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इंदिरा गांधी हत्याकांड में आरके धवन भी शक के घेरे में आए थे

कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता आरके धवन का सोमवार को दिल्ली में निधन हो गया. वे 81 साल के थे. आरके धवन इंदिरा गांधी के निजी सचिव थे और उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री के करीबियों में गिना जाता था. वे कुछ समय से बीमार चल रहे थे. इसके चलते उन्हें पिछले महीने कांग्रेस कार्यकारिणी में भी शामिल नहीं किया गया था.

आरके धवन ने 1962 में इंदिरा गांधी के कार्यालय में काम करना शुरू किया था. वे सरकार और पार्टी में अहम पदों पर रहे. आपात काल के दौरान उन्हें इंदिरा गांधी के आंख-कान कहा जाता था. बताया जाता है कि इस दौरान होने वाली प्रशासनिक नियुक्तियों पर भी उनका असर रहता था. हालांकि इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद उनका यह रसूख जाता रहा. राजीव गांधी ने उन्हें सभी अहम पदों से हटा दिया.

आरके धवन ने हमेशा इंदिरा गांधी और आपातकाल का बचाव किया. उन्होंने कहा था कि इतिहास उनके साथ न्याय नहीं कर रहा है. वे आपातकाल के दौरान हुए अन्याय के लिए संजय गांधी को दोषी ठहराते थे. बाद में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद आरके धवन को जेल भी जाना पड़ा, क्योंकि उन्होंने इंदिरा के खिलाफ गवाही देने से इनकार कर दिया था. धवन से जुड़ी जानकारियों से पता चलता है कि उन्हें इंदिरा गांधी के साथ तिहाड़ जेल में रखा गया था.

आरके धवन 31 अक्टूबर, 1984 को इंदिरा की हत्या होने तक उनके साथ रहे. वे इस हत्याकांड के गवाह थे. जिस समय इंदिरा गांधी ब्रिटिश अभिनेता और नाटककार पीटर उस्तिनोव को इंटरव्यू देने के लिए जा रही थीं और तभी उनके दो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें निशाना बनाया था, उस समय धवन इंदिरा के साथ ही थे.

इंदिरा गांधी हत्याकांड में उनकी भूमिका भी शक के घेरे में आई थी. इस हत्याकांड की जांच कर रहे जस्टिस ठक्कर आयोग ने कहा था कि धवन ने हत्याकांड से जुड़े सवालों के जो जवाब दिए हैं वे अविश्वसनीय लगते हैं और इस लिहाज से इसमें उनकी भी भागीदारी हो सकती है. हालांकि कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज कर दिया था.

अतीत को लेकर आरके धवन हमेशा शांत ही रहे. माना जाता है कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया होता तो 70 से 80 के दशक की राजनीति से जुड़ी कई विस्फोटक जानकारियां सामने आ सकती थीं. आरके धवन पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के कार्यकाल में शहरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे. दो बार राज्यसभा सांसद रहने के अलावा वे 1996-99 और 2003-04 में कांग्रेस के महासचिव भी रहे. उनके निधन पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, ‘कांग्रेस पार्टी के आदर्शों प्रति उनकी (आरके धवन) अथक भावना, अतुल्य प्रतिबद्धता और समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा.’

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