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क्या है नेशनल हेराल्ड मामला जो बढ़ा सकता है गांधी परिवार की मुश्किलें | जानिए इसकी पूरी कहानी

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नेशनल हेराल्ड से जुड़े धन शोधन के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी नेता राहुल गांधी को समन जारी किया है। क्या आपको पता है कि नेशनल हेराल्ड से जुड़ा यह कौन सा मामला है जिसको लेकर गांधी परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं? आज हम आपको नेशनल हेराल्ड केस के बारे में विस्तार से बताएंगे।

नेशनल हेराल्ड मामले में तीन प्रमुख ‘नाम’ शामिल हैं – एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड, यंग इंडिया लिमिटेड और कांग्रेस।

2012 में, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता और अधिवक्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने एक निचली अदालत के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें आरोप लगाया गया कि यंग इंडियन लिमिटेड (YIL) द्वारा एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के अधिग्रहण में कुछ कांग्रेस नेता धोखाधड़ी और विश्वासघात में शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि YIL ने नेशनल हेराल्ड की संपत्ति को ‘दुर्भावनापूर्ण’ तरीके से ‘हड़प’ लिया था।

क्या है नेशनल हेराल्ड?

नेशनल हेराल्ड 1938 में अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के साथ-साथ जवाहरलाल नेहरू द्वारा स्थापित एक समाचार पत्र था। इसका उद्देश्य भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में लिबरल ब्रिगेड की चिंताओं को आवाज देना था। एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा प्रकाशित, यह अखबार आजादी के बाद कांग्रेस पार्टी का मुखपत्र बन गया। एजेएल ने दो अन्य समाचार पत्र भी प्रकाशित किए, एक हिंदी और एक उर्दू में। 2008 में, पेपर 90 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के साथ बंद हो गया।

एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के बारे में

एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) जवाहरलाल नेहरू के दिमाग की उपज थी। 1937 में, नेहरू ने अपने शेयरधारकों के रूप में 5,000 अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के साथ इस फर्म की शुरुआत की थी। कंपनी विशेष रूप से किसी व्यक्ति से संबंधित नहीं थी। 2010 में, कंपनी के 1,057 शेयरधारक थे। इसे घाटा हुआ और 2011 में इसकी होल्डिंग यंग इंडिया को हस्तांतरित कर दी गई।

एजेएल ने 2008 तक अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड अखबार, उर्दू में कौमी आवाज और हिंदी में नवजीवन प्रकाशित किया था। 21 जनवरी 2016 को, एजेएल ने इन तीन दैनिक समाचार पत्रों को फिर से शुरू करने का फैसला किया।

यंग इंडिया लिमिटेड के बारे में

यंग इंडिया लिमिटेड की स्थापना 2010 में हुई थी, जिसमें तत्कालीन कांग्रेस पार्टी के महासचिव राहुल गांधी एक निदेशक के रूप में शामिल हुए थे। जहां राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया के पास कंपनी के 76 फीसदी शेयर हैं, वहीं शेष 24 फीसदी कांग्रेस नेताओं मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस के पास हैं। कहा जाता है कि कंपनी का कोई कॉमर्शियल संचालन नहीं है।

पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण और इलाहाबाद व मद्रास उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू सहित कई शेयरधारकों ने आरोप लगाया कि जब YIL ने AJL का ‘अधिग्रहण’ किया था तब उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया था और उनके पिताओं द्वारा रखे गए शेयरों को 2010 में AJL को स्थानांतरित कर दिया गया था वो भी बिना उनकी सहमति के।

सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा नेशनल हेराल्ड मामले में किस पर आरोप लगाए गए?

स्वामी के नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीस, पत्रकार सुमन दुबे और टेक्नोक्रेट सैम पित्रोदा को नामजद किया गया है।

अब समझिए नेशनल हेराल्ड मामला

सुब्रमण्यम स्वामी का दावा है कि YIL ने 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और लाभ हासिल करने के लिए “गलत” तरीके से निष्क्रिय प्रिंट मीडिया आउटलेट की संपत्ति को “अधिग्रहित” किया।

स्वामी ने यह भी आरोप लगाया कि YIL ने 90.25 करोड़ रुपये की वसूली के अधिकार हासिल करने के लिए सिर्फ 50 लाख रुपये का भुगतान किया था, जो AJL पर कांग्रेस पार्टी का बकाया था; यह राशि पहले अखबार शुरू करने के लिए कर्ज के रूप में दी गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि AJL को दिया गया कर्ज “अवैध” था, क्योंकि यह पार्टी के फंड से लिया गया था।

2014 में, प्रवर्तन निदेशालय ने यह देखने के लिए जांच शुरू की कि क्या इस मामले में कोई मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। 18 सितंबर 2015 को, यह बताया गया कि प्रवर्तन निदेशालय ने नेशनल हेराल्ड मामले में अपनी जांच फिर से खोल दी थी।

आरोपों पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस पार्टी ने दावा किया है कि YIL को “दान के उद्देश्य से” बनाया गया था, न कि किसी लाभ के लिए। इसने यह भी दावा किया कि लेन-देन में “कोई अवैधता” नहीं थी, क्योंकि यह कंपनी के शेयरों को स्थानांतरित करने के लिए “केवल एक कॉमर्शियल लेनदेन” था। इसने स्वामी द्वारा दायर की गई शिकायत पर भी आपत्ति जताई, इसे “राजनीति से प्रेरित” करार दिया।

नेशनल हेराल्ड मामला: अब तक की कहानी

सोनिया और राहुल गांधी को 19 दिसंबर, 2015 को निचली अदालत ने इस मामले में जमानत दे दी थी। 2016 में, सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्यवाही रद्द करने से इनकार करते हुए मामले के सभी पांच आरोपियों (सोनिया, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीस और सुमन दुबे) को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी थी।

2018 में, केंद्र ने 56 साल पुराने स्थायी पट्टे को समाप्त करने और हेराल्ड हाउस परिसर से एजेएल को इस आधार पर बेदखल करने का फैसला किया कि एजेएल कोई प्रिटिंग या पब्लिकेशन गतिविधि नहीं कर रहा था, क्योंकि इसी काम के लिए बिल्डिंग को 1962 में आवंटित किया गया था। एलएंडडीओ चाहता था कि एजेएल 15 नवंबर, 2018 तक कब्जा सौंप दे। बेदखली के आदेश में दावा किया गया था कि इमारत का इस्तेमाल पूरी तरह से व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया गया था। हालांकि, 5 अप्रैल, 2019 को, सुप्रीम कोर्ट ने अगली सूचना तक सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों का निष्कासन) अधिनियम, 1971 के तहत एजेएल के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दिया।

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