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OBC नेता, जाटलैंड में मजबूत पकड़… कौन हैं हरियाणा के नए सीएम बनने जा रहे नायब सिंह सैनी?

नायब सिंह सैनी हरियाणा के नए सीएम बनने जा रहे हैं.लोकसभा चुनाव से पहले हरियाणा सरकार में संशय के बादल छंटने लगे हैं. खबर है कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नायब सिंह सैनी हरियाणा के नए मुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं. वे आज शाम 5 बजे शपथ लेंगे. इससे पहले मंगलवार को दिनभर हरियाणा में सियासी उथल-पुथल देखने को मिला. पहले बीजेपी और जेजेपी गठबंधन टूटा. उसके बाद मनोहर लाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. उसके बाद बीजेपी विधायक दल की बैठक शुरू हुई और पर्यवेक्षक बनाकर चंडीगढ़ भेजे गए अर्जुन मुंडा और तरुण चुघ ने नई सरकार की कवायद तेज कर दी. आइए जानते हैं कौन हैं नायब सिंह सैनी…

नायब सिंह सैनी पिछड़ा वर्ग से आते हैं. वे अक्टूबर 2023 में ही हरियाणा के नए प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए थे. यानी 5 महीने बाद ही वे सीएम की कुर्सी की रेस तक पहुंच गए हैं. कहा जा रहा है कि बीजेपी ने राजनीतिक समीकरण को ध्यान में रखकर सैनी को एक और बड़ी जिम्मेदारी देने का फैसला लिया है. सैनी ओबीसी समुदाय से आते हैं और खट्टर के बेहद करीबी माने जाते हैं.

‘खट्टर सरकार में मंत्री रहे हैं नायब सिंह’

नायब इस समय कुरुक्षेत्र से सांसद हैं. वे 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले विधायक भी रहे हैं.  2014 में नायब सिंह ने अंबाला जिले की नारायणगढ़ सीट से विधानसभा चुनाव जीता था. ये चुनाव नायब 24 हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे. बाद में खट्टर सरकार में मंत्री बनाए गए. जब 2019 का चुनाव आया तो पार्टी ने नायब को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी और कुरुक्षेत्र से टिकट देकर चौंका दिया था. तब भी नायब सिंह संगठन के भरोसे पर खरे उतरे. 2019 के लोकसभा चुनाव में नायब को 6 लाख 88 हजार 629 वोट मिले. उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस उम्मीदवार निर्मल सिंह आधे वोट भी नहीं पा सके. निर्मल को 3 लाख 4 हजार 38 वोट मिल सके थे.

‘नए फॉर्मूले के साथ चुनावी मैदान में दिखेगी बीजेपी?’

हरियाणा में अब तक जाट प्रदेश अध्यक्ष और नॉन जाट सीएम का फॉर्मूले चला आ रहा है. लेकिन, अक्टूबर 2023 में बीजेपी ने हरियाणा में पुराने मिथक को तोड़ा और नया बदलाव किया. बीजेपी ने जाट की बजाय पूरे ओबीसी समुदाय को साधने के लिए नायब सिंह सैनी को आगे करने की रणनीति बनाई. बता दें कि खट्टर पंजाबी खत्री समाज से ताल्लुक रखते हैं.

‘9 साल पहले विधायक… अब सीएम बने नायब’ 

नायब सिंह सैनी (53 साल) 2014 में मुख्य धारा की राजनीति में आए थे और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 9 साल के दरम्यान पहले विधायक बने, फिर राज्य सरकार में मंत्री, उसके बाद लोकसभा सांसद और अक्टूबर 2023 में हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए. और 5 महीने बाद ही नायब को सीएम के रूप में सबसे बड़ी जिम्मेदारी मिल गई है.

‘खट्टर के करीबी हैं नायब सिंह सैनी’ 

सैनी को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का भी विश्वासपात्र माना जाता है. संगठन में भी सैनी की पकड़ मानी जाती है. जब सैनी 2019 में सांसद बने तो बीजेपी ने ना सिर्फ हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी, बल्कि पार्टी उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से विपक्ष के प्रत्याशियों को पटखनी दी थी. 

‘ओबीसी समुदाय को मिली तवज्जो’

सैनी को प्रदेश अध्यक्ष के बाद सीएम बनाने के लिए कई मसलों को ध्यान में रखा गया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार जातिगत आरक्षण का मुद्दा उठा रहे हैं और ओबीसी समुदाय को लेकर बीजेपी की घेराबंदी करने में लगे हैं. हरियाणा में ओबीसी समुदाय का दबदबा है. खासतौर पर जाटलैंड में बीजेपी अपनी पकड़ को ढीला नहीं होने देना चाहती है. सैनी जिस कुरुक्षेत्र सीट से सांसद है, वहां जाट वोटर्स की संख्या सबसे ज्यादा है. यही वजह है कि पार्टी ने कम समय में ज्यादा पॉपुलर्टी पाने वाले नायब सिंह सैनी को सबसे बेहतर चेहरा माना. इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि खट्टर की पसंद का भी ख्याल रखा गया है.

सामने दो चुनाव की बड़ी परीक्षा?

कुछ ही दिन बाद देश में आम चुनाव की तारीखों का ऐलान होने वाला है. उसके बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं. यानी कुछ ही महीने में हरियाणा में दो चुनाव में वोटिंग होनी है और बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती यही है कि वो अपना प्रदर्शन दोहराए. 2019 के चुनाव में बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया था और सभी 10 लोकसभा सीटें थीं. सैनी ऐसे समय में सीएम बनाए गए हैं, जब बीजेपी सरकार एंटी इनकम्बेंसी से जूझ रही है. हाल ही में हिसार से बीजेपी सांसद बृजेंद्र सिंह ने पार्टी छोड़ दी है और वो कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. ऐसे में नायब के सामने संगठन और सरकार दोनों में संतुलन बनाने की चुनौती होगी. हरियाणा में सैनी जाति की आबादी करीब 8% मानी जाती है. कुरूक्षेत्र, यमुनानगर, अंबाला, हिसार और रेवाड़ी जिलों में अच्छी खासी संख्या है.

‘जाट समाज पर रहती है हर दल की नजर’ 

2023 में पहलवानों की नाराजगी ने भी हरियाणा की राजनीति को प्रभावित किया है. ऐसे में बीजेपी की नजर अब नॉन जाट वोटों पर है. जाट समुदाय की राज्य में करीब 25% आबादी है. चुनाव में यह समाज किंगमेकर की भूमिका में देखा जाता है. बीजेपी से लेकर कांग्रेस तक जाट समाज को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं. हरियाणा सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में पिछड़ा वर्ग की आबादी 31 प्रतिशत है. जबकि अनुसूचित जाति की संख्या 21 फीसदी है.

क्यों टूट गया बीजेपी और जेजेपी का अलायंस?

इससे पहले आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक सीटों के बंटवारे पर बीजेपी और जेजेपी का गठबंधन टूटा है. सोमवार देर रात हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर भिवानी महेंद्रगढ़ और हिसार की सीट मांगी थी. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी आलाकमान ने दुष्यंत चौटाला से कह दिया था कि इसके बारे में उन्हें आगे बताया जाएगा. फिलहाल, मंगलवार को जब चंडीगढ़ में बीजेपी विधायकों के साथ निर्दलीय विधायकों की बैठक बुलाई गई तो गठबंधन में शामिल जेजेपी विधायकों को नहीं बुलाया गया. उसके बाद दुष्यंत चौटाला ने अपने विधायकों की दिल्ली के फार्महाउस में बैठक बुलाई है.

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