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‘स्वामी प्रसाद मौर्य राजनीतिज्ञ हैं, विद्वान नहीं’ बद्रीनाथ वाले बयान पर बोले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

स्वामी प्रसाद मौर्य और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (file photo).बदरीनाथ धाम पर सपा महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य के बयानबाजी के बाद तीर्थ पुरोहित पंडा समाज सहित शंकराचार्य और तमाम हिंदू धर्मावलंबियों में आक्रोश दिखाई दे रहा है. वहीं, मौर्य के बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति, अध्यक्ष अजेंद्र अजय सहित बद्रीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने दी प्रतिक्रिया दी है.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा ”हमने स्वामी प्रसाद मौर्य को टेलीफोन किया था, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई. जिस तरह का वक्तव्य फैलाया जा रहा है वह यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि आठवीं शताब्दी तक बद्रीनाथ बौद्ध तीर्थ था और बौद्ध तीर्थ को समाप्त करता बद्रीनाथ जी का मंदिर बनाया. स्वामी प्रसाद मौर्य ना तो धर्म शास्त्र के विद्वान हैं ना ही इतिहास के विद्वान हैं, वह राजनीतिज्ञ है राजनीति को चमकाने के लिए बीच-बीच में ऐसे बयान देते रहते हैं. सनातन धर्म की भावनाओं को बार-बार ठेस पहुंचाते रहते हैं, इससे पहले भी उन्होंने रामचरितमानस को जलाने के लिए प्रेरित किया था.”

मौर्य का ऐसा कहना मानसिक दिवालियापन : बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय

वहीं, बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान को मानसिक दिवालियापन करार दिया. बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने श्री बदरीनाथ धाम पर स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सपा तथा कांग्रेस सनातन विरोधी हैं.

उन्होंने आगे कहा कि हिंदू तीर्थ स्थलों के बारे में ऐसे बयान देना इन पार्टियों के एजेंडे का हिस्सा है. साथ ही कहा कि कांग्रेस को मौर्य के बयान पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि समाजवादी पार्टी उनके गठबंधन की सहयोगी है. ऐतिहासिक प्रमाण है कि बद्रीनाथ धाम युगों से विद्यमान है. पुराणों व शास्त्रों में बद्रिकाश्रम का वर्णन मिलता है. आदि गुरु शंकराचार्य ने बद्रीनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार किया. अत: स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान का कोई तार्किक आधार नहीं है.

उन्हें इतिहास पढ़ना चाहिए – भुवन चंद्र उनियाल

बद्रीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने भी स्वामी प्रसाद मौर्य को करारा जवाब दिया है. उन्होंने कहा जिन लोगों को इतिहास का ज्ञान ही नहीं है वह ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं या ऐसी जानकारी रखते हैं तो उन्हें इतिहास पढ़ना चाहिए. चारों युगों में भगवान बद्री विशाल का इतिहास मिलता है, पुराण मिलते हैं. आप ( स्वामी प्रसाद मौर्य) ध्यान नहीं रखते हैं साथ ही आपने आदि जगतगुरु शंकराचार्य जी के जीवन पर भी एक प्रश्न चिन्ह लगा दिया. आपको शंकराचार्य जी के जीवन काल मालूम ही नहीं है. पूरे भारत को एक सूत्र में बांधने वाला व्यक्ति है, जिस पर आपने तोड़ने की बात कर दी. आपको पूरी जानकारी नहीं है हम इस बयान की भर्त्सना करते हैं.

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