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मुलायम-अखिलेश के खिलाफ क्यों बंद हुई थी जांच? CBI रिपोर्ट की प्रति की मांग सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें यूपी के पूर्व मुख्यमंत्रियों मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की प्रारंभिक जांच बंद करने की सीबीआई रिपोर्ट की प्रति मांगी गई थी। सीबीआई ने 2019 में शीर्ष अदालत को बताया था कि चूंकि मुलायम और उनके दो बेटों- अखिलेश और प्रतीक के खिलाफ संज्ञेय अपराध होने का “प्रथम दृष्टया कोई सबूत” नहीं मिला था, इसलिए प्रारंभिक जांच (पीई) को आपराधिक मामले/प्राथमिकी में नहीं बदला गया था। इस तरह, सात अगस्त, 2013 के बाद मामले में कोई जांच नहीं हुई थी।

शीर्ष अदालत ने बताया कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का निधन हो चुका है और याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी से पूछा कि मामले में क्या बचा है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि मुलायम के खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई है, लेकिन आरोप उनके बेटों-अखिलेश और प्रतीक के खिलाफ भी हैं।

चतुर्वेदी के वकील ने तर्क दिया कि उन्होंने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के समक्ष एक आरटीआई आवेदन दायर किया था और उन्हें सूचित किया गया था कि सीबीआई द्वारा ऐसी कोई क्लोजर रिपोर्ट दायर नहीं की गई थी।

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि क्लोजर रिपोर्ट 2013 में दायर की गई थी और याचिकाकर्ता ने 2019 में अपनी याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने पूछा, “हमें बताएं कि इतने वर्षों के बाद हम इस आवेदन पर कैसे विचार कर सकते हैं।”

समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का 82 साल की उम्र में पिछले साल 10 अक्टूबर को गुरुग्राम के एक अस्पताल में निधन हो गया था।

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