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₹1000 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग, चीनी शेल कंपनियों के नाम पर अकाउंट, जासूसी नेटवर्क: चार्ली पेंग की दलाई लामा पर भी थी नजर

नई दिल्ली। 1000 करोड़ रुपए के हवाला घोटाले के आरोपित चार्ली पेंग के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है। चार्ली पेंग चीन का रहने वाला है और उसका असली नाम लुओ सैंग है। जाँच एजेंसियों को पता चला है कि चार्ली पेंग दिल्ली में कुछ लामाओं के संपर्क में था। पेंग के मामले की जाँच कर रही एजेंसियों को शक है कि वह बौद्ध धर्म के सर्वोच्च गुरु दलाई लामा और उनके सहयोगियों की जानकारी जुटा रहा था।

शुरुआती जाँच में पता चला है कि चार्ली पेंग ने दिल्ली में मजनू का टीला में कुछ लामाओं और अन्य व्यक्तियों को पैसे दिए थे। निगरानी से बचने के लिए, पेंग ने बातचीत करने के लिए चीनी एन्क्रिप्टेड एप्लिकेशन ‘वी चैट’ का इस्तेमाल करता था। 29 जुलाई को भारत सरकार ने सुरक्षा और गोपनीयता के मुद्दों का हवाला देते हुए 59 चीनी एप्स को प्रतिबंधित कर दिया था।

भारत में रहकर हवाला रैकेट चला रहा चार्ली पेंग एक जासूसी नेटवर्क का भी हिस्‍सा था। उसने अन्‍य चीनी नागरिकों के साथ मिलकर चीनी शेल कंपनियों के नाम से बैंक खाते खोले और करीब 1000 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की।

फिलहाल इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट से लेकर कई एजेंसियाँ उससे पूछताछ कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पूछताछ में पेंग ने खुलासा किया है कि चीनी खुफिया एजेंसियों ने उसके जरिए दिल्‍ली में निर्वासन में रह रहे तिब्‍बतियों को घूस देने की कोशिश की।

चीनी एजेंसियों के निशाने पर मजनू का टीला में रहने वाले लामा और भिक्षु थे। पेंग ने सीधे पैसा नहीं दिया लेकिन अपने ऑफिस स्‍टाफ के जरिए रकम भिजवाता रहा। जिन लोगों को पैसा दिया गया, उनकी पहचान अभी नहीं हो सकी है। पेंग का दावा है कि उसके स्‍टाफ ने जिन पैकेट्स में पैसे दिए, उनमें 2 से 3 लाख रुपए थे। 2014 के बाद से पेंग ने दिल्‍ली और हिमाचल प्रदेश में दलाई लामा की टीम में भी घुसपैठ करने की कोशिश की थी।

पेंग ने पूछताछ में बताया कि उसने पहली बार 2014 में भारत में कदम रखा था। चार्ली पेंग ने दिल्ली में सबसे पहले नूडल्स का कारोबार शुरू किया और इसमें आगे बढ़ते हुए बड़े हवाला रैकेट तक जा पहुँचा। पेंग को पहली बार साल 2018 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था। हालाँकि कुछ दिन बाद वह जमानत पर रिहा हो गया था। इस बार उसे फिर गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि चार्ली पेंग 2009 में 6 तिब्बतियों के साथ पैदल नेपाल गया था। नेपाल में वह 2009 से 2014 तक काठमांडू के पास गेलुग मठ में रहा। पेंग ने वहाँ अपना औषधि और जड़ी-बूटियों का कारोबार शुरू किया था। इस काम में उसे अच्छी कमाई हुई। मठ में रहने के दौरान वहाँ के कुछ लोगों ने उसे भारत जाने का सुझाव दिया। उसे सुझाव में बताया गया कि वहाँ वह अच्छा पैसा कमा सकता है।

इसके बाद चार्ली पेंग साल 2014 में बस से काठमांडू से नई दिल्ली के मजनू का टीला आ गया। मजनू का टीला इलाके में वह पंजाबी बस्ती में रहा। नेपाल मठ और वहाँ के दस्तावेजों के आधार पर उसने तिब्बती आई कार्ड हासिल कर लिया था।

चार्ली पेंग का दिल्ली में धीरे-धीरे कारोबार बढ़ा और उसने द्वारका में एक फ्लैट ले लिया। इसके बाद एक दलाल के माध्यम से उसने भारतीय आधार कार्ड और पैन कार्ड भी बनवा लिए। बाद में चार्ली पेंग द्वारका से गुरुग्राम शिफ्ट हो गया। अब हवाला नेटवर्क का पता चलने के बाद पुलिस उससे और भी कई मामलों में पूछताछ कर रही है।

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