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UN चुनाव के रनर अप से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव तक… शशि थरूर की कहानी

नई दिल्ली। एक 2007 का वो चुनाव था, एक 2022 का ये चुनाव है. शशि थरूर तब भी रनर अप रहे थे. इस बार भी समीकरण, कयास और बयानबाजियों से पता चलता है कि वो रनर अप ही रहेंगे. 2007 में शशि थरूर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव पद के लिए भारत के आधिकारिक उम्मीदवार थे. 7 उम्मीदवारों में थरूर दूसरे नंबर पर रहे, इस चुनाव में जीत मिली दक्षिण कोरियाई डिप्लोमैट बान की मून को.  इस चुनाव के बाद थरूर के करियर ने नई राह पकड़ी और देश की सक्रिय राजनीति में आ गए. 15 सालों के बाद थरूर एक बार फिर से एक महत्वपूर्ण चुनाव लड़ रहे हैं. ये चुनाव देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को 24 साल बाद एक नॉन-गांधी अध्यक्ष देने जा रहा है.

शशि थरूर कांग्रेस के इसी अध्यक्ष चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने उतरे हैं. अबतक के घटनाक्रम पर नजर डालें तो उनका मुकाबला सोनिया के विश्वासपात्र मल्लिकार्जुन खड़गे से होता दिख रहा है. हालांकि इस चुनाव का नतीजा पूछने पर थरूर ने स्वयं कहा कि नतीजों से ज्यादा महत्वपूर्ण विचारधारा है और ये फ्रेंडली मैच है, और हमारे बीच कोई प्रतिद्वंदिता नहीं है.

शशि थरूर की छवि एक खांटी राजनीतिज्ञ की नहीं है. लहराते हुए बाल, गले में लटकता मोबाइल और दो हिस्सों में बंटने वाले चश्मे में देखकर ज्यादातर लोग ये अंदाजा नहीं लगा पाते हैं कि उनकी उम्र 66 साल की है.  कभी ट्विटर पर तो कभी औपचारिक भाषण में संत स्टीफेंस कॉलेज का ये पुराना छात्र अंग्रेजी के ऐसे शब्द बोल या लिख देता है कि उसका अर्थ जानने के लिए पत्रकारों और उनके सर्किल के लोगों को डिक्शनरी के पन्ने उलटने पड़ जाते हैं.

भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी के साथ शशि थरूर- फोटो- पीटीआई

अबतक के करियर में शशि थरूर कई रोल में दिखते रहे हैं. लंदन में जन्मे थरूर ने स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और 1978 में 22 साल की उम्र में ही पीएचडी की डिग्री ले ली. इसी साल UNHCR से उन्होंने बतौर डिप्लोमैट उन्होंने अपने प्रोफेशन करियर की शुरुआत की. संयुक्त राष्ट्र में अलग अलग हैसियत में उन्होंने 23 साल गुजारे. 2007 में जब वे UN महासचिव का चुनाव नहीं जीत पाए लेकिन भारत का शिक्षित वर्ग उन्हें जानने लगा. इस चुनाव में वे नंबर दो पर रहे. फिर 2009 में उन्होंने भारत का रुख किया और कांग्रेस ज्वाइन कर ली. डिप्लोमेसी के चमकते करियर के दौरान भी शशि थरूर पढ़ाई लिखाई से प्यार जारी रहा. 10 साल में उन्होंने फिक्शन-नॉन फिक्शन, धर्म, आईडेंटिटी से जुड़ी दर्जनों किताबें लिखी.

यहां से उनके करियर का नया दौर शुरू हुआ. थरूर केरल के तिरुवनंतपुरम सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर दिल्ली के सियासी सर्किल में आ गए. कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें पहली पारी में ही विदेश राज्य मंत्री बना दिया.

तीन शादियां, उथल-पुथल भरी निजी जिंदगी

सियासत से दूर अगर थरूर की निजी जिंदगी की बात करें तो इस मोर्चे काफी हलचल रही. शशि थरूर की पहली शादी तिलोत्तमा मुखर्जी से 1981 में हुई. इस शादी से दोनों को जुड़वां बच्चे कनिष्क और इशान हुए. 2007 में इनके बीच तलाक हो गया. इसी साल थरूर ने कनाडा की चेरिस्टा गिल्स से शादी की. जो उन दिनों संयुक्त राष्ट्र के एक विभाग में डिप्टी सेक्रेट्री थीं. थरूर का ये विवाह तीन साल तक चला और साल 2010 में दोनों अलग हो गए. इसी साल 22 अगस्त 2010 को थरूर ने दुबई की बिजनेसवूमन सुनंदा पुष्कर से ब्याह रचाया.

लेकिन थरूर की जिंदगी में हलचल अभी बाकी थी. 17 जनवरी 2014 मीडिया में तब हलचल मच गई जब दिल्ली के फाइव स्टार लीला होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में सुनंदा पुष्कर मृत पाई गईं. इस मामले में थरूर पर आरोप लगे लेकिन 18 अगस्त 2021 को दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया.

शशि थरूर का एक भाषण अभी भी चर्चा में है. इस भाषण में उन्होंने कहा कि 200 साल के कब्जे के दौरान ब्रिटेन ने भारत का जमकर औपनिवेशिक शोषण किया है. इसके लिए ब्रिटेन को भारत की क्षतिपूर्ण करनी चाहिए.

कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में उतरे

कांग्रेस में शशि थरूर जी-23 ग्रुप के नेता माने जाते हैं. इस साल जब कांग्रेस अध्यक्ष पद चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई तो शशि थरूर ने ये ऐलान कर सबको चौंका दिया कि वे भी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे. यहां चौंकाने वाली बात इसलिए है क्योंकि वे राहुल गांधी के राजनीति के तरीके से इत्तेफाक नहीं रखते. वे कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव की बात करते हैं. लेकिन साथ ही साथ वे ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में दिखते हैं और फिर सोनिया से मिलकर कांग्रेस अध्यक्ष के पद के लिए चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा दिखाते हैं.

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