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दलित-मुस्लिम… यूपी निकाय चुनाव में मायावती की नई ‘सोशल इंजीनियरिंग’

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शहर की सरकार चुनने के लिए चार और 11 मई को मतदान होने हैं. निकाय चुनाव के नतीजे 13 मई को आने हैं. निकाय चुनाव में अधिक से अधिक शहरों में जीत के लिए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पूरा जोर लगा रही है तो वहीं विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) भी बेहतर प्रदर्शन के लिए ताकत झोंक रही है. बीजेपी के साथ ही सपा और मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है.

मायावती की पार्टी ने मेयर पद के लिए कुल 17 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है. इन 17 में से 11 मुस्लिम चेहरे हैं. ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों पर भी बसपा ने मुस्लिम चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा है. बसपा ने बाकी छह में से तीन उम्मीदवार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और दो उम्मीदवार अनुसूचित जाति (एससी) के उतारे हैं.

बसपा की नई सोशल इंजीनियरिंग

बसपा ने साल 2007 के विधानसभा चुनाव में अधिक ब्राह्मणों को टिकट दिया था. तब बसपा की ये सोशल इंजीनियरिंग हिट रही थी और मायावती अपनी पार्टी को केवल बहुजनों की बजाय सर्वजन की पार्टी के रूप में पेश करने में एक हद तक सफल भी रही थीं. बसपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई लेकिन 2012 के चुनाव से बसपा का ग्राफ तेजी से गिरता चला गया. आज बसपा यूपी में एक विधायक वाली पार्टी बनकर रह गई है.

बदली परिस्थितियों में खस्ता हाल बसपा ने अब ब्राह्मणों की जगह मुस्लिम पर फोकस कर दिया है. बसपा ने निकाय चुनाव में एक भी ब्राह्मण चेहरे को टिकट न देकर साफ कर दिया है कि पार्टी अपनी हालत सुधारने के लिए नई सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले पर आगे बढ़ेगी. ब्राह्मण-दलित समीकरण के हिट फॉर्मूले के बाद बसपा अब मुस्लिम-दलित समीकरण का निकाय चुनाव में टेस्ट कर रही है. मायावती के इस प्रयोग को 2024 के लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है.

सामान्य वर्ग को एक केवल एक टिकट

मायावती की पार्टी ने इस बार सामान्य वर्ग के केवल एक उम्मीदवार को टिकट दिया है. बसपा ने गोरखपुर से नवल किशोर नथानी को उम्मीदवार बनाया है जो अग्रवाल (बनिया) बिरादरी से आते हैं. ये बिरादरी सामान्य वर्ग में आती है. मायावती ने अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित आगरा नगर निगम और आरक्षित सीट झांसी नगर निगम से ही दलित चेहरों को मैदान में उतारा है. आगरा में लता तो झांसी में भगवान दास फुले बसपा के उम्मीदवार हैं.

महापौर चुनाव के लिए बसपा ने

बसपा ने कानपुर से ओबीसी नेता अर्चना निषाद, अयोध्या से राममूर्ति यादव और वाराणसी से सुभाष चंद्र मांझी को उम्मीदवार बनाया है. ओबीसी के लिए आरक्षित चार मेयर सीटों पर बसपा ने मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है. इनमें सहारनपुर से खदीजा मसूद, मेरठ से हसमत अली, शाहजहांपुर से शगुफ्ता अंजुम और फिरोजाबाद से रुखसाना बेगम के नाम शामिल हैं.

बसपा ने महिलाओं के लिए आरक्षित तीन मेयर पद में से दो पर भी मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारा है. पार्टी ने गाजियाबाद में निसारा खान और लखनऊ में शाहीन बानो को उम्मीदवार बनाया है. वहीं, सामान्य श्रेणी की सीटों पर मैदान में उतरे अन्य मुस्लिम उम्मीदवारों में अलीगढ़ से सलमान शाहिद, बरेली से यूसुफ खान, मथुरा से रजा मोहतासिम अहमद, प्रयागराज से सईद अहमद और मुरादाबाद से मोहम्मद यामीन के नाम शामिल हैं.

क्या दावे कर रहे बसपा के नेता?

बसपा नेताओं का दावा है कि दलित-मुस्लिम गठजोड़ से बसपा को फायदा मिलेगा. पार्टी के नेता दलित-मुस्लिम फॉर्मूले को सपा के मुस्लिम-यादव से भी कहीं अधिक मजबूत बता रहे हैं. बसपा नेता मायावती सरकार की ओर से मुस्लिमों के बीच जाकर उनके लिए लागू की गईं कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही ये भी बता रहे हैं कि उस समय किस तरह से उनको सत्ता में भी भागीदारी दी गई थी.

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