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दाऊद इब्राहिम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक, ऑर्थर रोड जेल होगा अब ठिकाना

दाऊद इब्राहिम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महाराष्ट्र सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के 62 वर्षीय मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक को मुंबई की स्पेशल PMLA कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मलिक को 7 मार्च, 2022 तक हिरासत में भेजा दिया था। आज शाम तक उन्हें ED की कस्टडी से मुंबई की आर्थर रोड जेल में शिफ्ट कर दिया जाएगा। ईडी ने मलिक को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 23 फरवरी गिरफ्तार किया था।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट में सुनवाई के दौरान एडिशनल सोसलिस्टर जनरल अनिल सिंह ने अदालत से उनकी कस्टडी बढ़ाने की माँग नहीं करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आग्रह किया था, जिसे जज ने मान लिया। हालाँकि, इसके बावजूद एनसीपी नेता नवाब मलिक के वकील तारक सैय्यद ने उनकी कस्टडी का विरोध करते हुए एक एप्लीकेशन मूव किया था। सुनवाई में सरकारी वकील ने 1993 बम धमाकों से जुड़ा एक कॉन्फिडेंशियल स्टेटमेंट अदालत के सामने रखा है, जिसके बाद मलिक की कस्टडी को बढ़ा दिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, विशेष न्यायाधीश रोकाडे ने उन्हें ईडी की हिरासत में भेजते हुए तर्क दिया था कि पिछले 20 वर्षों में अपराध की कार्यवाही की जाँच के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता होगी। ED की दलीलों के बाद न्यायाधीश ने यह भी पाया था कि मलिक के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया अच्छी तरह से स्टेब्लिश थे। बता दें कि इससे पहले भी नवाब मालिक की हिरासत को 7 मार्च, 2022 तक बढ़ा दिया गया था, क्योंकि नवाब मलिक से पूछताछ करने के लिए ED की पहले की रिमांड अवधि के दौरान 3 से 4 दिन जाँच एजेंसी के पास उपलब्ध नहीं थे क्योंकि मलिक को अस्पताल ले जाना पड़ा था।

बता दें कि इससे पहले नवाब मलिक के वकील अमित देसाई ने कोर्ट में कहा था, ईडी ने रिमांड आवेदन में आरोप लगाया था कि मलिक ने भगोड़े डॉन दाउद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर को कुर्ला की जमीन के लिए 55 लाख रुपये दिए थे। लेकिन आज इसे प्रिंटिंग मिस्टेक बताते हुए सिर्फ 5 लाख दिए जाने की बात कही जा रही है। जबकि इसी आवेदन के आधार पर मलिक को ईडी की हिरासत में भेजा गया। इसी के आधार पर मलिक पर टेरर फंडिंग का भी आरोप लगाया गया।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि इस मामले में मुनिरा प्लंबर ने ईडी को दिए बयान में बताया कि कुर्ला में गोवाला कंपाउंड में उनका 3 एकड़ का प्लॉट था। इस जमीन पर अवैध कब्जे को खाली कराने और विवादों को निपटाने के लिए सलीम पटेल ने उनसे पाँच लाख रुपए लिए थे, लेकिन उसने यह जमीन थर्ड पार्टी को बेच दी जबकि सलीम को कभी प्रापर्टी को बेचने के लिए नहीं कहा गया था। यही नहीं, 18 जुलाई 2003 को जमीन के मालिकाना हक ट्रांसफर करने से संबंधित कागज पर ही हस्ताक्षर नहीं किया था। उन्हें इस बात की भनक नहीं थी कि सलीम पटेल ने यह जमीन किसी दूसरे को बेच दी है।

वहीं, इस जमीन से जुड़े कागजातों को खंगालने के बाद ईडी को पता चला कि इसके पीछे सरदार शाहवली खान है जो 1993 के मुंबई बम धमाके का आरोपी है। वह डाटा और मकोका के तहत औरंगाबाद की जेल में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। शाहवली खान ने ईडी को बताया था कि सलीम पटेल भगोड़े डॉन दाउद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर का करीबी था। हसीना के निर्देश पर ही सलीम ने मुनिरा की जमीन के बारे में सभी फैसले लिए थे। एजेंसी का कहना है कि यह जाँच, भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम, उसके सहयोगियों और मुंबई अंडरवर्ल्ड की गतिविधियों से संबंधित है।

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