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अखिलेश यादव के करीबियों पर इनकम टैक्स रेड पर अभिसार शर्मा ने बोला सफेद झूठ: यूपी चुनाव से पहले ही नजर आ रही बौखलाहट

अभिसार शर्मा (Abhishar sharma) केंद्र सरकार (Central goverment) को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ते, लेकिन इसी चक्कर में अक्सर वह झूठ फैलाते हुए पकड़े गए। अपने हालिया वीडियो में YouTuber शर्मा खुलेआम झूठ बोलते हुए दावा किया कि समाजवादी पार्टी के नेताओं पर हाल ही में छापेमारी के बाद आयकर विभाग खाली हाथ लौट आया है।

अभिसार शर्मा ने 21 दिसंबर 2021 को एक वीडियो YouTube अपलोड किया। इसमें उन्होंने सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए भारत समाचार की खबरों का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कहा कि आयकर विभाग ने चार दिन तक समाजवादी नेताओं (Samajewadi party) के खिलाफ छापेमारी की, लेकिन उनके हाथ खाली ही रहे। वीडियो में यूट्यूबर ने दावा किया कि चार दिन की कड़ी मशक्कत के बाद भी आयकर विभाग अखिलेश यादव के ओएसडी जैनेंद्र यादव के घर से केवल 1.2 लाख रुपए नकद और 400 ग्राम सोना बरामद कर सका। बाकी के सपा नेताओं के यहाँ से आयकर की टीम को कुछ भी नहीं मिला।

योगी को भड़काने की कोशिश

शर्मा ने केंद्र और योगी सरकार (Yogi Aditynath) का मजाक उड़ाया और मथुरा के रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा का एक छोटा सा क्लिप शेयर कर भाजपा के प्रति अपनी नफरत को जाहिर कर दिया। अभिसार शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सपा के नेताओं को पेड मीडिया के जरिए परेशान करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को झूठे केस में फँसाने के लिए बीजेपी जाँच एजेंसी का इस्तेमाल कर रही है।

अभिसार शर्मा ने अपने वीडियो के जरिए सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम मोदी के बीच फूट डालने की कोशिश करते हुए कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (Kashi vishvanath corridor) के उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी (PM Modi) ने योगी को बैकफुट पर धकेल दिया। शर्मा ने भी दावा किया कि सीएम योगी के नेतृत्व पर बीजेपी के ही लोगों को भरोसा नहीं है, पार्टी में अंदरूनी फूट पड़ी हुई है। उन्होंने सीएम योगी को पहले अपना घर बचाने की सलाह दी है।

दरअसल, यूट्यूबर अभिसार शर्मा इस तरह के दावे बीजेपी और पीएम मोदी से नफरत के चलते कर रहे हैं, जबकि इनकम टैक्स विभाग ने सपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को सफल करार दिया है। बावजूद इसके शर्मा केंद्रीय जाँच एजेंसी को बदनाम करने के लिए बेशर्मी से झूठ बोल रहे हैं।

सपा नेताओं के हवाला लेनदेन का पता चला

मंगलवार को केंद्रीय जाँच एजेंसी ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के कथित करीबी सहयोगियों के खिलाफ फर्जी खर्च के दावे और हवाला लेनदेन पता लगाने की बात कही थी।

गौरतलब है कि 18 दिसंबर 2021 को आयकर विभाग ने सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सचिव राजीव राय, आरसीएल समूह के प्रमोटर मनोज यादव और जैनेंद्र यादव और अखिलेश यादव के एक ओएसडी के परिसरों पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी टैक्स चोरी के मामले में की गई थी। ऐसा नहीं है कि ये कार्रवाई केवल यूपी में ही हुई थी। उत्तर प्रदेश के अलावा आईटी विभाग ने कोलकाता, बेंगलुरु और दिल्ली-एनसीआर के 30 स्थानों पर सर्चिंग की थी।

छापेमारी के बाद आयकर विभाग ने बयान जारी कर कहा था, “खाली बिल बुक, टिकट, फर्जी आपूर्तिकर्ताओं की हस्ताक्षरित चेक बुक सहित कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं।”

विभाग ने कहा था, “एक कंपनी के निदेशकों की 86 करोड़ रुपए से अधिक की अघोषित आय का पता चला है। इसमें से 68 करोड़ रुपए की अघोषित आय को आरोपित ने स्वीकार करते हुए टैक्स जमा करने की पेशकश की है। पिछले कुछ सालों के दौरान करीब 150 करोड़ रुपए से अधिक के कारोबार से जुड़े अकाउंट बुक नहीं बनाए गए हैं।”

जाँच एजेंसी ने यह भी खुलासा किया कि एक अन्य कंपनी ने अपनी अघोषित आय और निवेश को मुख्यधारा में लाने के लिए शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया था। इसमें से 12 करोड़ रुपए के फर्जी निवेश और आय की पहचान की गई है।

इसी तरह से एक और दूसरे केस में जाँच एजेंसी ने एक शेल कंपनी में 11 करोड़ रुपए के फर्जी निवेश और 3.5 करोड़ रुपए बेनामी संपत्तियों की पहचान की है।

इनकम टैक्स विभाग के द्वारा जारी बयान के आधार पर एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि बेंगलुरु के एक ट्रस्ट और उससे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ तलाशी के दौरान 1.12 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी जब्त की गई। इसके अलावा इस बात के भी सबूत मिले हैं कि करीब 10 करोड़ रुपए की कैपिटेशन फीस नकद में एकत्र की गई थी।

इनकम टैक्स विभाग के छापे के दौरान शेल कंपनियाँ बनाने के मामले में कोलकाता के एक ऑपरेटर को भी शामिल किया गया। विभाग ने कहा, “यह पाया गया है कि एंट्री ऑपरेटर ने 408 करोड़ रुपए की फर्जी शेयर पूंजी की आवास प्रविष्टियां और इन मुखौटा कंपनियों के माध्यम से 154 करोड़ रुपए का फर्जी असुरक्षित कर्ज देने के लिए कई सारी मुखौटा कंपनियों का गठन किया।” जाँच एजेंसी के मुताबिक, ऑपरेटर ने 5 करोड़ रुपए के कमीशन का खुलासा किया था।

जाँच एजेंसी के द्वारा सैकड़ों करोड़ रुपए की अघोषित आय का पता चलने के बाद भी अभिसार शर्मा जैसे पक्षपाती पत्रकार सरकार के खिलाफ झूठ फैलाते हैं।

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