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ममता के रहते राहुल का येचुरी के साथ फुस-फुस, ये तस्वीर बहुत कुछ कहती है

नई दिल्‍ली। विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A के घटक दलों के शीर्ष नेताओं ने आज यहां बैठक की। इस दौरान अगले लोकसभा चुनाव के लिए कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें सीट शेयरिंग, साझा जनसभा और नए सिरे से स्‍ट्रैटेजी बनाना शामिल था। गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीट शेयरिंग की गुत्‍थी को सुलझाना है। घूम-फिरकर यहीं पर पूरी गाड़ी अटक जाती है। उसकी वजह भी है। उनमें सबसे बड़ी है हितों का टकराव। गठबंधन में शाम‍िल कुछ दल एक-दूसरे के जानी-दुश्‍मन हैं। इन्‍होंने एक-दूसरे से लड़कर अपनी पिच तैयार की है। ऐसे में निकले दांतों को बैठाना आसान नहीं है। दूसरी तरफ कांग्रेस खुद को दोबारा खड़ा करने की फिराक में है। स्‍थानीय दल उसे खेलने के लिए ज्‍यादा मैदान देकर अपनी सालों की मेहनत पर पानी नहीं फेर सकते। इस द्वंद्व को मैनेज करते ही सारे रास्‍ते खुलने हैं। लेकिन, यही सबसे बड़ा पेच भी है।

मंगलवार को दिल्‍ली में विपक्षी गठबंधन की बैठक से कई दिलचस्‍प तस्‍वीरें सामने आईं। इनसे अलग-अलग दलों की केमिस्‍ट्री का कुछ अनुमान लगाया जा सकता है। ऐसी ही एक दिलचस्‍प तस्‍वीर थी राहुल गांधी, ममता बनर्जी और सीताराम येचुरी का एक फ्रेम में होने की। बैठक में राहुल के दाएं हाथ पर ममता बैठी थीं। वहीं, बाएं हाथ पर सीताराम येचुरी। तस्‍वीर में राहुल लेफ्ट की ओर झुककर येचुरी से चुपचाप कुछ बोल रहे हैं। दोनों की इस गुपचुपबाजी से अलग ममता कुछ लिखने में बिजी हैं। क्‍या कोई बड़ी ‘स्‍क्रिप्‍ट’? कोई नहीं जानता है। जो हम सब जानते हैं वह यह है कि ममता वही हैं जिन्‍होंने बंगाल को वाम दलों की गिरफ्त से निकालने के लिए सालों लंबी लड़ाई लड़ी। टीएमसी और लेफ्ट एक-दूसरे के जानी-दुश्‍मन हैं। दोनों एक-दूसरे को मिट्टी में मिला देने की चाहत रखते हैं।

दो व‍िरोधियों में कांग्रेस की एंट्री!
I.N.D.I.A गठबंधन की नींव पड़ने वाले दिन से ही इसके भविष्‍य पर सवाल रहे हैं। उसकी सबसे बड़ी वजह यही है। इस गठबंधन में कई ‘जानी-दुश्‍मन’ साथ बैठे हैं। वाम दल और तृणमूल कांग्रेस भी उन्‍हीं में हैं। इन दो दुश्‍मनों को कांग्रेस अपने हिसाब से साधती रही है। इस समय कांग्रेस का पलड़ा लेफ्ट की तरफ झुका दिख रहा है। इसकी वजह ममता बनर्जी के तेवर हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बंपर जीत दर्ज करने के बाद से ही ममता बनर्जी कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमलावर हो गई थीं। यहां तक उन्‍होंने राहुल की नेतृत्‍व क्षमता पर भी सवाल उठाए थे। यह सही है कि हिमाचल और कर्नाटक की जीत के बाद राहुल को लेकर ममता के तेवर हल्‍के नरम पड़े थे। लेकिन, दोबारा अब वही रुख दिखने लगा है।

पहले आपको मानसिक रूप से तैयार होना होगा, सैद्धांतिक रूप से सहमत होना होगा, फिर हो सकता है कि एक, दो राजनीतिक दल सहमत न हों, लेकिन अधिकांश राजनीतिक दल एक-एक करके सीट बंटवारे के लिए सहमत होते हैं, तो अपने आप सभी एक साथ आ जाएंगे।
ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री

नई दिल्ली में विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A की बैठक से एक दिन पहले यानी सोमवार को तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस से अपनी ‘जमींदारी संस्कृति’ को छोड़ने को कहा। पार्टी ने अपील की कि ममता बनर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं को गठबंधन के चेहरे के तौर पर पेश करने की दिशा में काम करना चाहिए। टीएमसी और कांग्रेस दोनों ही इस गठबंधन में शामिल हैं। ममता ने 2024 लोकसभा चुनाव के बाद गठबंधन की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम घोषित करने की वकालत की है।

बैठक की टाइमिंग देखनी होगी
नई दिल्‍ली में हुई बैठक की टाइमिंग बेहद अहम है। यह बैठक हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में हुई है। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। यानी अब गेम पूरी तरह से बदल चुका है। अगर कांग्रेस विधानसभा चुनावों में अच्‍छा करती तो शायद बात कुछ और होती। लेकिन, फीके प्रदर्शन के बाद गठबंधन में क्षेत्रीय दलों की आवाज मुखर रहेगी। बंगाल में कांग्रेस की मौजूदगी न के बराबर है। राज्‍य में उसकी सिर्फ दो सीटें हैं। यही वजह है कि अंदर और बाहर दोनों तरफ से टीएमसी दबाव की टैक्टिस अपना रही है।

विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद कांग्रेस को सबक लेना चाहिए। उसे ‘जमींदारी संस्कृति’ को त्यागना होगा। पार्टी अपने साझेदारों के साथ प्रजा की तरह व्यवहार नहीं कर सकती। यह सुनिश्चित करने के लिए कि विपक्षी गठबंधन की जीत हो, कांग्रेस को तीन बार की मुख्यमंत्री और तीन बार की केंद्रीय मंत्री ममता बनर्जी और अन्य वरिष्ठ नेताओं को गठबंधन का चेहरा बनाना होगा।

तृणमूल कांग्रेस

कांग्रेस को खरी-खोटी सुनाने में लगी टीएमसी
टीएमसी कांग्रेस को खरी-खोटी सुनाने में लगी है। बीते रोज ही उसने कहा कि राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद कांग्रेस को इससे सबक लेना चाहिए। उसे ‘जमींदारी संस्कृति’ को त्यागना होगा। पार्टी अपने साझेदारों के साथ अपनी प्रजा की तरह व्यवहार नहीं कर सकती। यह सुनिश्चित करने के लिए कि I.N.D.I.A गठबंधन की जीत हो, कांग्रेस को तीन बार की मुख्यमंत्री और तीन बार की केंद्रीय मंत्री ममता बनर्जी और अन्य वरिष्ठ नेताओं को गठबंधन का चेहरा बनाना होगा। कांग्रेस बार-बार बीजेपी को हराने में विफल रही है। दूसरी ओर ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के पास कई बार बीजेपी को हराने का रिकॉर्ड है। टीएमसी के बयान से कांग्रेस लाल हो गई। उसने तुरंत इस पर प्रतिक्रिया दी। उसने कहा कि हमें बीजेपी के खिलाफ कैसे लड़ना है, इस बारे में टीएमसी से सबक लेने की जरूरत नहीं है। यह कांग्रेस है जो लगातार बीजेपी के खिलाफ लड़ रही है। जबकि टीएमसी ने कई मौकों पर बीजेपी के साथ समझौता किया है। टीएमसी 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के खिलाफ एक विश्वसनीय चुनौती पेश करने के लिए सीट-बंटवारे की बातचीत में तेजी लाने, सामूहिक विमर्श खड़ा करने और घोषणापत्र को अंतिम रूप देने के लिए उत्सुक है।

ममता कर सकती हैं खेला!
विपक्षी ब्‍लॉक खासतौर से कांग्रेस को एक डर यह भी सता रहा है कि कहीं ममता अंत समय में कोई खेला न कर दें। उन्‍होंने अपने रास्ते खोलकर रखे हुए हैं। अपने दिल्‍ली कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की बात कहकर ममता ने इस सुगबुगाहट को और बढ़ा दिया है। ममता कह चुकी हैं कि 20 दिसंबर को सुबह 11 बजे वह कुछ सांसदों के साथ पीएम मोदी से भी मिलेंगी। फिर वापस चली जाएंगी। ममता राजनीति के खेल में बहुत माहिर हैं। वह पहले बीजेपी के साथ गठबंधन में रह चुकी हैं। कांग्रेस के नेतृत्‍व वाले ब्‍लॉक में भी रही हैं। अपने हितों को देखकर समय-समय पर उन्‍होंने अपने साथी बदले हैं। राहुल ‘लेफ्ट’ की तरफ ज्‍यादा झुके तो ममता के पास ‘राइट’ मूव लेने का विकल्‍प हमेशा खुला है!

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