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26 अवैध मजारों पर चला बुलडोजर… नीचे नहीं मिला कोई मानव अवशेष: एक्शन में उत्तराखंड की धामी सरकार, ऐसे 1400 जगह लिस्ट में

पछुवा देहरादून के वन विभाग क्षेत्र में अवैध रूप से बनाई गई 26 मजारों को धामी सरकार के बुलडोजरों ने ध्वस्त कर दिया है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में मजार लैंड जिहाद के तहत जंगलों में 1400 से अधिक मजार और अन्य अतिक्रमण वाले स्थल चिन्हित हुए थे, जिन्हें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हटाने के निर्देश दिए थे।

वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बुलडोजर से 26 अवैध मजारों को ध्वस्त करके मिट्टी में मिला दिया गया है। इन मजारों को कुछ महीनों में ही बनाया गया था। दिलचस्प बात ये है कि इनमें कुछ मजारों को रिजर्व फॉरेस्ट में ऐसी जगहों पर बनाया गया था, जहां आम लोगों के आने-जाने और किसी भी प्रकार की निर्माण सामग्री ले जाने पर सख्त पाबंदी है। वन विभाग ने कालसी वन प्रभाग में 7 मजारें, लाडपुर में 6 और रायपुर फॉरेस्ट एरिया में 5 मजारों को बुलडोजर से ध्वस्त किया है। इन मजारों में किसी तरह के कोई मानव अवशेष नहीं मिले हैं।

जानकारी के मुताबिक बरेलवी मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग उत्तराखंड की वन भूमि पर लैंड मजार जिहाद के तहत काम कर रहे हैं। ये लोग पहले सड़क किनारे झंडे और पत्थरों में चूना लगाकर मार्ग के एरो बनाते हैं, फिर जंगल में पत्थर का एक टीला बनाकर उसपर सफेद, नीली चादर चढ़ाकर आसपास के पेड़ों पर हरे झंडे लगा देते हैं। उसके बाद धूप बत्ती लगाकर अपना धंधा शुरू कर देते हैं। यहां मुस्लिम कम और अंधविश्वासी गरीब तबके के हिंदू ज्यादा आने लगते हैं। धीरे-धीरे ये मजारें वृहद रूप ले लेती हैं। वन विभाग की टीम ने टिमली रेंज के जंगल में बनी हजरत रोशन शाह की कथित मजार को मिट्टी में मिला दिया है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मजार का निर्माण अवैध रूप से आरक्षित वन क्षेत्र में किया गया था।

वन विभाग का यह तीसरा बड़ा अभियान 

देहरादून जिले में मजारों के हटाने का वन विभाग का यह तीसरा बड़ा अभियान था। दो माह पहले भी देहरादून वन प्रभाग में दो दर्जन मजारों को ध्वस्त किया गया था और कालसी क्षेत्र में भी रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र से मजारों को हटाया गया था। जानकारी के मुताबिक शिमला रोड पर वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के दौरान एक छोटे मंदिर को भी हटाया गया है।

सीएम धामी के हैं निर्देश
उत्तराखंड में मजार लैंड जिहाद पर वन विभाग की कार्रवाई के पीछे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश हैं। पिछले माह आईएफएस अधिकारियों के सम्मेलन में सीएम धामी ने स्पष्ट कहा था कि फॉरेस्ट एरिया में अतिक्रमण कर बनाई गई मजारों और अन्य अतिक्रमण को तुरंत हटाया जाए।

फॉरेस्ट विभाग के यमुना सर्कल के सी.एफ. डॉ विनय भार्गव ने कहा कि हमने सर्वे करवाया है। जंगल में अवैध मजार हो या फिर अन्य कोई अतिक्रमण हो, उसे हम हटाने का काम कर रहे हैं। रिजर्व फॉरेस्ट में बनी मजारों को हटा दिया गया है। डॉ भार्गव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का 29 सितंबर 2009 का एक आदेश है कि राजकीय संपत्ति पर कोई भी नए धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं किया जा सकता। यदि कोई करता है तो इसके लिए उसे डीएम से लिखित अनुमति लेनी होगी।

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