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विश्वविद्यालय की 125 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण

राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने डाॅ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह पर  ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का किया अनावरण 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज यहां डाॅ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के 7वें दीक्षान्त समारोह पर विश्वविद्यालय परिसर में ‘भारत रत्न’ श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा का अनावरण और उनकी कविताओं पर आधारित चित्र वीथिका का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय की 125 करोड़ रुपये की योजनाओं का लोकार्पण किया। लोकार्पित योजनाओं में काॅलेज फाॅर डेफ, निःशक्तजन हेतु विशिष्ट स्टेडियम, कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केन्द्र, समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय तथा विश्वविद्यालय परिसर में डाकघर शामिल हैं।
इस अवसर पर राज्यपाल जी ने 05 दृष्टिबाधित बालिकाओं को वस्त्र, फल एवं मिष्ठान वितरित किये।
राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री जी ने विश्वविद्यालय चित्रित डाक टिकट का भी लोकार्पण किया। राज्यपाल जी ने दीक्षान्त समारोह के दौरान विद्यार्थियों को कुलाध्यक्ष पदक, मुख्यमंत्री पदक, कुलपति पदक, श्री मुलायम सिंह यादव स्वर्ण पदक, श्री आलोक तोमर स्मृति स्वर्ण पदक, डाॅ0 शकुन्तला मिश्रा स्मृति स्वर्ण पदक, अमित मित्तल स्मृति स्वर्ण पदक, रोहित मित्तल स्मृति स्वर्ण पदक, संस्कृति स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के 02 शोधार्थी सुश्री श्यामली मिश्रा तथा श्री सत्य प्रकाश को उपाधि देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि विश्वविद्यालय ने समावेशी शिक्षा के माध्यम से दिव्यांगजन को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए जो कार्य किया है, वह अत्यन्त सराहनीय है। दीक्षान्त समारोह का पल एक ऐतिहासिक पल है। भारत रत्न स्व0 पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा का आज अनावरण किया गया है। यह प्रतिमा विद्यार्थियों को देशप्रेम की प्रेरणा देगी।
राज्यपाल जी ने कहा कि किसी भी देश का उत्कृष्ट विकास वहां की शिक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है। इसके दृष्टिगत ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का विजन है। इसे विभिन्न चरणों में वर्ष 2022 तक लागू किया जाना है। ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ में ज्ञान के सैद्धान्तिक पक्ष के साथ ही व्यावहारिक पक्ष का भी समावेश है। ज्ञान के इन दोनों पक्षों में समन्वय आवश्यक है। इससे विद्यार्थी डिग्री प्राप्त करने के साथ ही स्वावलम्बी और समाज के आधार स्तम्भ बनेंगे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति बालिकाओं के लिए वरदान साबित होगी। उन्होंने कहा कि कुशल नागरिक बनकर ही देश को आगे बढ़ाया जा सकता है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारतीय ज्ञान की गौरवशाली परम्परा रही है। आज हम सभी यहां इसको महसूस कर रहे हैं। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी व विश्वविद्यालय परिवार को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय के लिए दीक्षान्त समारोह एक विशिष्ट अवसर होता है। दीक्षान्त समारोह प्राचीन समावर्तन संस्कार का ही परिष्कृत रूप है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्तमान में पूरा विश्व वैश्विक महामारी कोविड-19 से त्रस्त है। ऐसे में विश्वविद्यालय द्वारा दीक्षान्त समारोह का आयोजन किया जाना अभिनन्दनीय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा पूरी करने के बाद विद्यार्थी का दायित्व बनता है कि वह समाज के लिए कुछ अच्छा करे। उन्होंने कहा कि हम सब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आभारी हैं, जिन्होंने विकलांगता शब्द को दिव्यांगता का नाम दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी का मानना है कि दिव्यांग व्यक्ति में कोई न कोई दिव्य शक्ति अवश्य होती है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग शब्द दिव्यांगजन को प्रेरणा देता है। उस दिव्य शक्ति का उपयोग करके उन्हें मुख्य धारा से जोड़ते हुए समाज के विकास में सहभागी बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोरोना काल खण्ड में प्रदेश सरकार ने लगभग 10 लाख 68 हजार दिव्यांगजनों को पेंशन देने का कार्य किया। दिव्यांगजनों के जीवनस्तर में सुगमता लाने के लिए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की ओर से सहायक उपकरण, ट्राईसाइकिल और अन्य उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में परम्परागत ज्ञान, आधुनिक इनोवेशन और स्टार्टअप संस्कृति को शामिल किया गया है। इसमें विशिष्ट छात्र-छात्राओं को विशेष अवसर मिल सकेंगे। सरकार दिव्यांगजन के हितों के दृष्टिगत लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने पी0एच0डी0 की उपाधि प्राप्त सुश्री श्यामली मिश्रा का जिक्र करते हुए कहा कि जिनके नाम पर डाॅ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय स्थापित है, आज उनकी पोती को उपाधि प्राप्त हो रही है। डाॅ0 शकुन्तला मिश्रा जी की आत्मा को भी आत्मिक सुख की अनुभूति हो रही होगी कि पहली पी0एच0डी0 की उपाधि उनकी पोती को प्राप्त हुई है।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री श्री अनिल राजभर ने कहा कि वर्तमान सरकार दिव्यांगजनों के हितों को लेकर काफी संवेदनशील है। राज्य सरकार दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

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