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एंटी मास्क स्टडी के सहारे प्रशांत भूषण की कुटिल चाल, लोगों ने बेशर्मी पर लगाई लताड़

नई दिल्ली। ‘प्रख्यात बुद्धिजीवी’ और पीआईएल एक्टिविस्ट वकील प्रशांत भूषण ने कानूनी गतिविधियों में कई असफलताओं के मिलने के बाद अब अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए नया पैंतरा आजमाया है। रोहिंग्या मामले में प्रशांत भूषण द्वारा दायर की गई याचिका में उनके पक्ष में फैसला न आने के बाद एंटी-मास्क को लेकर ट्वीट किया।

ऐसे समय में जब डॉक्टर और हेल्थकेयर विशेषज्ञ लोगों को कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के कारण मास्क लगाने की सलाह दे रहे हैं, भूषण ने मास्क के उपयोग के खिलाफ षड्यंत्रकारी सिद्धांतों का सहारा लिया है।

Prashant Bhushan spreads anti-mask conspiracy theories
प्रशांत भूषण ने मास्क विरोधी षड्यंत्र फैलाए

उनकी साजिश की वजह से बोर्ड की आलोचना हुई। भूषण की इस बयानबाजी से दुखी डॉ. अमित थडलानी ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें पता है कि परिकल्पना (hypothesis) का क्या मतलब है। एक परिकल्पना एक प्रस्ताव है जो एक अध्ययन या प्रयोग का विषय है जो अभी तक सच नहीं पाया गया है।

अन्य लोगों ने भी डॉ. अमित थडलानी के स्टेटमेंट से सहमति जताई।

दूसरों ने भी उन्हें उनके ट्वीट के लिए लताड़ लगाई।

राजनीतिक स्पेक्ट्रम के लोग ट्वीट के लिए उनकी निंदा कर रहे हैं।

अपने प्रोपेगेंडा ट्वीट के लिए सोशल मीडिया पर कई लोगों द्वारा लताड़े जाने पर प्रशांत भूषण ने माफी माँगने के बजाय बेशर्मी का उदाहरण दिया।

इससे पहले फरवरी में, पीआईएल कार्यकर्ता ने दावा किया था कि कोविद -19 देश में स्वाभाविक रूप से खत्म हो रहा था और उनका कहना था कि सरकार टीकों में निवेश करने से परहेज करे।

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