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4 साल पुराना भाषण, 2 साल की सजा… वो केस जिससे चली गई राहुल गांधी की सदस्यता

नई दिल्ली। केरल के वायनाड से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई है.  लोकसभा सचिवालय ने शुक्रवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया है. दरअसल मोदी सरनेम वाले मानहानि केस में सूरत की सेशन कोर्ट ने राहुल गांधी को दोषी ठहरा दिया है. कोर्ट ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई है. राहुल को मानहानि केस में IPC की धारा 499 और 500 के तहत दोषी करार दिया गया है. हालांकि कोर्ट ने सजा पर 30 दिन की रोक लगाते हुए उन्हें तुरंत जमानत भी दे दी.

जनप्रतिनिधि कानून के मुताबिक अगर सांसदों और विधायकों को किसी भी मामले में 2 साल से ज्यादा की सजा हुई है तो ऐसे में उनकी सदस्यता (संसद और विधानसभा से) रद्द हो जाएगी. इतना ही नहीं सजा की अवधि पूरी करने के बाद छह वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य भी होते हैं.

राहुल ने कहा था- हमें दया नहीं चाहिए…

कोर्ट में सुनवाई के दौरान राहुल गांधी ने कहा था,’मैं राजनेता हूं. ऐसे में जो भ्रष्टाचार हो रहे हैं, उसे उठाना मेरा फर्ज है. मैंने इसी फर्ज को निभाया. मेरा इरादा किसी को नुकसान पहुंचाने का नहीं था. मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं कहा. आगे की बात मेरे वकील कहेंगे’. वहीं राहुल के वकील ने कोर्ट में कहा, हम कोर्ट से माफी नहीं मांग रहे, हमें दया नहीं चाहिए. लेकिन जो कुछ हुआ, वो फर्ज के हिसाब से किया. राहुल के इस बयान से किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. राहुल ने सजा सुनाए जाने के बाद एक ट्वीट भी किया था. उन्होंने लिखा था- मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है. सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन- महात्मा गांधी. इससे पहले हुई सुनवाई में राहुल ने कहा था कि वो खुद पर लगे आरोप से इनकार करते हैं. उन्होंने चुनावी रैली में ऐसा कहा था, ये उन्हें याद नहीं है.

राहुल गांधी ने यह दिया था बयान

राहुल गांधी ने कर्नाटक में 13 अप्रैल 2019 को चुनावी रैली में कहा था कि नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है? इसके बाद बीजेपी विधायक ने मानहानि का केस करते हुए आरोप लगाया था कि राहुल ने 2019 में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पूरे मोदी समुदाय को कथित रूप से यह कहकर बदनाम किया कि सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है? उनके इस बयान से हमारी और समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची. पूर्णेश भूपेंद्र पटेल सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री थे. वे दिसंबर में सूरत से दोबारा विधायक चुने गए हैं.

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