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हल्द्वानी में मुस्लिम भीड़ का टारगेट थी पुलिस और मीडिया, पहले से तैयार थी हमले की योजना: हिंसा पीड़ित पत्रकार मुकेश सिंह ने बताया सब कुछ

पीड़ित पत्रकार (बाएँ) एवं अधिकारी गणउत्तराखंड के हल्द्वानी में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई कर रही पुलिस पर किए गए हमले में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। नैनीताल की जिलाधिकारी वंदना सिंह ने शुक्रवार (9 फरवरी 2024) को बताया कि हल्द्वानी नगर निगम की टीम पर हुआ हमला पूर्व नियोजित था। वहीं, हिंसा पीड़ित पत्रकार मुकेश सिंह ने भी कहा पुलिस और मीडिया को निशाना बनाने की योजना पहले ही बना ली गई थी।

मुकेश सिंह ने कहा, “हमले में पुलिस और मीडियाकर्मियों को निशाना बनाया गया। इसमें कई पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए और पत्रकारों की गाड़ियों में आग लगा दी गई। यह हमला पूरी योजना के साथ किया गया था। घटना के दिन शाम करीब 4:30 बजे अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया गया और 4:45 बजे तक मौके पर करीब 1500 लोग मौजूद थे। इस दौरान भीड़ ने पथराव किया और पेट्रोल बम फेंके। यह सब बनभूलपुरा के निवासियों द्वारा योजना बनाकर किया गया था।”

पत्रकार मुकेश सिंह ने आगे कहा कि जिस कॉलोनी में तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई, वह अवैध है। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए मदरसा-मस्जिद के खिलाफ अधिकारियों ने यह कार्रवाई उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बाद किया था। उन्हें इस लिंक पर सुना जा सकता है। उनका कहना है कि बनभूलपुरा में कई बाहरी लोग बसे हैं।

पत्रकार मुकेश सिंह ने कहा, “केवल वही लोग जानते हैं कि ये कहाँ से आए हैं… उनमें से कई के पास कोई सत्यापन या आईडी नहीं है… वे यूपी से यहाँ आए हैं और वह जगह [अतिक्रमण स्थल] अवैध है। उन्होंने [मदरसा-मस्जिद अधिकारियों] ने अवैध रूप से सरकारी भूमि पर कब्जा कर लिया है।”

पत्रकार ने आगे बताया, “कल जब सरकार अपनी जमीन पर दावा करने पहुँची तो उन पर पत्थरों से हमला कर दिया गया। जमीन भी पंजीकृत नहीं है, लेकिन केवल 50 रुपए का पट्टा है और यह जमीन नगर निगम का है।” मुकेश सिंह ने कहा कि दंगाइयों ने बनभूलपुरा पुलिस स्टेशन पर हमले किए और दर्जनों वाहनों में पेट्रोल बम फेंक कर आग लगा दी गई थी।

बनभूलपुरा में गुरुवार को हुई हिंसा में 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। इनमें कई अधिकारी भी शामिल हैं। भीड़ की हिंसा में घायल हुए पुलिस अधिकारियों के कई वीडियो सामने आए हैं। घायलों में सिर्फ पुरुष अधिकारी ही नहीं, बल्कि कई महिला अधिकारी भी शामिल हैं। हमले में घायल हुई ऐसी ही एक महिला अधिकारी ने इस्लामी भीड़ द्वारा फैलाई गई भयावहता के बारे में बताया।

महिला अधिकारी ने कहा, “पथराव से बचने के लिए हमने एक घर में शरण ली। उस घर में 15-20 लोग घुस आए और हम पर हमला कर दिया। हम पर हर तरफ से पथराव किया जा रहा था। यहाँ तक कि छतों से भी हमला किया गया। भीड़ ने हमें जिंदा जलाने के इरादे से घर में आग लगाने का भी प्रयास किया।” पथराव करने में सैकड़ों की संख्या में महिलाएँ और नाबालिग बच्चे भी शामिल थे।

बता दें कि 8 फरवरी 2024 को अवैध मदरसे और मस्जिद के विध्वंस को लेकर एक इस्लामी भीड़ ने उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हिंसा फैलाई थी। अवैध संरचना के बारे में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रह्लाद मीणा ने कहा कि मदरसा-मस्जिद का निर्माण अतिक्रमण की गई सरकारी भूमि पर अवैध रूप से किया गया था। इन्हें गिराने की कार्रवाई अदालत के आदेश के तहत की गई थी।

वहीं, नैनीताल की डीएम वंदना सिंह ने कहा, “यह एक खाली संपत्ति है जिसमें दो संरचनाएँ हैं। ये धार्मिक संरचनाओं के रूप में पंजीकृत नहीं हैं या उन्हें ऐसी कोई मान्यता नहीं दी गई है। कुछ लोग इस संरचना को मदरसा कह रहे हैं।

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