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पायलट की चुप्पी तूफान से पहले की शांति, क्या हो सकता है सचिन का कदम?

राजस्थान में सियासी खींचतान के बीच गहलोत कैंप अपनी जिद पर अड़ा लेकिन पायलट कैंप के नेता खामोश है। राजनीतिक विश्लेषक इससे सचिन पायलट की तूफान से पहले की शांति मान रहे हैं। चर्चा है कि इस बार सचिन पायलट झुकने लिए तैयार नहीं है। पायलट कैंप के विधायक सोनिया गांधी से नए संकेत के बाद गहलोत कैंप से आरपार की लड़ाई का ऐलान कर सकता है। फिलहाल कांग्रेस आलाकमान ने गहलोत और पायलट को दिल्ली बुलाया है।

जानकारों का कहना है कि राजस्थान के घटनाक्रम से पार्टी आलाकमान गहलोत से नाराज है। ऐसे में गहलोत को दो टूक पायलट को स्वीकार करने के लिए कह दिया जाएगा। इसके बाद भी गहलोत कैंप के विधायक नहीं मानते हैं तो पायलट वर्ष 2020 की बगावत को दोहरा सकते हैं। हालांकि, सचिन पायलट समर्थक ऐसा करने से इंकार कर रहे हैं। गहलोत कैंप के 76 विधायकों ने स्पीकर सीपी जोशी को इस्तीफा सौंपा है। निर्दलीय विधायकों समेत कांग्रेस को कुल 120 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। निर्दलीय 13 विधायक है। गहलोत समर्थक माने जाते हैं। बाकि बचे विधायक कैंप माने जाते हैं। कांग्रेस विधायक दल की बैठक 19 अक्टूबर के बाद होगी। ऐसे में पायलट कैंप के कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव होने तक खामोश रहेंगे।

बीजेपी नेता कर रहे हैं पायलट की तारीफ 

राजस्थान बीजेपी के नेता पिछले 6 महीने से सचिन पायलट की तारीफ करने से नहीं चूक रहे हैं। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से लेकर नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया पायलट की ताऱीफ करने से नहीं थक रहे हैं। शेखालत ने यहां तक कह दिया था कि पायलट से थोड़ी चूक हो गई इसलिए मध्यप्रदेश जैसे हालात नहीं बन पाए। लेकिन माना जा रहा है कि इस बार पायलट चूक नहीं करेंगे। सचिन पायलट  राजस्थान में गहलोत सरकार को गिराने से नहीं चूकेंगे। बीजेपी सचिन पायलट को बाहर से समर्थक कर सकती है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में पायलट कैंप के 20 विधायक पहुंचे थे। जबकि बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए 6 विधायकों ने गहलोत कैंप की बैठक में जाने से इंकार कर दिया। ऐसे में माना जा रहा है कि पायलट को इस बार अपने धुर विरोधी बसपा मूल के 6 विधायकों का साथ मिलेगा। वैसे सचिन पायलट जिस तरह से अड़े, उससे ये संकेत भी गया है कि अब वे बेहद कांफिडेंट भी हो चुके हैं।

पायलट कैंप नए सिरे से बना रहा रणनीति 

आपकों बता दें पिछले दो सालों में जब भी कोई सवाल किया जाता है। उनका एक ही जवाब होता है, 2023 में कांग्रेस को जिताना ही हमारा उद्देश्य है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या सचिन पायलट का ये बयान कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा भरने के लिए दिया जाता है या अपने उपर उठने वाले हर उस सवाल जो उनको असहज करता हो, उन सवालों को टालने के लिए ये बयान दिया जाता है। राजस्थान कांग्रेस इस समय गुटबाज़ी का शिकार है और सचिन पायलट ने बार-बार अशोक गहलोत के नेतृत्व को चुनौती दी है। सचिन पायलट ने कोच्चि में मीडिया से बात करते हुए कहा था कि मुझे पार्टी नेतृत्व जहां भी काम करने को कहेगा वहां काम करुंगा। मैं अपनी गर्दन नीचे करके पार्टी के लिए काम कर रहा हूं। पायलट ने कहा कि जनता ही जज है। वो सब सुन और देख रही है कि हम क्या कर रहे है और क्या बोल रहे है। पायलट के बयानों से साफ जाहिर है वह सधे हुए कदमों से रणनीति बना रहे हैं।

पायलट 2020 का इतिहास दोहरा सकते हैं 

राजस्थान में एक बार 2020 जैसे सियासी संकट के हालात पैदा हो गए है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान में जून 2020 में उस वक्त सियासी संकट के हालात पैदा हुए थे। जब सचिन पायलट समेत 19 कांग्रेसी विधायकों ने बागी तेवर अपनाते हुए दिल्ली से सटे गुड़गांव के मानेसर में डेरा डाल दिया था। राजस्थान की कांग्रेस सरकार अस्थिर हो गई थी। करीब सवा महीने तक विधायकों के साथ मुख्मयंत्री अशोक गहलोत ने होटलों में डेरा जमाए रखा। राजस्थान में इस बार गहलोत कैंप के विधायक ने पायलट जैसे कदम उठाएं है।

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