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गहलोत नहीं तो कौन होगा राजस्थान का सीएम? दावेदारों में ये नाम सबसे आगे

जयपुर। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की जगह नए मुख्यमंत्री की तलाश शुरु हो चुकी है. सूत्रों का दावा है कि गहलोत अपना इस्तीफा सोनिया गांधी को ऑफर कर चुके हैं. अब नए मुख्य़मंत्री के नाम पर सहमति बनी तो गहलोत को राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने के लिए कहा जा सकता है. हालांकि कुर्सी बचाने के लिए गहलोत के दावेंपच अभी भी जारी है.

इस बीच नए मुख्यमंत्री के दावेदारों की रेस शुरु हो गई. इस रेस में सबसे आगे फिलहाल सचिन पायलट ही है. हालांकि उनके अलावा भी सीएम बनाने को लेकर अन्य नामों की चर्चा हो रही है. ऐसे में सीएम बनने के लिए कौन कितने प्रबल दावेदार हैं, इसे आप निम्न बिन्दुओं से समझ सकते हैं.

1. सचिन पायलट
कांग्रेस आलाकमान की पहली पसंद भी फिलहाल गहलोत की जगह पायलट ही हैं. लेकिन, गहलोत ने पायलट को रोकने के लिए  पूरी ताकत झोंक दी है. दरअसल सचिन पायलट के सबसे मजबूत दावेदार होने के पीछे कुछ वजह है. राजस्थान में पायलट लोकप्रिय चेहरा माना जाता है. प्रिंयका औऱ राहुल गांधी दोनों पायलट को अगला सीएम देखना चाहते हैं. इसके साथ ही उन्हें गुर्जर समुदाय का समर्थन है.
वहीं वह युवाओं में लोकप्रिय चेहरा भी माने जाते हैं. राजस्थान कांग्रेस के जाट और मीणा नेताओं में से अधिकतर पायलट के साथ हैं. पायलट को सीएम बनाने पर पार्टी के नेता उम्मीद कर रहे हैं कि पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान और मेवाड़ की करीब 100 सीटों पर सीधा फायदा मिल सकता है. वहीं पायलट की अगुवाई में ही 2018 में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव जीता था. कांग्रेस के अधिकतर विधायक भी मान रहे हैं कि कांग्रेस की सत्ता में वापसी 2023 में सिर्फ पायलट ही करा सकते हैं. लेकिन, उनके लिए कमजोर पक्ष है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनका गुट पूरी तरह पायलट के खिलाफ है.

2. सीपी जोशी

पायलट को रोकने के लिए अगर गहलोत अपनी पसंद का सीएम नहीं बना पाए तो सीपी जोशी के नाम पर समर्थन दे सकते हैं. लेकिन, कमोजर पक्ष  यह है कि सीपी जोशी अब गांधी परिवार की पसंद नहीं है. जनाधार वाला लोकप्रिय चेहरा न होना और व्यवहार भी उनका कमजोर पक्ष माना जा रहा है.

3. बीडी कल्ला

बिडी कल्ला विधानसभा अध्यक्ष हैं और गहलोत की पहली पसंद हैं. कल्ला विपक्ष के नेता औऱ कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं. राजस्थान में कांग्रेस के सबसे सीनियर नेताओं में से एक हैं और निर्विवाद चेहरा हैं.
ब्राह्मण समुदाय आते हैं. इस समुदाय को साधने के लिए कल्ला पर दांव खेलने की सलाह अशोक गहलोत कैंप की ओर से भी दी जा रही है. कल्ला 1998 से गहलोत के समर्थक हैं. कमजोर पक्ष यह है कि जनाधार वाले नेता नहीं माने जाते हैं.

4. गोविंद सिंह डोटासरा

डोटासरा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और अशोक गहलोत के करीबी भी माने जाते हैं. जाट समुदाय से आते हैं. गहलोत कल्ला के साथ डोटासरा का नाम आगे कर रहे हैं. जाट समुदाय के वोट बैंक को साधने के लिए डोटासरा पर दांव खेलने की सलाह दी जा रही है. लेकिन, इनका भी कमजोर पक्ष है कि लोकप्रिय चेहरा नहीं हैं. जाट समुदाय की ताकत पश्चिमी राजस्थान में है. लेकिन डोटासरा शेखावाटी से आते हैं.

5. महेंद्रजीत सिंह मालवीय

मालवीय गहलोत सरकार में मंत्री हैं और जनजाति से ताल्लुक रखते हैं. जनजाति बहुल बांसवाड़ा से विधायक हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी भी हैं, गहलोत आदिवासी कार्ड के नाम पर मालवीय का नाम आगे कर रहे हैं. डूंगरपुर बांसवाड़ा समेत पूर्वी राजस्थान में आदिवासी वोट बैंक साधने के लिए
कमजोर पक्ष है कि आरोपों से घिरे रहते हैं. आदिवासी इलाके से इत्तर बड़ी पहचान नहीं है.

6 शंकुतला रावत

शंकुतला रावत गहलोत सरकार में मंत्री हैं. गहलोत समर्थक हैं और गुर्जर जाति से आते हैं. सचिन पायलट को रोकने के लिए गुर्जर मुख्यमंत्री के रुप में शंकुतला रावत का नाम चलाया जा रहा है.

रघु शर्मा गुजरात के कांग्रेस के प्रभारी हैं. स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं. बतौर स्वास्थ्य मंत्री कोरोना के दौरान बेहतर काम करने का रिकार्ड भी उनके नाम है. रघु शर्मा किसी कैंप में नहीं फिलहाल पार्टी हाईकमान के साथ हैं, राहुल गांधी के साथ नजदीकी है. गहलोत और पायलट दोनों गुटों से संपर्क है. ब्राह्मण समुदाय से हैं. राजस्थान में ब्राह्मण वोट बैंक को साधने के लिए दांव खेल सकते हैं. अगर हाईकमान पायलट को सीएम बनाने में नाकाम रहे तो कंप्रोमाईज कैंडिडेट के रूप में रघु शर्मा के नाम पर दोनों गुट सहमत हो सकते हैं.

8 लालचंद कटारिया

कटारिया गहलोत सरकार में कृषि मंत्री हैं, पहले सीपी जोशी गुट में थे. अभी गहलोत औऱ सीपी दोनों गुट में हैं. जाट समुदाय से हैं. जाट वोट बैंक को साधने के लिए कटारिया का नाम है. गहलोत सीपी कटारिया का समर्थन कर सकते हैं. कमजोर पक्ष- लोकप्रिय चेहरा नहीं हैं. जयपुर के जाट नेता माने जाते हैं. जाट बाहुल्यपश्चिम राजस्थान में जाटों के बीच पकड़ नहीं है.

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