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों को गाली दे रहे हैं। उससे भी बड़ी समस्या की बात यह है कि एक व्यक्ति के निजी पूर्वग्रह किसी प्लेटफ़ॉर्म के ही पूर्वग्रह बन जाते हैं। और यह स्वीकार करने लायक बात नहीं है कि यही राजनीतिक पूर्वग्रह के लाखों लोगों के विचारों पर थोप दिया जाता है।” रविशंकर प्रसाद ने लिखा कि हाल ही के अनाम, स्रोत-आधारित रिपोर्टों का आधार फेसबुक के भीतर ‘वैचारिक आधिपत्य’ के लिए एक आंतरिक शक्ति संघर्ष के अलावा कुछ नहीं है।

थर्ड पार्टी फैक्ट चेकर्स पर सवाल उठाते हुए केन्द्रीय मंत्री ने फेसबुक के सीईओ को लिखा है कि एक बड़ा विषय आउटसोर्स किए गए फैक्ट चेकर्स भी हैं। उन्होंने कहा, “कोई अन्य तर्क यह नहीं बता सकता है कि कैसे एक वैकल्पिक वास्तविकता को चित्रित करने की कोशिश करने के लिए आपकी कंपनी के भीतर से ‘सेलेक्टिव लीक’ द्वारा तथ्यों को काटा जा रहा है। गॉसिप के माध्यम से भारत की राजनीतिक प्रक्रिया में यह हस्तक्षेप निंदनीय है। फेसबुक कर्मचारियों के एक समूह की यह मिलीभगत है।”

अपने पत्र में उन्होंने लिखा, “फेसबुक के साथ एक प्रमुख मुद्दा थर्ड-पार्टी फैक्ट-चेकर्स के लिए फैक्ट-चेकिंग की आउटसोर्सिंग है। फेसबुक यूजर्स को गलत सूचना से बचाने के लिए फ़ेसबुक अपनी ज़िम्मेदारी से बचने के साथ ही बाहरी फैक्ट चेकर्स पर निर्भर रहता है, जो कि पहले से ही राजनीतिक पूर्वग्रहों से ग्रसित हैं। रोजाना ही इन फैक्ट चेकर्स के फैक्ट चेक्स को लोगों द्वारा स्वयं ही फैक्ट चेक कर दिया जाता है।”

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारत में कोरोना महामारी के दौरान भी इन फैक्ट चेकर्स ने कई प्रकार के झूठ फैलाए, फेसबुक इन सब चीजों से अपनी नजर कैसे हटा सकता है? केन्द्रीय मंत्री ने कहा है कि वैचारिक विविधताओं के देश में फेसबुक को अपनी गाइडलाइन्स को बनाना चाहिए और इन मुद्दों पर अमल करना चाहिए।

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