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अखिलेश यादव की यंग टीम… पार्टी के प्रकोष्ठों में शिवपाल के करीबी समेत इन नेताओं को मिली जगह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के फ्रंटल संगठनों के नए चेहरों को कमान सौंपी गई है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पार्टी के तीन फ्रंटल संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष के नामों की ऐलान कर दिया है, जिसमें चाचा शिवपाल सिंह यादव के करीबी को भी जगह मिली है. सपा ने महिला प्रकोष्ठ और अनुसूचित जाति सभा की कमान नए चेहरों को सौंपी है, वहीं पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ की बागडोर एक बार फिर से पुराने ही नेता को सौंपी गई है.

समाजवादी पार्टी महिला सभा के प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी रीबू श्रीवास्तव को सौंपी गई है. ऐसे ही सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष एक बार फिर राजपाल कश्यप बनाए गए हैं जबकि सपा के अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ की कमान व्यासजी गौड़ को सौंपी गई है. सपा के तीनों प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति का ऐलान प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने प्रेस रिलीज जारी कर किया है.

शिवपाल यादव की करीबी हैं रीबू श्रीवास्तव

सपा की महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष बनी रीबू श्रीवास्तव को सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव का करीबी माना जाता है. उनकी नियुक्ति को पार्टी में शिवपाल यादव की बढ़ती सक्रियता के रूप में लिया जा रहा है. राजपाल कश्यप और व्यासजी गौड़ को अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है. करीब 2 महीने पहले जुलाई में अखिलेश प्रदेश कार्यकारिणी और सभी फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया था और ऐसे में नए सिरे से टीम की घोषणा की है.

अखिलेश यादव के साथ राजपाल कश्यप

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सपा ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है. ऐसे में सपा अपने राष्ट्रीय संगठन और प्रदेश प्रकोष्ठ के जरिए अपनी सियासी समीकरण सेट करने शुरू कर दिए हैं. सपा समाज के सभी वर्गों को जोड़ने की कवायद कर रही है, लेकिन उसकी नजर मुख्य तौर पर ओबीसी, अति पिछड़े और दलित वोटों पर है. इन्हीं वोटों के लेकर सपा अपना एजेंडा सेट कर रही है.

समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी, प्रवक्ताओं और प्रदेश के फ्रंटल संगठनों के बाद प्रदेश कमेटी की भी जल्द घोषणा कर सकते हैं. इसी तरह कई जिलों में भी जिलाध्यक्ष बदले जाएंगे, जिससे नीचे समन्वय और सक्रियता दोनों बढ़ाई जा सके. विधानसभा चुनाव के पहले बनी टीम में प्रदेश संगठन से लेकर जिलों तक में दूसरे दलों से आए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई थी. प्रदेश संगठन में युवाओं और महिलाओं की भी भागीदारी बढ़ाने की तैयारी है, जिससे नए वोटबैंक को जोड़ा की रणनीति है.

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