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आगरा में कुल्हाड़ी से साधु शिव गिरि की बेहरमी से की गई हत्या, हनुमान मंदिर परिसर में मिला खून से सना शव

आगरा/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आगरा में एक साधु की धारदार हथियार से बेहरमी से हत्या कर दी गई है। जिसके कारण इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय लोगों ने मंदिर परिसर में शव को देखा जिसके बाद यूपी पुलिस को इस घटना की सूचना दी गई। फिलहाल पुलिस शव को अपने कब्जे में लेकर मामले की जाँच करने में जुटी हुई है।

मंदिर परिसर में लहूलुहान मिला शव

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के न्यू आगरा जिले में स्थित मऊ गाँव का है। जहाँ पर यमुना नदी के किनारे जंगलो में हनुमान जी का मंदिर है। इसी मंदिर में ‘शिव गिरि’ नाम के साधु पूजा-अर्चना किया करते थे और मंदिर में ही रहते भी थे। सुबह हुई तो वहाँ पर रहने वाले लोगों ने मंदिर परिसर में खून से लथपथ साधु के शव को देखा। जिसके बाद लोगों ने इस घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुँच कर शव को कब्जे में लेकर मामले की जाँच शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने बताया कि शिव गिरी पिछले 30 साल से मंदिर में पुजारी थे। मूलत: फतेहपुर सीकरी के गाँव खेड़ा भोपुर के निवासी थे।

SP सिटी का बयान

आगरा के SP सिटी ने बताया कि न्यू आगरा थाना क्षेत्र के मऊ गाँव में एक साधू की हत्या की खबर मिली थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। मौके से कुल्हाड़ी भी बरामद हुई है जिससे हत्या की बात सामने आ रही है। मुकदमा दर्ज करके जाँच की जाएगी। अभी कोई कारण सामने नहीं आया है।

आगरा के SP सिटी रोहन पी बोत्रे ने बताया कि साधु की हत्या कुल्हाड़ी से काटकर की गई है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। एसपी ने बताया कि आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम गठित कर दी गई है और जल्द ही हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पुलिस को आशंका है कि किसी नशेबाज ने वारदात को अंजाम दिया है। पुलिस को मंदिर परिसर में देसी शराब का खाली क्वार्टर भी पड़ा मिला। पुजारी के सिर के पिछले हिस्से में प्रहार किया गया था। मौके पर संघर्ष के निशान भी मिले हैं। पुलिस का मानना है कि मंदिर पर रात को एक या दो लोग ही आए थे। उन्होंने ही वारदात को अंजाम दिया।

गौरतलब है कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन इलाके में दो साधुओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। दोनों साधु गोवर्धन मार्ग पर मौजूद गिरिराज बगीचा के पीछे बने आश्रम में रहते थे। आश्रम में रामायण का पाठ कर रहे दोनों साधुओं ने अपने एक और साथी के साथ सुबह की चाय पी थी। जिसके बाद तीनों के ही मुँह से झाग निकलता हुआ देखा गया। बताया गया कि आश्रम में ही मौजूद गाय के दूध से चाय बनाकर इन लोगों ने पी थी, जिसके बाद यह घटना हुई।

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