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अतीक से जेल में मिलाई कराता था उस्मान छर्रा, दबंगई ऐसी कि भाईजान 786 कहकर निकलते हैं ट्रक

कौशांबी। प्रयागराज में हुए उमेश पाल हत्याकांड में एक नया नाम सामने आया है। अतीक अहमद गैंग से जुड़े उस्मान छर्रा की तलाश चल रही है। अब उसको लेकर सवाल उठने लगा है कि आखिर यह है कौन? दरअसल, उस्मान अतीक अहमद गैंग का खास सदस्य रहा है। उसने कौशांबी से अपराध की दुनिया में कदम रखा। अतीक अहमद का शागिर्द बना। अतीक के गुजरात स्थित साबरमती जेल में ट्रांसफर होने के बाद उस्मान भी पीछे-पीछे वहां पहुंचा। गुजरात में ही अपने अपराध का कारोबार फैला दिया। उसके खिलाफ गुजरात में 17 केस दर्ज होने की बात सामने आई है। उसके खिलाफ पोटा के तहत भी कार्रवाई हो चुकी है। उमेश पाल मर्डर केस में अतीक गैंग का मामला सामने आने के बाद से जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं। इस दौरान अतीक और उससे जुड़े तमाम लोगों की कुंडली खंगाली जा रही है। इस क्रम में कौशांबी के उस्मान छर्रा का मामला सामने आया है। अब उसकी तलाश में एसटीएफ और यूपी पुलिस जुटी हुई है।

उमेश पाल हत्याकांड के बाद फरार चल रहे कौशांबी के उस्मान छर्रा की तलाश अब जिले के पुलिस के साथ-साथ एसटीएफ कर रही है। उस्मान छर्रा कौशांबी के पूरामुफ्ती के हटवा का रहने वाला है। उस पर आरोप है कि साबरमती जेल में बंद माफिया डॉन अतीक अहमद के वह सीधे संपर्क में था। वह अतीक से करीबियों को मुलाकात कराता था। गुजरात में उन्हें संरक्षण देने का काम करता था। जांच एजेंसियों को इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं। बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल की प्रयागराज में गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद यूपी एसटीएफ के अलावा कौशांबी पुलिस लगातार एक्शन मोड में है।

अब्दुल कवि के खिलाफ भी कार्रवाई

कौशांबी पुलिस की ओर से राजू पाल की हत्या के मामले में कार्रवाई तेज की गई है। राजू पाल की हत्या में शूटर रहे अब्दुल कवि का घर ढहा दिया गया है। घर से अवैध शस्त्र की बरामदगी हुई है। उसके परिवार के 11 सदस्यों पर केस दर्ज करने की कार्रवाई की जा चुकी है। अब्दुल कवि के भाई को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब्दुल कवि पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है।

अब उस्मान छर्रा निशाने पर

उमेश पाल हत्याकांड के बाद अब हटवा निवासी उस्मान छर्रा भी एसटीएफ और पुलिस के निशाने पर आ गया है। जांच की जद में आए उस्मान के बारे में पुलिस को पता चला है कि वह गोकशी, कातिलाना हमल, विस्फोट आदि के आरोप में उसके खिलाफ गुजरात में 17 केस दर्ज हैं। उसने साबरमती से करीब 30 किलोमीटर दूर एक खरीद रखा है।

अतीक के मुलाकातियों के संपर्क में था उस्मान

अतीक अहमद से जेल में मिलने आने वाले और करीबियों के संपर्क में उस्मान छर्रा के रहने की बात सामने आई है। साथ ही, वह उन करीबियों को अपने फ्लैट में ठहराता था, जिनके सीधे संबंध अतीक से थे। वर्ष 2019 में कौशांबी में 40 से 45 ट्रकों की खरीद का मामला भी पुलिस के सामने आया है। इन ट्रकों की खरीद के बाद उस्मान ने बालू का धंधा शुरू किया। इसके साथ ही वह गोतस्करी में भी लग गया। उस्मान को लेकर यह भी मामला सामने आया है कि चार दिन पहले पहले कोखराज के राला और सिहोरी गांव से कादिर और अबू जैद को पकड़ने आई एसटीएफ टीम को उसकी भी तलाश थी। हालांकि, प्रयास विफल रहा। कोखराज पुलिस अभी भी उसकी तलाश कर रही है।

ट्रक को निकालने का कोड भाईजान 786

उस्मान छर्रा की जिले की पुलिस और प्रशासन में पकड़ की भी बात सामने आई है। बालू और गोतस्करी के कारोबार में लगे ट्रकों को निकालने का अपना अलग ही कोड था, यह सामने आया है। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि अगर चेकिंग के दौरान कोई भी उसकी गाड़ी को रोकता था तो भाईजान 786 कोड गाड़ी को छुड़ाने के लिए काम आता था। इस कोड के जरिए उसकी गाड़ी आसानी से पास हो जाती थी। यह कोड कौशांबी के अलावा फतेहपुर, बांदा और चित्रकूट में चर्चा में रहा है। इससे यह बात साफ हो रही है कि पुलिस और एआरटीओ विभाग के कर्मियों से उस्मान छर्रा की सांठगांठ थी। पुलिस अधिकारियों की ओर से एआरटीओ विभाग के अधिकारियों से भी उस्मान के ट्रकों की जानकारी मांगी है।

अतीक अहमद के गुर्गों के साथ पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के संपर्क की भी बात सामने आई है। खुफिया विभाग की जांच में चौंकाने वाली एक और बात सामने आई है जिले के कई पुलिसकर्मियों का संपर्क अतीक के करीबियों से रहा है। कोखराज, महेवाघाट और करारी पुलिस को संदेह के दायरे में रखते हुए जांच चल रही है। अतीक के गुर्गों के साथ कौशांबी में तैनात एक इंस्पेक्टर के प्लॉटिंग के धंधे में जुड़े रहने की बात सामने आई है।

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