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NRC पर ममता के तेवरों से सकते में कांग्रेस, जुटी डैमेज कंट्रोल में

नई दिल्ली। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (NRC) के मसले टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने ‘सिविल वॉर’ की आशंका जता दी तो कांग्रेस सकते में आ गई. कांग्रेस को लगता है कि  बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पहले राज्यसभा में अपने बयान से फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मसले को आगे कर देशभर में हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण करने की कोशिश की. पार्टी मानती है कि ममता के आक्रामक तेवरों ने ही अमित शाह को ये मौका दे दिया.

कांग्रेस के आला सूत्र मानते हैं कि ममता को तो बंगाल में इस रुख से कोई दिक्कत नहीं, लेकिन बंगाल समेत बीजेपी इससे देश भर में सियासी फायदा उठाने के लिए हर हथकंडा अपनाएगी.  दरअसल, कांग्रेस ने रणनीति बनाई थी कि इस मुद्दे पर आक्रामक नहीं होना है, बल्कि इसको लागू करने में आ रही खामियों को लेकर सवाल उठाए जाएं. साथ ही वो कहती रही कि राजीव गांधी ने समझौते पर दस्तखत किए थे. मनमोहन सिंह सरकार के वक्त सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ये शुरू हुआ, इसलिए कांग्रेस इसके खिलाफ नहीं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कुछ इसी तर्ज पर फेसबुक पेज पर अपना स्टैंड भी लिख दिया.

केंद्र की सियासत के मद्देनजर ममता के बयान का बंगाल और असम कांग्रेस से कराया गया विरोध-

ममता के NRC पर रुख ने कांग्रेस को मजबूर कर दिया क़ि, वो अपना पक्ष ममता से अलग रखे. केंद्रीय स्तर पर ऐसा करने से दोनों दलों के रिश्तों पर असर पड़ता इसलिए मंगलवार देर शाम कांग्रेस के रणनीतिकारों ने असम और बंगाल में पार्टी यूनिटों से ममता से अलग स्टैंड लेने को कहा. बता दें कि बुधवार को ही ममता, सोनिया और राहुल की 10 जनपथ पर मीटिंग तय है. पहले बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी और फिर असम कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा ने ममता के बयानों से खुद को अलग किया. रिपुन बोरा ने तो यहां तक कह दिया क़ि, ममता का ये बयान आत्मघाती साबित होगा.

इसके बाद कांग्रेस के दो बड़े रणनीतिकार अहमद पटेल और ग़ुलाम नबी आजाद ने इसी मसले पर ममता के 10 जनपथ जाने से पहले संसद भवन में उनसे मुलाकात की. सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने ममता से पार्टी की चिंता जाहिर की और बीजेपी को सियासी फायदा उठाने का मौका नहीं मिले इसका ख्याल रखने की गुज़ारिश भी की.

राहुल से जाकर मिलने से ममता का परहेज, सोनिया के घर पर ममता से मुलाकात में ही राहुल रहेंगे मौजूद-

ममता ने दिल्ली आकर जो तेवर अपनाये, उससे ऐसा सन्देश गया कि, यही पूरे विपक्ष की राय है. इसके बाद कांग्रेस बैकफुट पर आ गई. एक तरफ खुद राहुल पीएम पद के लिए ममता को समर्थन देने से गुरेज नहीं करने की बात कर चुके हैं. सोनिया नहीं अब राहुल कांग्रेस अध्यक्ष हैं. इसके बावजूद ममता दिल्ली आने पर यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी से मिलने ‘10, जनपथ’ ही जा रही हैं. हालाँकि वहां राहुल भी मौजूद रहेंगे, जिस पर ममता को ऐतराज नहीं है. साफ़ है कि, अभी भी ममता राहुल के बजाए सोनिया को कांग्रेस की शीर्ष नेता मानती हैं.

हालांकि, कांग्रेस को इससे फिलहाल दिक्कत नहीं है. पार्टी रणनीतिकारों को लगता है कि सोनिया के नाम पर ही सही अगर ममता जैसी तेवरों वाली नेता विपक्षी पाले में कांग्रेस के साथ जुड़ी रहें, वो वक्त के साथ विपक्षी एकजुटता की जरूरत है. इसीलिए राहुल ने ममता के हक़ में बयान भी दिया.

ममता बुधवार शाम को ही आम आदमी पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी मिलने वाली हैं. ममता के इस दिल्ली दौरे का अहम मकसद तमाम विपक्षी नेताओं को अगले साल 19 जनवरी को होने वाली अपनी बड़ी रैली के लिए न्योता देना है.

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