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अतीक अहमद ने इस IPS के डर से खुद पर करवाया था हमला… पुलिस अफसर ने बताई ‘डॉन’ की कहानी

अतीक अहमद और रिटायर्ड आईपीएस लालजी शुक्लालखनऊ। उमेश पाल हत्याकांड के बाद जिस अतीक अहमद के नाम पर उत्तर प्रदेश पुलिस हलकान है. अहमदाबाद से लेकर नेपाल तक खाक छान रही है. उस अतीक अहमद को कभी यूपी पुलिस के एक अफसर से इतना डर लगता था कि अतीक ने खुद पर बम से हमला कराया ताकि उसके खिलाफ की जा रही कार्रवाई को रोका जा सके.

हर ऑपरेशन को अपने नियंत्रण में रखता है अतीक

रिटायर्ड आईपीएस लालजी शुक्ला ने कहा, ‘अतीक अहमद ने उमेश पाल हत्याकांड में असद को इसलिए शामिल कराया, जिससे यह ऑपरेशन सफल हो सके, राजू पाल पर जो हमला हुआ, उसमें अशरफ था. कई हत्याओं में वह (अतीक) खुद रहा, हमेशा किसी भी वारदात के ऑपरेशन को अतीक ने अपने नियंत्रण में रखा है, कहीं अशरफ तो कहीं वह खुद था, एक वारदात में तो इनके पिता भी रहे हैं, जिन्होंने खुद ललकार कर चकिया इलाके में एक हत्या करवाई थी.’

उमेश पाल हत्याकांड में कहां चूक हुई?

रिटायर्ड आईपीएस लालजी शुक्ला ने कहा, ‘इसे चूक ना कहा जाए. अतीक अहमद काफी दिनों से गुजरात जेल में है. यह जरूर है कि इसका अनुमान नहीं था कि उमेश पाल की हत्या करवाई जाएगी क्योंकि उसके गैंग के अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, पुलिस को लग रहा था कि वह अब उस तरह से सक्रिय नहीं है जैसा रहता था, इसलिए धोखे में यह घटना हो गई, उमेश पाल हत्याकांड में कुछ नए शूटर है, कुछ पुराने शूटर हैं… पुराने शूटर सक्रिय नजर नहीं आए… नए के बारे में जानकारी नहीं हो पाई, जिसकी वजह से इनके खिलाफ कार्रवाई होने में रह गया होगा.’

घटना के वक्त असद का मोबाइल और एटीएम लखनऊ में था, इसे पेशबंदी माना जाए?

रिटायर्ड आईपीएस लालजी शुक्ला ने कहा, ‘यह बड़े शातिर अपराधी हैं, शातिर गैंगस्टर हैं, हर कला में माहिर हैं, 1996 में प्रयागराज के सिविल लाइन में अशोक साहू की हत्या हुई थी, अशरफ और उसके साथियों के द्वारा मारा गया था… अतीक ने अपने संबंधों से अशरफ को 19 जनवरी 1996 को ही चंदौली जिले की कोतवाली के हवालात में आर्म्स एक्ट में निरुद्ध दिखा दिया था, अशरफ की मौजूदगी घटना के वक्त हवालात में दिखाई गई थी, अशरफ यहां हत्या कर रहा है, जाहिर है वहां अशरफ के नाम पर दूसरा कोई बंद हुआ था, फिर भी जेल गया था और रिमांड हुआ था… उसकी बेल भी हुई थी.’

मुख्तार और अतिक के बीच कैसे रिश्ते हैं?

रिटायर्ड आईपीएस लालजी शुक्ला ने कहा, ‘इस समय का नहीं बता सकता हूं, लेकिन मेरी जानकारी में मुख्तार और अतीक के बीच दुश्मनी की कोई घटना या तथ्य मेरी जानकारी में नहीं आया, इनके मधुर संबंध रहे हैं.’

अतीक ने खुद पर ही क्यों बम चलवा लिया था?

रिटायर्ड आईपीएस लालजी शुक्ला ने कहा, ‘अतीक के खिलाफ मेरी नियुक्ति के दौरान इलाहाबाद की पुलिस ने बहुत कार्रवाई की थी, जब प्रभावी कार्रवाई हुई औ नियम कायदे कानून का फायदा नहीं लेने दिया तो उसके अंदर डर पैदा होना स्वाभाविक था, वह मुझसे क्या… कानून से डरता था क्योंकि कानून उसका पीछा कर रहा था. यह 7 अगस्त 2002 की बात है, अतीक पेशी पर लाया गया था, रिमांड की कार्रवाई होनी थी और उन्होंने स्वरचित बम कांड कराया था.’

रिटायर्ड आईपीएस लालजी शुक्ला ने कहा, ‘हमला ऐसा करवाया ताकि हमला घातक ना हो लेकिन हमला हो, इस घटना के बाद इनके समर्थकों के द्वारा कर्नलगंज जार्जटाउन, कोतवाली, शाहगंज धूमनगंज खुल्दाबाद समेत कई जगहों पर हिंसा की गई, अकस्मात घटना होती तो सभी जगह एक साथ हिंसा शुरू नहीं होती… इसका केवल एक उद्देश्य था कि पुलिस प्रशासन दबाव में आ जाए और कोई कार्रवाई न करें, लेकिन इनकी रचना साजिश फेल कर गई जब अखलाक गिरफ्तार हुआ.’

रिटायर्ड आईपीएस लालजी शुक्ला ने आगे कहा, ‘अखलाक ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया था कि अतीक ने अपने पिता और भाई के सहयोग से यह घटना कराई, उस समय पर अतीक अहमद की बहुत प्रॉपर्टी अटैच हुई थी लेकिन सत्ता का परिवर्तन हुआ, अतीक की समर्थक सरकार आ गई, उसने सारी प्रॉपर्टी रिलीज करा ली, उसके बाद पुलिस में वह भाव नहीं बन सका, जिससे कार्रवाई हो पाती.’

किस मामले में अतीक पर एक दिन में 113 मुकदमे दर्ज हुए थे?

रिटायर्ड आईपीएस लालजी शुक्ला ने कहा, ‘अतीक अहमद पहले गुंडई करता था, रंगदारी वसूली करता था लेकिन उसने जो बड़ा व्यापार पकड़ा वह था रेलवे की ठेकेदारी. कोई इसके खौफ के मारे टेंडर डालता नहीं था. अतीक अहमद बड़े पैमाने पर स्क्रैप के काम में गड़बड़ी करता था, खूब पैसा कमाया, साल 2002 में इसने व्यापार करने के लिए 12 फर्म खोली और इनमे से केवल दो फर्म सेल टैक्स में रजिस्टर्ड थी और 10 फर्म फर्जी थी और सभी एक ही पते पर रजिस्टर्ड थी.’

रिटायर्ड आईपीएस लालजी शुक्ला ने कहा, ‘इन्हीं फर्म से वो ट्रांजैक्शन करता रहा, जब यह बात पता चली तो रेलवे, सेल्स टैक्स सभी से रिकॉर्ड लिए गए, अरबों की हेरा फेरी सामने आई, उस समय पर कुल 113 मामले बन रहे थे.. इन सभी मामलों को दर्ज करने के लिए थाना धूमनगंज को भेजा गया.. थाना धूमनगंज ने एक तकनीकी चूक कर दी, सभी 113 एफआईआर एक साथ एक सीरियल में लिख ली, इसको लेकर अतीक अहमद ने हाई कोर्ट में अपील की जिस पर हाईकोर्ट ने टेक्निकल ग्राउंड पर सभी एफआईआर खत्म कर दी. फिर सरकार बदल गई और अतीक फिर तरक्की करने लगा.’

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