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एनकाउंट की रची कहानी में खुद फंस गई यूपी पुलिस, डेढ़ घंटे के अंतर से उठ रहे सवाल

पुलिस के एनकाउंटर (मुठभेड़) पर अक्सर ही सवाल खड़े होते हैं। आमने-सामने के इक्का-दुक्का एनकाउंटर को छोड़ दिया जाए, तो अपराधियों को मार गिराने की परंपरागत कहानी या पटकथा पहले ही लिख दी जाती है। ऐसा ही अजब वाकया बुधवार की सुबह भी हो गया। बदमाश की मौत की पटकथा एनकाउंटर से दो घंटे पहले ही जारी हो गई।

एनकाउंटर करने वाली टीम ने सिकंदरा थाने में जो एफआईआर दर्ज कराई, उसके मुताबिक, मुठभेड़ बुधवार की अलसुबह तीन बजकर 25 मिनट पर हुई। जख्मी हालत में बदमाश को एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया। अकबरा मार्ग से जिला अस्पताल करीब 20 किलोमीटर दूर है। रात को कोहरा अधिक था। ऐसे में एंबुलेंस को अस्पताल पहुंचने में करीब 35 मिनट लगे होंगे। पुलिस फर्द के अनुसार रात करीब चार बजे के बाद जिला अस्पताल में डॉक्टर ने बदमाश को मृत घोषित किया। एनकाउंटर से जुड़ी एसटीएफ की इस ‘साहसिक’ कहानी की पुलिस महकमे में चर्चा है। लोकल पुलिस भी साथ नहीं थी इसलिए आरोप लगाया जा रहा है कि एसटीएफ ने बदमाश को पहले से अपने पास रखा हुआ था, उसे अपनी परंपरागत कहानी में फिट कर दिया। सवाल अपराधी के एनकाउंटर पर नहीं बल्कि पटकथा पर उठाए जा रहे हैं।

13 जुलाई को गांव रूपसपुर, थाना लाइन पार (फिरोजाबाद) निवासी विनय श्रोत्रिय आगरा दीवानी से फरार हो गया था। वह गैंगस्टर एक्ट में जिला जेल में बंद था। फरारी के बाद पुलिस ने उसके मददगारों को जेल भेजा। आईजी रेंज आगरा नचिकेता झा ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। फरारी के दौरान विनय श्रोत्रिय ने मथुरा के हाईवे थाना क्षेत्र में लूट की एक वारदात को अंजाम दिया। मथुरा जिले से भी उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित हो गया। उस पर फिरोजाबाद, आगरा में हत्या के प्रयास और लूट जैसे गंभीर अपराधों के 43 से अधिक अभियोग पंजीकृत हैं।

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