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क्या श्री महाकाल लोक से मालवा-निमाड़ को साधने की कवायद में भाजपा?

बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में श्री महाकाल लोक के लोकार्पण के भव्य कार्यक्रम के जरिए भाजपा एक तरह से मध्य प्रदेश में आगामी 2023 के विधानसभा चुनावी का शंखनाद करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में श्री महाकाल लोक के लोकार्पण का भव्य कार्यक्रम ठीक उस समय हो रहा है जब पूरा प्रदेश चुनावी मोड पर चल रहा है। मध्य प्रदेश भाजपा अपने हर विधानसभा चुनाव में अपने चुनावी अभियान का आगाज बाबा महाकाल के आशीर्वाद के बाद उज्जैन में जनसभा से करती आई है।

श्री महाकाल लोक का लोकार्पण करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उज्जैन में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। चुनाव से पहले महाकाल लोक का उद्घाटन का भव्य कार्यक्रम भाजपा का बड़ा सियासी दांव माना जा सकता है। पिछले दिनों मांडू में तीन दिवसीय मंथन के बाद भाजपा श्री महाकाल लोक के लोकार्पण के जरिए मालवा-निमाड़ में भी चुनावी बिगुल फूंकने जा रही है।

श्री महाकाल लोक के जरिए भाजपा मध्य प्रदेश में हिंदुत्व के एजेंडे को नई धार देने की तैयारी में है। हिंदुत्व का एजेंडा जो 2014 बाद भाजपा की जीत की गारंटी बन गया है, वह इस लोकार्पण के जरिए एक तरह से वाइल्ड कार्ड एंट्री करने जा रहा है। यहीं कारण है लोकार्पण के कार्यक्रम को वैश्विक पटल पर लाकर भाजपा हिंदुओं के बीच साफ और सीधा संदेश देना चाह रही है।

उज्जैन में श्री महाकाल लोक के लोकार्पण कार्यक्रम से भाजपा ने  40 देशों के एनआरआई को जोड़ने जा रही है। इसके लिए बकायदा भाजपा विदेश संपर्क विभाग ने मध्य प्रदेश के एनआरआई के साथ वर्चुअल मीटिंग की थी। इस मीटिंग में श्री महाकाल लोक परिसर की भव्यता, सुंदरता और सरकार की प्रयासों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही उनको लोकार्पण कार्यक्रम से जुड़ने का आग्रह भी किया गया

मध्य प्रदेश की राजनीति में कहा जाता है कि जिस सियासी दल ने मालवा निर्माण में जीत हासिल कर ली समझो उसने सत्ता की कुर्सी पाई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नर्सरी कहलाने वाले मालवा-निमाड़ को भाजपा का गढ़ माना जाता है। मालवा-निमाड में आने वाली विधानसभा की 67 सीटों में जो पार्टी बेहतर प्रदर्शन करती है वह सत्ता में काबिज होती है।

अगर पिछले 2 विधानसभा चुनाव के मालवा-निमाड़ के नतीजों को देखा जाए तो स्थिति बहुत कुछ साफ होती है। 2013 के विधानसभा चुनाव में मालवा-निमाड़ की 57 सीटें भाजपा के खाते में गई थी और 10 सीटें कांग्रेस मो मिली थी। वहीं 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 67 सीटों में से 35 सीटों पर जीत हासिल की थी और भाजपा के खाते में केवल 28 सीटें आई थी। जिसके बाद कांग्रेस सत्ता में लौट कर आई थी। ऐसे में दुबारा भाजपा का फोकस इस रीजन पर बना हुआ है।

वहीं श्री महाकाल लोक के कार्यक्रम के गांव-गांव लाइव प्रसार की व्यवस्था सरकार के खर्चे पर की गई है। गांव के मंदिर और देवालयों में लोगों को एकत्र करके शिव भजन, पूजन, कीर्तन, अभिषेक, आरती की व्यवस्था की गई है। इसी प्रकार शहरी वार्डों के प्रमुख मंदिरों में भी धार्मिक-आयोजन होंगे।

जानकारी के अनुसार मालवा निमाड़ न केवल विधानसभा के लिहाज से अहम बल्कि लोकसभा की सबसे ज्यादा सीटें भी इसी रीजन में आती हैं। कुल 230 सीटों वाली प्रदेश विधानसभा में मालवा-निमाड़ अंचल की 66 सीटें शामिल हैं। मालवा निमाड़ में इंदौर, धार, खरगौन, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी, झाबुआ, अलीराजपुर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, शाजापुर, देवास, नीमच और आगर मालवा शामिल हैं। ऐसे में 11 अक्टूबर को उज्जैन में होने वाला पीएम मोदी का दौरा सांस्कृतिक दृष्टि से जितना अहम है, उससे कही ज्यादा उसके राजनीतिक मायने हैं।

प्रदेश की 47 विधानसभा सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं, जिनमें सबसे ज्यादा मालवा-निमाड़ में आती हैं । इसीलिए मध्य प्रदेश में तेजी से उभरा जयस नामक आदिवासी संगठन मालवा-निमाड़ में ही अपनी सबसे ज्यादा पकड़ रखता है। पिछले साल इस संगठन ने एक तरह से कांग्रेस का समर्थन किया था। जिससे बीजेपी को यहां नुकसान हुआ था। ऐसे में आदिवासी वर्ग का साथ छूटने की कमी को भाजपा फिर से भरने की तैयारी में हैं।

श्री महाकाल लोक में स्थापित मूर्तियां उसको भव्य स्वरूप प्रदान कर रही है। श्री महाकाल लोक के नाइट गार्डन में भगवान शिव की लीलाओं पर आधारित 190 मूर्तियां स्थापित की गई है। परिसर में 108 स्तंभ स्थापित किए गए हैं, जिन पर भगवान शिव एवं उनके गुणों की विचित्र मुद्राएं बनी हुई है। श्री महाकाल लोक में 18 फीट ऊंची 8 प्रतिमाएं स्थापित की गई है। इसमें नटराज, शिव पुत्र गणेश और कार्तिकेय, दत्तात्रेय अवतार,पंचमुखी हनुमान, चंद्रशेखर महादेव की कहानी शिव और सती,समुद्र मंथन के दृश्य शामिल है।

श्री महाकाल लोक में 15 फीट ऊंची 23 प्रतिमाएं है। जिनमें शिव नृत्य, 11 रुद्र, महेश्वर अवतार, अघोर अवतार, काल भैरव, शरभ अवतार, खंडोबा अवतार, वीरभद्र द्वारा दक्ष वध, शिव बारात, मणिभद्र गणेश व कार्तिकेय के साथ पार्वती, शिव, कपाल मोचक शिव शामिल है। परिसर में प्रवेश द्वार पर श्री गणेश, अर्धनारीश्वर, अष्ट भैरव, ऋषि भारद्वाज, वशिष्ठ विश्वामित्र, गौतम कश्यप, जमदग्री शामिल हैं। इन मूर्तियों में लेट गणेश, हनुमान शिव अवतार, सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती, लुकलेश, पार्वती के साथ खेलते गणेश की प्रतिमा शामिल है।

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