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कॉन्ग्रेस ने मेरा इस्तेमाल नहीं किया, मुझे नीचे गिराने में लगे हैं पार्टी नेता: हार के बाद बोले कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल

गुजरात प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल अपनी पहली ही परीक्षा में फेल रहे और जिन इलाकों को पाटीदारों का गढ़ कहा जाता है, वहाँ भी नगर निकाय के चुनाव (Gujarat Civic Elections) में वो अपनी पार्टी यानी कॉन्ग्रेस का खाता तक नहीं खुलवा सके। पिछले 2 वर्षों से हार्दिक कॉन्ग्रेस में हैं और तब से अब तक 8 सीटों पर उपचुनाव के बाद अब निकाय चुनाव भी हो चुके हैं। 2015 के ‘पाटीदार आंदोलन’ से भाजपा के खिलाफ बिगुल फूँकने वाले हार्दिक पटेल ने अब अपनी ही पार्टी पर निशाना साधा है।

हार्दिक पटेल ने कहा कि निकाय चुनावों में कॉन्ग्रेस ने उनका ठीक तरह से इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता ही उन्हें नीचा दिखाने में लगे हुए हैं। हार्दिक पटेल ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि चुनाव प्रचार अभियान और जनसभाओं में उनके और कार्यक्रम तय किए जाते, तो सूरत में कॉन्ग्रेस को शून्य सीटें नहीं मिलतीं। हार्दिक पटेल ने बताया कि 10 दिनों में उन्होंने 27 रैलियाँ की और सभी खुद से की, पार्टी ने इसमें कोई मदद नहीं की।

हार्दिक पटेल बार-बार ‘आंदोलन’ शब्द का प्रयोग करते रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आंदोलन से कमाई करने वालों को ‘आंदोलनजीवी’ कहे जाने को अपनी जनसभाओं में मुद्दा बनाते रहे। उन्होंने 2015 के निकाय चुनावों के बारे में कहा कि उस वक़्त कॉन्ग्रेस को जितनी भी सीटें मिलीं, वो ‘पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (PAAS)’ के आंदोलन के कारण मिली। वो अभी भी इस संगठन के सदस्य बने हुए हैं।

हार्दिक पटेल ने कहा, “कॉन्ग्रेस को 2015 में आरक्षण आंदोलन का फायदा मिला, ये उसे भी स्वीकार करना पड़ेगा। मैं कॉन्ग्रेस को बार-बार कहता रहा हूँ की वो पाटीदार आंदोलन से निकले नेताओं को तरजीह दे, क्योंकि हमने पूरे राज्य का भ्रमण किया है। आज भी मैं दौरे कर रहा हूँ। उनमें से एक भी कॉन्ग्रेस ने तय नहीं किया है। फिर भी मैं अपने पाँवों पर खड़ा हूँ, क्योंकि मैं पार्टी को मजबूत करना चाहता हूँ, भले कोई और ये करे या नहीं।”

हार्दिक पटेल ने कहा कि कॉन्ग्रेस के नेता उन्हें नीचा दिखाना और नीचे गिराना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा करने दीजिए, मैं बार-बार उठ कर खड़ा होऊँगा। उन्होंने दावा किया कि 2015 में भाजपा उन्हें नीचे गिराना चाहती थी, लेकिन वो फिर खड़े हुए। उन्होंने बताया कि निकाय चुनाव प्रचार के अंतिम दिन पार्टी ने उन्हें सूरत जाने को कहा लेकिन उन्हें इनकार करना पड़ा क्योंकि उनके दौरे 7 दिन पूर्व से भी योजनाबद्ध होते हैं।

हार्दिक पटेल ने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस ने चुनाव से 25 दिन पहले बताया होते कि उन्हें सूरत में 25 रैलियाँ करनी हैं, तो फिर वहाँ पार्टी के लिए ऐसे परिणाम नहीं आते। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को खुले मन से आत्मनिरीक्षण कर के पता करना होगा कि कहाँ वो कमजोर पड़े और कहाँ वो विफल हुए। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का घोषणापत्र और चुनावी गाना लोगों तक पहुँचने में सफल नहीं रहा। उन्होंने कहा कि अगर अहमद पटेल होते तो बेहतर प्रबंधन करते।

गुजरात में हुए म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चुनाव में भाजपा की बंपर जीत को देखते हुए पीएम मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट कर जनता का आभार जताया था। भाजपा ने कुल 85% सीटें जीती हैं। वहीं कॉन्ग्रेस मात्र 44 सीटों पर सिमट कर रह गई है।

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