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कोरोना के खिलाफ लड़ाई जीतने के लिए हरेक नागरिक का सहयोग आवश्यक : योगी

कोरोना कर्फ्यू में छूट का मतलब ‘लापरवाही’ की छूट नहीं : मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि कोरोना कर्फ्यू में छूट का मतलब ‘लापरवाही’ की छूट नहीं है। कई जिलों में लोगों के मास्क न लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने जैसी जानकारी मिली है। यह स्थिति किसी के लिए भी अच्छी नहीं है। कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई जीतने के लिए हरेक नागरिक का सहयोग आवश्यक है।

कोविड-19 टीम के साथ बैठक में सीएम योगी ने अधिकारियों से कहाकि पुलिस प्रशासन को सक्रियता बढ़ाने की जरूरत है। लोगों को जागरूक भी करें, साथ-फुट पेट्रोलिंग, चेंकिंग और आवश्यकतानुसार प्रवर्तन की कार्रवाई भी की जानी चाहिए। सभी जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक शासन द्वारा जारी आदेशों का प्रतिबद्धतापूर्वक अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना कर्फ्यू से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए। रात्रिकालीन बन्दी को प्रभावी बनाने के लिए शाम 06 बजे से ही पुलिस व स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो जाएं। पब्लिक एड्रेस सिस्टक का उपयोग करें। कहीं भी भीड़ की स्थिति न बने।

उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन की मांग, आपूर्ति और खर्च में संतुलन बनाने के लिए कराए जा रहे ऑक्सीजन ऑडिट के अच्छे परिणाम मिले हैं। सतत नियोजित प्रयासों का ही परिणाम है कि आज अधिकांश मेडिकल कॉलेजों और रिफिलर्स के पास में 03 से 04 दिन का ऑक्सीजन बैकअप हो गया है। बीते 24 घंटों में 454.7 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का वितरण किया गया है। औद्योगिक इकाइयों को ऑक्सिजन के उपयोग की अनुमति दी जा चुकी है। इन गतिविधियों को सुचारू रखा जाए।

उन्होंने अधिकारियों से कहाकि कोविड की तीसरी लहर से बचाव की तैयारी में मानव संसाधन का प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है। अधिकारियों ने बताया कि मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण जारी है। डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ आदि के लिए पीडियाट्रिक केयर ट्रेनिंग भी शुरू हो चुका है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहाकि यह कार्य यथाशीघ्र पूरा कर लिया जाए। सुविधानुसार भौतिक प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए।

इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों के संरक्षण के लिए संकल्पित है। हर इच्छुक किसान से गेहूं क्रय किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि बड़े किसानों के साथ-साथ लघु एवं सीमांत किसानों के हितों का ध्यान भी रखा जाए। खरीद प्रक्रिया महज निर्धारित खरीद लक्ष्य की पूर्ति तक सीमित नहीं है। जब तक किसान आएंगे, खरीद की जाए।

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