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पंत का दम-पुजारा की दीवार, ब्रिस्बेन की ऐतिहासिक जीत के 5 टर्निंग प्वाइंट्स

ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर भारत की युवा टेस्ट टीम ने इतिहास रच दिया है. ब्रिस्बेन में खेले गए चौथे टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने कंगारु टीम को मात दी और सीरीज पर कब्जा कर लिया. पांच दिन तक चले दिलचस्प मैच में भारत की ओर से कई खिलाड़ियों ने ऐसा खेल दिखाया, जिन्होंने मैच के रुख को पूरी तरह से बदल दिया. ब्रिस्बेन टेस्ट को जीत के मुकाम तक पहुंचाने में किन मौकों ने भारतीय टीम का साथ दिया. एक नज़र डालें..

1. ऋषभ पंत की तूफानी पारी
दूसरी पारी में जब ऑस्ट्रेलियाई टीम के द्वारा दिए लक्ष्य का पीछा चल रहा था, तब भारत के सामने ड्रॉ और जीत के बीच किसी एक को चुनने की चुनौती थी. ऋषभ पंत जब बल्लेबाजी करने आए तब उन्होंने अपने ही अंदाज में क्रिकेट खेला और नामुमकिन को मुमकिन कर दिया. पंत ने 138 गेंद में धुआंधार 89 रनों की पारी खेली और अकेले दम पर टीम इंडिया को जीत के पार पहुंचा दिया.

2. पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया को 400 से नीचे समेटा
भारत के लिए ये मैच मुश्किल इसलिए था क्योंकि कोई भी सीनियर बॉलर नहीं खेल रहा था. मोहम्मद सिराज, शार्दुल ठाकुर, टी. नटराजन, वाशिंगटन सुंदर जैसे बॉलर्स ने कंगारुओं को 400 रनों के नीचे समेट दिया और सिर्फ 369 पर ऑल आउट किया. पहली पारी में शार्दुल ठाकुर, टी. नटराजन और वाशिंगटन सुंदर ने 3-3 विकेट लिए.

3. युवा जोड़ी ने कंगारुओं को किया बेहाल
भारतीय टीम जब पहली पारी में बल्लेबाजी करने उतरी तो कंगारुओं ने कड़ी चुनौती दी. जब ऊपरी बल्लेबाज जल्द आउट हुए तो वाशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर की जोड़ी ने कमाल कर दिया. दोनों युवा खिलाड़ी जो मुख्य रूप से बॉलर हैं उन्होंने ऐसा खेल दिखाया कि पूरा देश जोश में आ गया. वाशिंगटन सुंदर ने 62 रन बनाए और शार्दुल ठाकुर ने 67 रन बनाए. इन्हीं दोनों के कारण भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलियाई टीम की लीड को 30 रन के आस-पास समेट दिया.

4. मोहम्मद सिराज का कमाल
दूसरी पारी में जब कंगारू बैटिंग करने आए तो उनके सामने चुनौती थी कि भारतीय टीम को बड़ा लक्ष्य दिया जाए. लेकिन मोहम्मद सिराज जो इस युवा टीम के सबसे सीनियर गेंदबाज हैं उन्होंने कमाल कर दिया. सिराज ने अपनी पारी में कुल 73 रन देकर 5 विकेट लिए और अपना पहला 5 विकेट हॉल लिया.  उनके अलावा शार्दुल ठाकुर ने भी चार विकेट लेकर कंगारु टीम की कमर तोड़ दी.

5. चेतश्वर पुजारा बन गए दीवार
दूसरी पारी में जब भारत को जीतने के लिए 328 रनों की जरूरत थी, तब चेतश्वर पुजारा कंगारुओं के सामने दीवार बनकर खड़े हो गए. ब्रिस्बेन की पिच अपना जादू बिखेर रही थी, लेकिन पुजारा नहीं हिले और टिके रहे. यही कारण रहा कि उन्होंने भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया. पुजारा 211 बॉल में 56 रनों की पारी खेली.

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