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जिस बच्चे के सर से उठ गया पिता का साया, माँ भी छोड़ गई… योगी सरकार ने उठाया पढ़ने-रहने-खाने का दायित्व

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मथुरा में गरीबी से जूझ रहे एक बच्चे की मदद के लिए योगी आदित्यनाथ की सरकार आगे आई है। उसके खाने-पाने से लेकर पढ़ाई-लिखाई की भी समुचित व्यवस्था की है, ताकि आर्थिक स्थिति उसके भविष्य के आड़े न आए। दरअसल, रश्मि शर्मा नामक ट्विटर यूजर ने एक वीडियो अपलोड किया था। इसमें एक बच्चा चूल्हे पर भोजन पकाते दिख रहा था और कोई व्यक्ति उससे बातचीत करते हुए वीडियो बनाता है।

उस व्यक्ति ने बच्चे से नाम पूछा, जिसके जवाब में उसने बताया कि उसका नाम दानी है। इसके बाद उससे पूछा गया कि वो खाना क्यों बना रहा है? इसके जवाब में उसने कहा कि उसकी माँ उसके साथ नहीं रहती है और उसके पिता की मृत्यु तभी हो चुकी है, जब वो काफी छोटा था। उससे पूछा गया कि वो काम क्या करता है, तो उसने बताया कि वो अपना पेट पालने के लिए मजदूरी करता है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि उसके पास मिट्टी का एक चूल्हा है। रोटी पकाने के लिए तवा तक नहीं है। इसके कारण वह प्लेट को ही आँच पर डाल कर रोटी पका रहा था। वीडियो में उसने अपने सोने की जगह दिखाई, जहाँ उसे छत भी नसीब नहीं थी।

उस बच्चे का घर पूरी तरह से जर्जर था। उसके पिता की तस्वीर रखी हुई थी और उसके सामने उसने दीया भी जला रखा था। लेकिन काफी जर्जर होने के कारण घर में कोई भी दुर्घटना हो सकती थी। ये वीडियो मथुरा के शेरगढ़ छाता का था। रश्मि शर्मा ने इसे अपलोड करते हुए कहा कि इस बच्चे का कोई अपना नहीं है। उन्होंने उसका दर्द साझा करते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से ही सरकार से मदद की गुहार लगाई।

जैसे ही इस वीडियो पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी की नज़र पड़ी, उन्होंने बच्चे की मदद के लिए प्रयास शुरू किए। बाद में उन्होंने जानकारी दी कि मथुरा के जिलाधिकारी के प्रयासों से बच्चे का स्कूल में प्रवेश करा दिया गया है और योगी सरकार के दखल के बाद बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी जिला प्रशासन ने ली है। उन्होंने बताया कि सरकारी व्यवस्था व सामाजिक संगठनों की मदद से भी उसे हर संभव सहायता देने का प्रयास किया जा रहा है।

मथुरा के शेरगढ़ स्थित ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ में उसका दाखिला भी करा दिया गया। जिलाधिकारी के निर्देश में लिखा है कि बच्चे की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, उसके पास जमीन और कमाई का कोई जरिया भी नहीं है, उसका अपना कोई नहीं है- इसलिए, विद्यालय के प्रधानाचार्य ने उसकी शिक्षा निःशुल्क करने का निर्णय लिया है। 11 वर्षीय बच्चे का दाखिला कक्षा 3 में कराया गया। प्रधानाचार्य ने उसके उज्जवल भविष्य की भी कामना की।

इन सबके बावजूद कुछ ‘विरोधजीवी’ योगी सरकार को बदनाम करने में लगे रहते हैं। सीआर जया सुकिन नाम के एक अधिवक्ता ने उत्तर प्रदेश में अपराध बढ़ने, गैर-न्यायिक हत्याएँ होने और दलितों व महिलाओं पर अत्याचार होने के आरोप लगाते हुए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग करने वाली याचिका दायर की थी।  याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी।

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