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फारूक का चीनी परस्त दावा- ‘कश्मीरी खुद को नहीं मानते भारतीय, चाहते हैं चीन करे शासन’

जम्मू-कश्मीर। लद्दाख में भारत का चीन के साथ विवाद चल रहा है. चीन की चौतरफा निंदा हो रही है. भारत ही नहीं दुनिया के तमाम देश चीन के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं. कुल मिलाकर कहा जाए कि भारत का दुश्मन नंबर एक चीन है तो हैरानी की बात नहीं होगी. अब ऐसे में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अबदुल्ला ने भारत विरोधी और चीन के फेवर में बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि कश्मीर के लोग खुद को भारतीय नहीं मानते हैं और न ही भारतीय होना चाहते हैं, इसके बदले वे चाहते हैं कि चीन उन पर शासन करें. फारुक अबदुल्ला का इस तरह का बयान कश्मीरियों को भारत सरकार के खिलाफ भड़काने वाला और सीमा पर चल रहे चीन के साथ विवाद पर ड्रैगन का समर्थन जैसा लगता है. फारूक अबदुल्ला भले ही बता रहे हों कि कश्मीरी चीन का शासन चाहते हैं लेकिन क्या उन्हें नहीं पता है चीन में मुसलमानों की कितनी बुरी हालत है. वहां पर मुस्लिमों के खिलाफ कितने अत्याचार हो रहे हैं. इस पर भी फारूक अबदुल्ला को बोलना चाहिए था. तो आइए हम आपको बताते हैं कि फारूक ने भारत के खिलाफ और चीन की खुशामद में क्या-क्या कहा?

फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो मुझे हैरानी होगी अगर उन्हें (सरकार) वहां कोई ऐसा शख्स मिल जाता है जो खुद को भारतीय बोले. अब्दुल्ला ने आगे कहा, ‘आप जाइए और वहां किसी से भी बात कीजिए. वे खुद को भारतीय नहीं मानते हैं और न ही पाकिस्तानी. मैं यह आपको स्पष्ट कर दूं. पिछले साल 5 अगस्त को उन्होंने (मोदी सरकार ने) जो किया, वह ताबूत में आखिरी कील था.’

इंटरव्यू में अब्दुल्ला ने कहा, ‘यह वहां के लोगों का मूड है क्योंकि कश्मीरियों को सरकार पर कोई भरोसा नहीं रह गया है.’ उन्होंने कहा कि विभाजन के वक्त घाटी के लोगों का पाकिस्तान जाना आसान था लेकिन तब उन्होंने गांधी के भारत को चुना था न कि मोदी के भारत को.

नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने आगे कहा, ‘आज दूसरी तरफ से चीन आगे बढ़ रहा है. अगर आप कश्मीरियों से बात करें तो कई लोग चाहेंगे कि चीन भारत में आ जाए. जबकि उन्हें पता है कि चीन ने मुस्लिमों के साथ क्या किया है.’ अब्दुल्ला ने कहा, ‘मैं इस पर बहुत गंभीर नहीं हूं लेकिन मैं ईमानदारी से कह रहा जिसे लोग सुनना नहीं चाहते.’

केंद्र पर निशाना साधते हुए फारूक अब्दुल्ला ने दावा किया कि अगर वे घाटी में कहीं भी भारत के बारे में कुछ बोलते हैं तो उन्हें सुनने वाला कोई नहीं होता है. उन्होंने कहा, ‘वहां हर गली में एके 47 लिए हुए सुरक्षाकर्मी खड़ा है. आजादी कहां है?’

इससे पहले फारूक अब्दुल्ला ने लोकसभा में कहा था कि जम्मू-कश्मीर में शांति के लिए अनुच्छेद 370 को फिर से बहाल किया जाना चाहिए. अब्दुल्ला ने कहा था कि पिछले साल 5 अगस्त को उठाए गए कदमों के बारे में सोचने की जरूरत है. उन्होंने कहा था कि भारत चीन से बात कर रहा है तो कश्मीर को लेकर पाकिस्तान से क्यों नहीं करता.

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