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पेगासस के विरोध में सैकड़ों कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया नंग-धड़ंग प्रदर्शन, उड़ाई COVID मानदंडों की धज्जियाँ

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नई दिल्ली। कथित फोन टैपिंग मामले को लेकर सोमवार (जुलाई 19, 2021) को ‘युवा नेता’ श्रीनिवास बीवी के नेतृत्व में सैकड़ों कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। कोविड-19 मानदंडों की धज्जियाँ उड़ाते हुए पुरुष कार्यकर्ता शर्टलेस हो गए। इस दौरान उन्होंने ‘जासूस मोदी डाउन-डाउन’ का नारा लगाया।

प्रदर्शनकारियों ने एक संयुक्त संसदीय समिति और उच्चतम न्यायालय की निगरानी में मामले की जाँच की भी माँग की।

श्रीनिवास का दावा, राहुल गाँधी थे ‘संभावित निशाना’

मीडिया रिपोर्टों को साझा करते हुए, श्रीनिवास ने अपने ट्वीट्स के माध्यम से यह भी दावा किया कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए जासूसी करने के लिए एक ‘संभावित लक्ष्य’ थे।

सिर्फ वे ही नहीं, श्रीनिवास की कथित सूची में राहुल गाँधी के सहयोगी भी थे। हालाँकि प्रदर्शन के दौरान श्रीनिवास की टीशर्ट की बाईं तरफ राहुल गाँधी की तस्वीर देखी जा सकती है।

कॉन्ग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया

इस बीच, द वायर द्वारा इसे ‘विस्फोटक कहानी’ (explosive story) के रूप में प्रकाशित किए जाने के बाद, भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस पार्टी वर्तमान में पेगासस स्नूपगेट (Pegasus snoopgate) पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।

नेटिजन्स ने इसे साजिश बताया

इस बीच, नेटिज़न्स ने मानसून सत्र से ठीक पहले इस मुद्दे को उठाने के लिए कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाया है। नेटिज़न्स ने दो दिन पहले राहुल गाँधी के अस्पष्ट ट्वीट को नोटिस किया, जिसमें उन्होंने पूछा था, “मैं सोच रहा हूँ कि आप इन दिनों क्या पढ़ रहे हैं।”

द वायर द्वारा कथित फोन टैपिंग की कहानी को सामने लाने के बाद, राहुल गाँधी ने आज अपने पहले के ट्वीट का हवाला दिया और टिप्पणी की, “हम जानते हैं कि वह क्या पढ़ रहा है, आपके फोन पर सब कुछ। #Pegasus.”

द वायर का दावा

रविवार (जुलाई 19, 2021) शाम को, वामपंथी पोर्टल द वायर ने बताया कि 40 भारतीय पत्रकारों के नाम एक कथित लीक सूची में हैं, जो इजरायली स्पाइवेयर पेगासस का उपयोग कर निगरानी में थे। 40 भारतीय जाहिर तौर पर तथाकथित लीक सूची में उल्लिखित हजारों लोगों में शामिल हैं, जिन्हें पहले द गार्जियन द्वारा रिपोर्ट किया गया था।

हालाँकि, द वायर या अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों ने इस तथाकथित लीक का कोई सबूत नहीं दिया है। इसके अलावा, इस ‘लीक’ की रिपोर्ट करने वाले किसी भी मीडिया हाउस ने यह नहीं बताया कि यह डेटा कहाँ से लीक हुआ था, कौन सी सरकार कथित तौर पर उन लोगों की जासूसी कर रही थी। सूची में स्पष्ट रूप से कई देशों के नाम शामिल हैं, तो ऐसे में सूची को सही मानते हुए, यह बताना मुश्किल है कि किस देश द्वारा किसकी जासूसी की जा रही थी।

सरकार ने दावे से किया इनकार

भारत सरकार ने कथित लीक के बारे में एक प्रश्नावली के जवाब में एक बयान जारी किया। बयान में कहा गया है, “कहानी तैयार की जा रही है जो न केवल तथ्यों से रहित है बल्कि पूर्व-कल्पित निष्कर्षों में भी स्थापित है। ऐसा लगता है कि आप एक अन्वेषक और अभियोजक के साथ ही जज की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं।”

बयान में कहा गया है कि आरटीआई जवाब और संसद दोनों में, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी एजेंसियों द्वारा कोई अनधिकृत अवरोधन नहीं किया गया है। बयान में कहा गया है, “विशिष्ट लोगों पर सरकारी निगरानी के आरोपों का कोई ठोस आधार या इससे जुड़ी सच्चाई नहीं है।”

हालाँकि, INC और उसके वामपंथी इकोसिस्टम ने इसे एक अवसर के रूप में देखते हुए ‘स्पष्टता’ की माँग करते हुए मोदी सरकार के खिलाफ तीखा हमला किया है।

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