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खुद के सर्वे में हार रही TMC, मुस्लिम तुष्टिकरण से आजिज हो हिंदू BJP के साथ: क्लबहाउस पर सब कुछ बोल गए PK

नई दिल्ली। क्लबहाउस ऐप पर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) और लुटियंस पत्रकारों के बीच बातचीत सोशल मीडिया में छाई हुई है। किशोर फिलहाल पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए काम कर रहे हैं। इस बातचीत में उन्होंने माना है कि टीएसमी के आंतरिक सर्वेक्षणों में भी बीजेपी बंगाल के विधानसभा चुनाव में आसानी से जीत रही है।

पीके को इस बात का बिल्कुल भी आभास नहीं था कि उनकी बातचीत रिकॉर्ड हो रही। ऑडियो में प्रशांत किशोर ने माना कि TMC के आंतरिक सर्वे में भी भाजपा जीत रही है। लोग मोदी को वोट कर रहे हैं। बंगाल की आबादी के 27% SC और मतुआ सभी भाजपा के लिए वोट कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “भाजपा को मोदी और हिंदू फैक्टर के कारण वोट मिल रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी के बाहर निकलने या मेरे प्रवेश का चुनाव परिणामों पर कोई असर नहीं है। यहाँ 1 करोड़ से अधिक हिंदी भाषी लोग हैं और 27% अनुसूचित जाति हैं। ये सभी भाजपा के साथ खड़े हैं।”

प्रशांत किशोर ने आगे जोर देकर कहा, ”मतुआ मुख्य रूप से भाजपा को वोट देंगे। हालाँकि, वे भाजपा के लिए एकजुट होकर मतदान नहीं करेंगे। वो 75% बीजेपी और 25% टीएमसी को चुनाव करेंगे, क्योंकि उन्होंने लोकसभा चुनाव में भी ऐसा ही किया था।”

ज्यादातर लोगों का मानना, बीजेपी बना रही सरकार

चुनावी रणनीतिकार ने कहा, “हमने यह पता लगाने के लिए एक आंतरिक सर्वेक्षण किया कि राज्य में किसकी सरकार बनने जा रही है और लोग किसे वोट दे रहे हैं। सर्वेक्षण में हमने पाया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बना रही है। भाजपा को वोट देने वाले भी कह रहे हैं कि पार्टी सरकार बनाएगी। वाम दलों को लगभग 15% वोट ही मिलेंगे। वामपंथियों को वोट देने वालों 2/3 का भी यही कहना है कि बीजेपी सत्ता में आएगी और बहुमत की सरकार बनाएगी।”

प्रशांत किशोर का कहना है कि वाम मतदाताओं के बीच यह धारणा प्रबल है कि भाजपा को सत्ता में आना चाहिए। तभी वे स्वतंत्र रूप से काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बाहर से राज्य में आने वाले कई लोग भाजपा की जमीनी उपस्थिति से अनभिज्ञ हैं। लेकिन यह सच नहीं है। वे पहले वाम दलों के सदस्य रहे होंगे, लेकिन अब वे समर्पित भाव से भाजपा के लिए काम कर रहे हैं। किशोर ने स्वीकार किया कि एक या दो निर्वाचन क्षेत्रों के अलावा अन्य जगहों पर भाजपा के पास जमीनी कैडर हैं। उन्होंने यह भी माना कि लगभग 50-55% हिंदू भाजपा को वोट देंगे।

पीएम मोदी की लोकप्रियता पर क्या बोले

पश्चिम बंगाल में पीएम मोदी की लोकप्रियता के बारे में पूछे जाने पर प्रशांत किशोर ने कहा, “पीएम मोदी के खिलाफ कोई एंटी-इनकंबेंसी नहीं है। मोदी बंगाल ही नहीं पूरे देश में बहुत ज्यादा पॉपुलर हैं, इसमें कोई भी संदेह नहीं है। पूरे देश में लोग उनकी बात सुन रहे हैं। पूरे भारत में उनका एक कल्ट है। कम से कम 35% लोग ऐसे हैं जो पीएम में भगवान देखते हैं। यह अच्छा है या बुरा यह एक अलग मुद्दा है। पीएम मोदी का मूल आधार हिंदी भाषी लोग हैं। इसके अलावा सत्ता विरोधी लहर राज्य सरकार के खिलाफ है, न कि केंद्र के खिलाफ है।”

उन्होंने कहा, ”हमने अपने सर्वे में पाया कि पीएम मोदी और ममता बनर्जी दोनों ही यहाँ काफी लोकप्रिय हैं। लेकिन मोदी इसलिए भी लोकप्रिय हैं, क्योंकि यहाँ के लोगों ने राज्य में भाजपा के शासन का अनुभव नहीं किया है। यह एक बड़ा कारण है। लोगों ने राज्य में पिछले 30-35 वर्षों से भाजपा की सरकार नहीं देखी है। वहीं इस बार मोदी की रैलियों में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहला रैलियों में बड़ी संख्या में लोगों का जुटना और दूसरा उनकी (PM) लोकप्रियता है। इसमें दो राय नहीं है कि रैलियों में बड़ा बदलाव टीएमसी के खिलाफ गुस्सा, ध्रुवीकरण और मोदी की लोकप्रियता है।”

टीएमसी की मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति को स्वीकारा

बंगाल का उदाहरण देते हुए प्रशांत ने कहा कि हमें स्वीकार करना होगा कि यहाँ अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए पिछले 20 वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य की राजनीति में यह धारणा रही है कि जिसके पास भी मुस्लिम वोट होगा वही सरकार बनाएगा। चाहे वह वाम, कॉन्ग्रेस या दीदी की सरकार हो। रणनीति मुस्लिम वोटों को साधने की रही है। पहली बार हिंदुओं ने महसूस किया है कि उनके लिए एक पार्टी (भाजपा) है। प्रशांत किशोर ने कहा कि बीजेपी को इस भावना का फायदा मिल रहा है।

गौरतलब है कि साक्षी जोशी, आरफ़ा खानम शेरवानी, रोहिणी सिंह, स्वाति चतुर्वेदी, रवीश कुमार और अन्य कई लुटियन पत्रकार समूह इस चैट का हिस्सा थे। इस बातचीत के दौरान ‘स्वतंत्र पत्रकार’ साक्षी जोशी ने ममता बनर्जी की शौचालय की दिनचर्या के बारे में उनके चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से पूछताछ की।

दिलचस्प यह है कि इस बातचीत में बीजेपी की संभावनाओं पर इतने खुलकर बात करने वाले प्रशांत किशोर ने बीते साल के अंत में दावा किया था कि बंगाल चुनाव में यदि बीजेपी को 100 सीटें आ गई तो वे चुनावी प्रबंधन का काम छोड़ देंगे। वैसे क्लबहाउस पर हुई इस बातचीत के कई तरह के मायने भी लग रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि बंगाल चुनाव के नतीजों से प्रशांत किशोर के पंजाब के असाइनमेंट पर फर्क न पड़े, इसलिए उन्होंने जानबूझकर यह प्लेटफॉर्म और वक्त चुना है।

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